कथाएँ

नरसिंह अवतार कथा – अध्याय 2: प्रह्लाद की भक्ति

Tilak Kathayein12 Apr 2026145 views
नरसिंह अवतार कथा
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 2 — प्रह्लाद की भक्ति। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद विष्णु का परम भक्त बनता है, जिससे हिरण्यकशिपु क्रोधित होता है।

प्रह्लाद की भक्ति

पिछले अध्याय में हमने शक्तिशाली हिरण्यकशिपु के उदय और अपनी अमरता की खोज के बारे में जाना। उसकी तपस्या और ब्रह्मा जी से प्राप्त वरदान ने उसे अजेय बना दिया था। लेकिन भाग्य की विडंबना देखिए, उसी हिरण्यकशिपु के पुत्र, प्रह्लाद की भक्ति से एक नई कहानी का सूत्रपात हो रहा था।

गर्भ में भक्ति का बीज

रानी कयाधू, हिरण्यकशिपु की पत्नी, देवराज इंद्र द्वारा हरण किए जाने के बाद देवर्षि नारद के आश्रम में शरण ली हुई थीं। नारद मुनि के उपदेशों और भगवान विष्णु के नाम जाप से कयाधू का मन शांत हो गया था। उनके गर्भ में पल रहा शिशु प्रह्लाद, माता के माध्यम से ही भगवान विष्णु की भक्ति से जुड़ गया था। वह अभी जन्मा भी नहीं था, और उसके हृदय में विष्णु प्रेम का अंकुर फूट चुका था। नारद मुनि ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक विष्णु का परम भक्त होगा और धर्म की रक्षा करेगा।

कयाधू मन ही मन सोचती, "कैसा अद्भुत बालक है मेरा! जन्म से पहले ही भगवान विष्णु के प्रेम में डूबा हुआ। हिरण्यकशिपु को यह जानकर कैसा लगेगा? विष्णु के प्रति प्रेम, जिसके विनाश के लिए मेरे पति ने इतनी तपस्या की है, मेरे पुत्र में कैसे प्रस्फुटित हो गया?"

प्रह्लाद का बालपन और विष्णु भक्ति

प्रह्लाद जैसे-जैसे बड़ा हुआ, उसकी विष्णु भक्ति और भी प्रबल होती गई। वह अन्य बालकों के साथ खेलने की बजाय, भगवान विष्णु के ध्यान में खोया रहता। पाठशाला में भी उसका मन विद्याध्ययन में नहीं लगता था, वह अपने गुरु शुक्राचार्य के पुत्रों शंद और अमर्क को भी विष्णु भक्ति के उपदेश देता रहता। बच्चे उसे पागल समझते, पर प्रह्लाद को इसकी कोई चिंता नहीं थी। उसे तो बस विष्णु नाम का जाप करना, विष्णु की लीलाओं का स्मरण करना, और विष्णु के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर देना ही अच्छा लगता था। उसकी आँखें हमेशा नम रहतीं, मानो प्रेम के सागर से आंसू बह रहे हों।

हर क्षण, हर सांस में प्रह्लाद को विष्णु का ही ध्यान रहता। उसका रोम-रोम "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करता। उसे लगता जैसे स्वयं विष्णु उसके हृदय में विराजमान हैं और उसे निर्देशित कर रहे हैं। उसकी भक्ति में एक अद्भुत शक्ति थी, जिसने पाठशाला के अन्य बालकों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया था।

हिरण्यकशिपु का क्रोध

जब हिरण्यकशिपु को यह पता चला कि उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु की भक्ति में लीन रहता है, तो वह क्रोध से भर उठा। उसने प्रह्लाद को बुलाकर धमकाया, "मूर्ख बालक! तू किसका नाम जप रहा है? क्या तुझे पता नहीं कि विष्णु ही मेरे शत्रु हैं? तू मेरे पुत्र होकर मेरे शत्रु की पूजा करता है? मैं तुझे आज्ञा देता हूँ कि तू अभी से विष्णु का नाम लेना छोड़ दे, वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।"

प्रह्लाद ने डरते-डरते, पर दृढ़ता से उत्तर दिया, "पिताजी, विष्णु तो सबके स्वामी हैं, वे ही ब्रह्मांड के रक्षक हैं। उनमें शत्रुता का भाव नहीं है। मैं उन्हें कैसे त्याग सकता हूँ? वे तो मेरे हृदय में बसे हुए हैं।" हिरण्यकशिपु का क्रोध और भी बढ़ गया। उसने कहा, "मुझे दिखाओ तुम्हारा विष्णु कहाँ है! क्या वह इस खंभे में है?" उसने एक खम्भे की ओर इशारा किया। प्रह्लाद ने शांत भाव से कहा, "हाँ पिताजी, वे हर जगह हैं।" यहीं से हिरण्यकशिपु के क्रोध और प्रह्लाद की परीक्षा की एक नई कहानी शुरू होती है, जो आने वाले अध्याय में सामने आएगी।

अध्याय 2 का सार: इस अध्याय में हमने प्रह्लाद की बाल्यकाल से ही विष्णु भक्ति के बारे में जाना। माता के गर्भ से ही उसे विष्णु नाम का ज्ञान हुआ और वह सदा भगवान की भक्ति में लीन रहता था। हिरण्यकशिपु के क्रोध और धमकाने के बावजूद प्रह्लाद ने विष्णु का दामन नहीं छोड़ा, जो यह दिखाता है कि सच्ची भक्ति किसी भी भय से बड़ी होती है।

🕉

आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026193
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026159
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 3 — परीक्षा और कष्टों का सामना। इस अध्याय में, भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त करने से पहले कई बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।

08 Jun 2026163
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 2 — भक्त की विनती और भक्ति। इस अध्याय में, एक भक्त की सच्ची भक्ति और भगवान भैरव से उसकी पुकार का वर्णन किया गया है।

08 Jun 2026148
ॐ जय जगदीश हरे
आरती

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026250