12 Jyotirlingas

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: Somnath Temple History & Guide

Tilak Kathayein01 Apr 20267,138 views
somnath-jyotirlinga-guide
सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित भगवान शिव के **12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम** और सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। यह मंदिर अपने प्राचीन इतिहास, अनेक बार हुए पुनर्निर्माण, अद्भुत वास्तुकला और गहन धार्मिक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस लेख में जानें सोमनाथ मंदिर का इतिहास, पौराणिक कथा, ज्योतिर्लिंग का महत्व, दर्शन समय, आरती, यात्रा मार्ग, प्रमुख उत्सव और इससे जुड़े रोचक तथ्य।

📋 विषय सूची

  1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: परिचय, आध्यात्मिक महत्ता एवं महत्वपूर्ण तथ्य
  2. पौराणिक कथा, चंद्रदेव का क्षय रोग निवारण एवं प्रभास क्षेत्र का रहस्य
  3. सोमनाथ मंदिर का इतिहास, आक्रमण और सरदार वल्लभभाई पटेल का संकल्प
  4. चालुक्य / नागर स्थापत्य कला, गर्भगृह एवं बाणस्तंभ (Arrow Pillar) का रहस्य
  5. पवित्र त्रिवेणी संगम, भालका तीर्थ और प्रभास पाटन के पावन स्थल
  6. सोमनाथ परिसर एवं आसपास स्थित अन्य प्रमुख मंदिर व दर्शनीय स्थल
  7. दर्शन समय, दैनिक आरती सारणी और विशेष अभिषेक व्यवस्था
  8. ‘जय सोमनाथ’ साउंड एंड लाइट शो और भव्य संध्या दर्शन
  9. आगंतुक नियम: प्रवेश पात्रता, ड्रेस कोड और सुरक्षा व फोटोग्राफी नियम
  10. सोमनाथ यात्रा गाइड: कैसे पहुँचें और यात्रा का सर्वश्रेष्ठ समय
  11. 1-दिन का सोमनाथ एवं प्रभास तीर्थ यात्रा कार्यक्रम (Detailed Itinerary)
  12. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े 20 रोचक एवं ऐतिहासिक तथ्य
  13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
  14. निष्कर्ष एवं भारत के अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का परिचय एवं महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में अरब सागर के सुरम्य तट पर प्रभास पाटन (गीर सोमनाथ जिला) में स्थित श्री सोमनाथ मंदिर सनातन धर्म के सर्वाधिक प्रतिष्ठित तीर्थों में से एक है। यह भगवान शिव के द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। 'सोम' का अर्थ है 'चंद्रमा' और 'नाथ' का अर्थ है 'स्वामी'—अर्थात् "चंद्रमा के स्वामी भगवान शिव"

सोमनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, अटूट आस्था और पुनरुत्थान का अमर प्रतीक है। अनगिनत विदेशी आक्रमणों और विध्वंसों के बाद भी यह पावन तीर्थ हर बार अपनी राख से पुनः उठ खड़ा हुआ। यही कारण है कि इसे इतिहास में 'अमर तीर्थ' या 'शाश्वत ज्योतिर्लिंग' कहा जाता है।

आध्यात्मिक महत्ता: ऋग्वेद, स्कंद पुराण और शिव पुराण में प्रभास क्षेत्र की महिमा गाई गई है। मान्यता है कि यहाँ समुद्र स्नान के उपरांत प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन व अभिषेक करने से साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे आरोग्य, मानसिक शांति व अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सोमनाथ मंदिर: एक नजर में (Quick Facts)

विवरण जानकारी
मंदिर का नाम श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Shree Somnath Jyotirlinga)
क्रम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम (1st Jyotirlinga)
मुख्य आराध्य देव भगवान शिव (सोमनाथ महादेव)
स्थान एवं जिला प्रभास पाटन, वेरावल, गीर सोमनाथ जिला, गुजरात, भारत
तट / पवित्र नदियां अरब सागर तट एवं त्रिवेणी संगम (हिरण, कपिला, सरस्वती)
स्थापत्य शैली कैलाश महामेरु प्रासाद / चालुक्य (सोलंकी) नागर शैली
वर्तमान मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा 11 मई 1951 (डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा)
कपाट खुलने का समय प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
दैनिक मुख्य आरतियाँ प्रातः 7:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे, सायं 7:00 बजे
प्रबंधन निकाय श्री सोमनाथ ट्रस्ट (Shree Somnath Trust)
सामान्य प्रवेश शुल्क सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः निःशुल्क (Free Entry)

नोट: महाशिवरात्रि, सावन मास और कार्तिक पूर्णिमा जैसे महापर्वों पर मंदिर के दर्शन समय में वृद्धि की जाती है। यात्रा से पूर्व श्री सोमनाथ ट्रस्ट की आधिकारिक पोर्टल (somnath.org) से अद्यतन जानकारी देखना उपयुक्त रहता है।


पौराणिक कथा, चंद्रदेव का क्षय रोग निवारण एवं प्रभास क्षेत्र का रहस्य

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना का संबंध चंद्रदेव (सोम) और उनके द्वारा किए गए घोर तप से है।

1. राजा दक्ष का शाप और चंद्रदेव का क्षय रोग

प्रजापति दक्ष ने अपनी 27 कन्याओं (27 नक्षत्रों) का विवाह चंद्रदेव के साथ किया था। उन सभी में चंद्रदेव सबसे अधिक प्रेम और अनुराग रोहिणी से करते थे। अन्य कन्याओं ने इसकी शिकायत अपने पिता दक्ष से की। दक्ष ने चंद्रमा को बारंबार समझाया, परंतु जब चंद्रमा का पक्षपात जारी रहा, तो दक्ष ने क्रोधित होकर उन्हें "क्षण-प्रतिक्षण क्षय ग्रस्त (तेजहीन) होने" का शाप दे दिया।

2. प्रभास तीर्थ में महामृत्युंजय तपस्या

शाप के प्रभाव से चंद्रदेव का तेज और प्रकाश लुप्त होने लगा, जिससे वनस्पतियों और चराचर जगत में त्राहि-त्राहि मच गई। ब्रह्मा जी के निर्देश पर चंद्रदेव सौराष्ट्र के पावन प्रभास क्षेत्र में आए। यहाँ उन्होंने पवित्र सरस्वती नदी के तट पर शिवलिंग बनाकर छह माह तक निष्काम भाव से भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का कठोर अनुष्ठान किया।

3. महादेव का वरदान और प्रथम ज्योतिर्लिंग प्राकट्य

चंद्रमा की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव प्रकट हुए। शिवजी ने दक्ष के शाप की मर्यादा रखते हुए चंद्रमा को वरदान दिया: "कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक-एक कला क्षीण होगी, परंतु शुक्ल पक्ष में पुनः प्रतिदिन एक-एक कला बढ़ते हुए पूर्णिमा को तुम पूर्ण चंद्र के रूप में चमकोगे।"

रोगमुक्त होकर चंद्रदेव ने महादेव से सदा के लिए उसी स्थान पर ज्योति रूप में वास करने की प्रार्थना की। महादेव ने उनकी विनती स्वीकार की और 'सोमनाथ' (सोम के नाथ) नाम से प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हुए। चंद्रदेव ने सर्वप्रथम यहाँ सोने का भव्य मंदिर बनवाया था।


सोमनाथ मंदिर का इतिहास, आक्रमण और सरदार वल्लभभाई पटेल का संकल्प

सोमनाथ मंदिर का इतिहास आस्था, प्रतिरोध और राष्ट्रीय स्वाभिमान की एक अद्भुत गाथा है। इतिहास की विभिन्न शताब्दियों में इस मंदिर को कई बार तोड़ा और लूटा गया, लेकिन हर विध्वंस के बाद यह और अधिक भव्य रूप में पुनः निर्मित हुआ।

1. विभिन्न युगों में मंदिर का निर्माण

पौराणिक परंपरा के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण चार युगों में चार अलग-अलग धातुओं/पदार्थों से हुआ माना जाता है:

  • सत्ययुग: चंद्रदेव द्वारा स्वर्ण (सोने) से निर्मित।
  • त्रेतायुग: रावण द्वारा रजत (चांदी) से निर्मित।
  • द्वापरयुग: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा चंदन की काष्ठ से निर्मित।
  • कलियुग: राजा भीमदेव सोलंकी एवं वल्लभी के मैत्रक राजाओं द्वारा पाषाण (पत्थर) से निर्मित।

2. विदेशी आक्रमण और विध्वंस का दौर

11वीं शताब्दी से लेकर 18वीं शताब्दी तक सोमनाथ मंदिर को बार-बार आक्रांताओं के हमलों का सामना करना पड़ा:

  • महमूद गजनवी (1026 ईस्वी): गजनवी ने मंदिर की अपार संपदा को लूटा और मुख्य ज्योतिर्लिंग व मंदिर को खंडित किया। स्थानीय वीरों (हम्मीरजी गोहिल आदि) ने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
  • सोलंकी और चालुक्य राजाओं द्वारा पुनर्निर्माण: मालवा के राजा भोज और पाटन के राजा कुमारपाल व भीमदेव ने मंदिर का बार-बार भव्य जीर्णोद्धार कराया।
  • सल्तनत व मुगल काल: 1299 में अलाउद्दीन खिलजी की सेना और 1706 में औरंगजेब ने पुनः मंदिर को गिराने का आदेश दिया।
  • माता अहिल्याबाई होल्कर (1783 ईस्वी): इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने खंडित स्थल के समीप एक गुप्त भूमिगत मंदिर का निर्माण कराकर पूजा परंपरा को निरंतर रखा।

3. आधुनिक भारत का पुनरुत्थान (सरदार पटेल का संकल्प)

भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद 13 नवंबर 1947 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने जूनागढ़ आगमन पर सोमनाथ के खंडहरों का दौरा किया और उसी स्थान पर समुद्र का जल हाथ में लेकर मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक संकल्प लिया।

के. एम. मुंशी के सहयोग और जन-सहयोग से निर्मित वर्तमान भव्य मंदिर में 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस अवसर पर कहा था: "सोमनाथ का यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि निर्माण की शक्ति विनाश की शक्ति से कहीं अधिक प्रबल होती है।"


चालुक्य / नागर स्थापत्य कला, गर्भगृह एवं बाणस्तंभ (Arrow Pillar) का रहस्य

वर्तमान सोमनाथ मंदिर पश्चिमी भारत की पारंपरिक कैलाश महामेरु प्रासाद शैली (चालुक्य/सोलंकी नागर शैली) में निर्मित एक अप्रतिम पाषाण चमत्कार है। इस मंदिर का निर्माण प्रभास पाटन के प्रसिद्ध 'सोमपुरा मूर्तिकारों' द्वारा किया गया है।

1. मंदिर की संरचनात्मक भव्यता

  • शिखर एवं ध्वजदंड: मुख्य मंदिर का पाषाण शिखर 155 फीट (लगभग 50 मीटर) ऊंचा है। शिखर के शीर्ष पर स्थित कलश का भार 10 टन है और इस पर 27 फीट ऊंचा ध्वजदंड स्थापित है।
  • नृत्य मंडप एवं सभा मंडप: गर्भगृह के आगे एक विशाल सभा मंडप और नक्काशीदार नृत्य मंडप बना है, जिसके स्तंभों पर देवताओं, गंधर्वों और अप्सराओं की सुंदर पाषाण प्रतिमाएं उकेरी गई हैं।
  • समुद्र दर्शन प्राचीर: मंदिर समुद्र तल से कुछ ऊंचाई पर स्थित है, जहाँ से अरब सागर की उठती लहरें मंदिर की प्राचीर से टकराती हुई प्रतीत होती हैं।

2. रहस्यमयी बाणस्तंभ (The Sea-Route Arrow Pillar)

मंदिर परिसर के दक्षिणी समुद्र तट की ओर एक प्राचीन बाणस्तंभ (Baan Stambh) स्थापित है, जो प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्र और भूगोल ज्ञान का एक विस्मयकारी प्रमाण है।

  • अबाधित ज्योतिर्मार्ग: इस स्तंभ पर एक तीर (बाण) का निशान बना है जो समुद्र की ओर इंगित करता है। इस पर संस्कृत में उत्कीर्ण है: "आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग"
  • भौगोलिक सत्य: इसका अर्थ है कि सोमनाथ मंदिर के इस बिंदु से लेकर दक्षिणी ध्रुव (Antarctica / South Pole) तक के पूरे समुद्री मार्ग में एक सीधी रेखा में कोई भी भूभाग या द्वीप नहीं आता है। प्राचीन काल में बिना उपग्रह तकनीक के इस सटीक भौगोलिक ज्ञान का होना आज भी आधुनिक वैज्ञानिकों को चकित करता है।

पवित्र त्रिवेणी संगम, भालका तीर्थ और प्रभास पाटन के पावन स्थल

सोमनाथ केवल शिव भक्ति का ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के इस धरा से गोलोक प्रस्थान (स्वर्गारोहण) की पावन लीला भूमि भी है।

1. पावन त्रिवेणी संगम

सोमनाथ मंदिर से मात्र 1.5 किमी की दूरी पर तीन पवित्र नदियों—हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है, जो आगे चलकर अरब सागर में विलीन होती हैं। मान्यता है कि इस त्रिवेणी संगम में स्नान और पितृ तर्पण (श्राद्ध) करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।

2. भालका तीर्थ (Bhalka Tirth)

सोमनाथ से लगभग 4 किमी दूर स्थित भालका तीर्थ वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ एक पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम करते समय जरा नामक बहेलिए का बाण भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमल में लगा था। यहाँ एक अत्यंत सुंदर मंदिर में श्रीकृष्ण की विश्राम मुद्रा वाली चतुर्भुज प्रतिमा स्थापित है।

3. देहोत्सर्ग तीर्थ एवं गोलक धाम

हिरण नदी के तट पर स्थित वह पावन स्थल जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण ने अपने नश्वर पार्थिव स्वरूप को त्यागकर निजधाम (गोलोक) प्रस्थान किया था। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिह्न अंकित हैं।


सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास घूमने की जगह (Nearby Places to Visit)

1️⃣ भालका तीर्थ (Bhalka Tirth) – 4 किमी

  • धार्मिक महत्व: वह पावन ऐतिहासिक स्थल जहाँ भगवान श्रीकृष्ण एक पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यानमग्न मुद्रा में विश्राम कर रहे थे, तभी जरा नामक बहेलिए का बाण उनके चरण कमल में लगा था।
  • विशेष आकर्षण: मंदिर के भीतर भगवान श्रीकृष्ण की अत्यंत मनोहारी और दुर्लभ शयन (विश्राम) मुद्रा वाली चतुर्भुज प्रतिमा स्थापित है।

2️⃣ त्रिवेणी संगम एवं स्नान घाट (Triveni Sangam) – 1.5 किमी

  • धार्मिक महत्व: तीन पवित्र नदियों—हिरण, कपिला और सरस्वती का पावन महासंगम, जो आगे बढ़कर अरब सागर में विलीन होती हैं।
  • प्रमुख परंपरा: यहाँ पवित्र स्नान, सूर्य अर्घ्य और पितरों के निमित्त पिंडदान व श्राद्ध तर्पण करना अत्यंत मोक्षदायी माना जाता है।

3️⃣ देहोत्सर्ग तीर्थ एवं गोलक धाम (Dehotsarg Tirth) – 1.8 किमी

  • धार्मिक महत्व: हिरण नदी के किनारे स्थित वह परम पावन स्थल जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पार्थिव देह का त्याग कर अपने निजधाम (गोलोक) प्रस्थान किया था।
  • विशेष आकर्षण: यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमल के पावन पदचिह्न अंकित हैं तथा पास ही बलराम जी की गुफा (दाऊजी की गुफा) स्थित है।

4️⃣ माता अहिल्याबाई होल्कर सोमनाथ मंदिर (पुराना मंदिर) – 200 मीटर

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुख्य मंदिर के ठीक सामने स्थित यह वही ऐतिहासिक मंदिर है, जिसे इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1783 ईस्वी में आक्रांताओं से शिवलिंग की रक्षा हेतु गुप्त रूप से बनवाया था।
  • विशेष बनावट: इसका मुख्य गर्भगृह भूमिगत (पाताल स्तर) है, जहाँ आज भी पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना होती है।

5️⃣ गीता मंदिर एवं लक्ष्मीनारायण मंदिर – 1.5 किमी

  • वास्तुकला: त्रिवेणी संगम के समीप स्थित श्वेत संगमरमर का एक अत्यंत सुंदर और भव्य नक्काशीदार मंदिर।
  • विशेषता: मंदिर के भव्य पाषाण स्तंभों और संगमरमरी दीवारों पर संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोक बहुत सुंदरता से उकेरे गए हैं।

6️⃣ श्री परशुराम मंदिर – 1.5 किमी

  • पौराणिक कथा: त्रिवेणी संगम तट पर स्थित वह स्थल जहाँ भगवान परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों के संहार के उपरांत अपने फरसे (परशु) के पाप से मुक्ति हेतु भगवान शिव की घोर तपस्या की थी।
  • यहाँ दो प्राचीन पावन जलकुंड और भगवान परशुराम का ऐतिहासिक विग्रह स्थापित है।

7️⃣ सोमनाथ समुद्र तट एवं प्रोमेनेड (Somnath Beach & Promenade) – 300 मीटर

  • प्राकृतिक सौंदर्य: मंदिर के चारों ओर फैला अरब सागर का सुरम्य किनारा और आधुनिक सागर दर्शन वॉकवे (Promenade)।
  • सूर्यास्त के समय समुद्र की उठती लहरों और मंदिर के स्वर्णिम शिखर का दृश्य फोटोग्राफी व शांतिपूर्ण भ्रमण के लिए आदर्श है (सुरक्षा कारणों से यहाँ समुद्र में स्नान वर्जित है)।

8️⃣ सासन गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) – 50 किमी

  • वन्यजीव आकर्षण: एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का विश्व में एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थल।
  • सोमनाथ आने वाले अधिकांश पर्यटक गिर सफारी के लिए मात्र 1.5 घंटे की यात्रा करके सासन गिर अवश्य जाते हैं।

दर्शन समय, दैनिक आरती सारणी और विशेष अभिषेक व्यवस्था

श्री सोमनाथ मंदिर में वर्ष के 365 दिन अत्यंत व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से दर्शन और पूजा का संचालन किया जाता है।

दैनिक दर्शन एवं आरती समय सारणी

कार्यक्रम / सेवा समय सारणी विवरण
मंदिर कपाट खुलना प्रातः 6:00 बजे सामान्य दर्शन प्रारंभ
प्रातःकालीन प्रभात आरती प्रातः 7:00 बजे शंखनाद, नगाड़ों और वैदिक मंत्रों के साथ प्रथम आरती
मध्याह्न राजभोग आरती दोपहर 12:00 बजे दोपहर की विशेष भोग आरती
सायंकालीन संध्या आरती सायं 7:00 बजे दीपों से सजी अत्यंत भव्य और मनोहारी महाआरती
मंदिर कपाट बंद होना रात्रि 10:00 बजे शयन के उपरांत कपाट बंद

विशेष पूजा एवं ऑनलाइन संकल्प सेवाएं

श्रद्धालु श्री सोमनाथ ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न विशेष पूजा अनुष्ठान बुक करा सकते हैं:

  • ध्वजारोहण पूजा: मंदिर के 155 फीट ऊंचे शिखर पर नया ध्वज फहराने का विशेष अनुष्ठान।
  • रुद्राभिषेक एवं लघुरुद्र: वेदोक्त मंत्रों द्वारा शिवलिंग पर पंचामृत और गंगाजल से महाभिषेक।
  • सोमेश्वर महापूजा एवं कालसर्प दोष पूजा: वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संपन्न किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान।
  • (नोट: इन पूजाओं की बुकिंग मंदिर परिसर के पूजा काउंटर अथवा ट्रस्ट की वेबसाइट somnath.org से की जा सकती है।)

‘जय सोमनाथ’ साउंड एंड लाइट शो और भव्य संध्या दर्शन

शाम की 7:00 बजे की महाआरती के उपरांत मंदिर के प्रांगण में अरब सागर की पृष्ठभूमि में 'जय सोमनाथ' (Sound and Light Show) का भव्य आयोजन किया जाता है।

  • समय: प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से 9:00 बजे तक (मानसून/बारिश के दिनों को छोड़कर)।
  • विशेषता: विश्व प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन की ओजस्वी आवाज में मंदिर के गौरवशाली इतिहास, गजनवी के आक्रमण, वीरों के बलिदान और सरदार पटेल द्वारा इसके पुनरुत्थान की संपूर्ण गाथा को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर लाइट के माध्यम से दिखाया जाता है।
  • टिकट शुल्क: लगभग ₹30 से ₹50 (नाममात्र शुल्क)।

आगंतुक नियम: प्रवेश पात्रता, ड्रेस कोड और सुरक्षा व फोटोग्राफी नियम

सोमनाथ मंदिर की राष्ट्रीय सुरक्षा संवेदनशीलता और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए कड़े नियम लागू हैं:

  • प्रवेश पात्रता: सनातन धर्म के सभी श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खुला है। अन्य मतावलंबियों के लिए ट्रस्ट के नियमों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
  • ड्रेस कोड (Dress Code): मंदिर में शालीन और पारंपरिक वस्त्र पहनना अनिवार्य है। पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता या पैंट-शर्ट और महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार-सूट अथवा शालीन परिधान मान्य हैं। अत्यधिक छोटे वस्त्र, बरमूडा, शॉर्ट्स या कटी-फटी जींस पहनकर प्रवेश वर्जित है।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध: सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच, पेन ड्राइव, लैपटॉप और चमड़े की वस्तुएं (बेल्ट/वॉलेट) ले जाना सख्त मना है। मंदिर के बाहर ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क क्लॉक रूम (Locker Facility) उपलब्ध है।
  • फोटोग्राफी: संपूर्ण मंदिर परिसर के अंदर किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पूर्णतः निषिद्ध है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे पहुंचें? (How to Reach Somnath Temple)

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रभास पाटन (वेरावल) में स्थित है। यह सड़क, रेल और हवाई मार्ग द्वारा गुजरात व देश के प्रमुख शहरों से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

1️⃣ हवाई मार्ग (By Air) – निकटतम हवाई अड्डे

सोमनाथ के लिए दो प्रमुख निकटतम हवाई अड्डे उपलब्ध हैं:

  • दीव एयरपोर्ट (Diu Airport): मंदिर से लगभग 85 किलोमीटर दूर (घरेलू उड़ानों के लिए निकटतम)।
  • राजकोट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Hirasar/Rajkot Airport): मंदिर से लगभग 200 किलोमीटर दूर (देश के बड़े शहरों से व्यापक कनेक्टिविटी)।
  • पोरबंदर एयरपोर्ट: लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित है।

✈️ एयरपोर्ट से मंदिर कैसे पहुंचें?

  • दीव एयरपोर्ट से सोमनाथ पहुँचने में टैक्सी द्वारा लगभग 2 से 2.5 घंटे लगते हैं।
  • राजकोट एयरपोर्ट से सोमनाथ पहुँचने में 4-लेन हाईवे से लगभग 4 से 4.5 घंटे लगते हैं।
  • टैक्सी/कैब किराया: दीव से लगभग ₹2,000–₹3,500 तथा राजकोट से ₹3,500–₹5,500 तक (वाहन के प्रकार अनुसार)।
  • दोनों एयरपोर्ट से वेरावल/सोमनाथ के लिए नियमित राज्य परिवहन (GSRTC) की बसें भी चलती हैं।

2️⃣ रेल मार्ग (By Train) – निकटतम रेलवे स्टेशन

सोमनाथ मंदिर पहुँचने के लिए दो प्रमुख रेलवे स्टेशन सेवा प्रदान करते हैं:

🚆 मुख्य रेलवे स्टेशन और दूरी

  1. सोमनाथ रेलवे स्टेशन (SMNH): मंदिर से मात्र 1.5 से 2 किलोमीटर दूर स्थित है।
  2. वेरावल जंक्शन (VRL): मुख्य और बड़ा रेलवे स्टेशन, जो मंदिर से लगभग 5 से 7 किलोमीटर दूर है।

🚖 रेलवे स्टेशन से मंदिर कैसे पहुंचें?

  • सोमनाथ या वेरावल स्टेशन से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सी 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं।
  • ऑटो/टैक्सी किराया: ₹50 से ₹250 तक (शेयरिंग या प्राइवेट वाहन अनुसार)।
  • वेरावल स्टेशन से मंदिर पहुँचने में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है।

🚉 प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेन सुविधा

  • अहमदाबाद से: सोमनाथ एक्सप्रेस, वेरावल एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी सीधी दैनिक ट्रेनें।
  • राजकोट से: नियमित पैसेंजर और इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेनें उपलब्ध।
  • मुंबई से: सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस, बांद्रा-वेरावल एक्सप्रेस।
  • दिल्ली, जबलपुर व पुणे से: सीधी लंबी दूरी की साप्ताहिक व नियमित ट्रेनें वेरावल तक आती हैं।

3️⃣ सड़क मार्ग (By Road) – प्रमुख मार्ग, दूरी और बस सेवा

🚌 निकटतम बस स्टैंड

सोमनाथ बस स्टैंड (प्रभास पाटन) मंदिर से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

🚗 प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग दूरी एवं समय

  1. वेरावल से: 6 किमी (लगभग 15 मिनट)
  2. जूनागढ़ से: 85 किमी (लगभग 1.5 से 2 घंटे)
  3. सासन गिर (Gir National Park) से: 50 किमी (लगभग 1.5 घंटे)
  4. पोरबंदर से: 130 किमी (लगभग 2.5 घंटे)
  5. राजकोट से: 200 किमी (लगभग 4 घंटे)
  6. द्वारका से: 235 किमी (तटीय हाईवे द्वारा लगभग 4.5 से 5 घंटे)
  7. अहमदाबाद से: 410 किमी (लगभग 7 से 8 घंटे)

🚌 बस सेवा एवं किराया

  • गुजरात राज्य परिवहन (GSRTC) की एक्सप्रेस, गुर्जरनगरी और वोल्वो बसें अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और सूरत से वेरावल/सोमनाथ के लिए निरंतर चलती हैं।
  • द्वारका से सोमनाथ के लिए दोनों ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने वाली विशेष टूरिस्ट व स्लीपर बसें उपलब्ध हैं।
  • बस किराया: ₹100 से ₹800 तक (लोकल एसटी बस से लग्जरी एसी वोल्वो तक)।

🚖 लोकल टैक्सी एवं ऑटो सुविधा

  • वेरावल और सोमनाथ में लोकल साइटसीइंग (भालका तीर्थ, त्रिवेणी संगम आदि) के लिए ऑटो व कैब आसानी से मिल जाते हैं।
  • लोकल पैकेज किराया: ₹400 से ₹1,500 (हाफ-डे लोकल दर्शन के लिए)।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)

सोमनाथ मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है, इसलिए यहाँ वर्षभर समुद्री हवाएं चलती हैं। यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च (सर्दियों का मौसम) सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान मौसम सुखद, शीतल और 15°C से 28°C के बीच रहता है, जिससे मंदिर दर्शन और समुद्र तट पर भ्रमण बहुत आरामदायक होता है।

सावन मास (श्रावण) और महाशिवरात्रि के समय यहाँ की आध्यात्मिक छटा और विशेष महापूजा अत्यंत भव्य होती है, हालांकि इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है।


1-दिन का सोमनाथ एवं प्रभास तीर्थ यात्रा कार्यक्रम (Detailed Itinerary)

  1. प्रातः 6:30 – 8:30 बजे (मंगला दर्शन): सुबह जल्दी सोमनाथ मंदिर पहुँचें, क्लॉक रूम में सामान जमा करें और प्रातः 7:00 बजे की भव्य मंगला प्रभात आरती के दर्शन करें।
  2. सुबह 9:00 – 11:30 बजे (त्रिवेणी संगम एवं भालका तीर्थ): त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान/आचमन करें, परशुराम मंदिर देखें और फिर भालका तीर्थ जाकर भगवान श्रीकृष्ण की विश्राम मुद्रा के दर्शन करें।
  3. दोपहर 12:00 – 1:30 बजे (राजभोग आरती एवं भोजन प्रसाद): सोमनाथ मंदिर लौटकर राजभोग आरती में भाग लें। तत्पश्चात श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा संचालित भोजनालय में अत्यंत किफायती व स्वादिष्ट शुद्ध शाकाहारी भोजन प्रसाद ग्रहण करें।
  4. दोपहर 2:30 – 4:30 बजे (प्रभास पाटन संग्रहालय व अहिल्याबाई मंदिर): प्राचीन सोमनाथ संग्रहालय (Museum) और माता अहिल्याबाई मंदिर का भ्रमण करें।
  5. शाम 5:30 – 7:30 बजे (समुद्र दर्शन एवं संध्या महाआरती): सोमनाथ सागर दर्शन वॉकवे पर टहलें, सूर्यास्त देखें और सायं 7:00 बजे की दिव्य संध्या आरती में सम्मिलित हों।
  6. रात्रि 8:00 – 9:00 बजे (साउंड एंड लाइट शो): 'जय सोमनाथ' लाइट एंड साउंड शो का आनंद लें और रात्रि विश्राम हेतु होटल लौटें।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े 20 रोचक एवं ऐतिहासिक तथ्य

  1. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम: शिव पुराण के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सर्वप्रथम सोमनाथ का ही नाम आता है ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च...")।
  2. चंद्रमा द्वारा प्रतिष्ठा: मान्यता है कि स्वयं चंद्रदेव ने अपने क्षय रोग से मुक्ति पाकर यहाँ प्रथम शिवलिंग की स्थापना की थी।
  3. बाणस्तंभ का रहस्य: मंदिर के दक्षिण में स्थित बाणस्तंभ से अंटार्कटिका (साउथ पोल) तक समुद्र के बीच कोई भी भूखंड नहीं है।
  4. महमूद गजनवी का 17 बार आक्रमण: गजनवी ने इस मंदिर को लूटने और तोड़ने के लिए बारंबार हमले किए, किंतु आस्था को नष्ट नहीं कर सका।
  5. हम्मीरजी गोहिल का शौर्य: 16 वर्ष के वीर राजकुमार हम्मीरजी गोहिल ने गजनवी की विशाल सेना के सामने मंदिर की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी।
  6. चार युगों में चार निर्माण: सत्ययुग में सोने का, त्रेता में चांदी का, द्वापर में चंदन का और कलियुग में पत्थर का मंदिर बना।
  7. सरदार पटेल का ऐतिहासिक संकल्प: 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस खंडहर हो चुके मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया।
  8. बिना सरकारी धन के निर्माण: महात्मा गांधी के सुझाव पर इस विशाल मंदिर का निर्माण सरकारी धन के बजाय पूर्णतः जनता के दान से हुआ।
  9. समुद्र की सीधी लहरें: मंदिर की नींव इस प्रकार रखी गई है कि अरब सागर का जल निरंतर मंदिर की दीवारों को स्पर्श करता है।
  10. श्रीकृष्ण का गोलोक गमन: सोमनाथ के समीप स्थित भालका तीर्थ में ही भगवान श्रीकृष्ण को बहेलिए का बाण लगा था।
  11. त्रिवेणी का पावन संगम: हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों का दुर्लभ संगम इसी पावन तीर्थ क्षेत्र में होता है।
  12. 155 फीट ऊंचा महामेरु शिखर: वर्तमान मंदिर नागर शैली के महामेरु प्रासाद स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  13. 10 टन वजनी कलश: मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित पाषाण कलश का भार लगभग दस हजार किलोग्राम (10 टन) है।
  14. अहिल्याबाई का गुप्त मंदिर: मुगलों से शिवलिंग की रक्षा के लिए महारानी अहिल्याबाई ने 1783 में भूमिगत शिवलिंग की स्थापना कराई थी।
  15. अमिताभ बच्चन की आवाज में शो: मंदिर का 'जय सोमनाथ' साउंड एंड लाइट शो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की ओजस्वी आवाज में है।
  16. समुद्र स्नान का मोक्ष फल: स्कंद पुराण के प्रभास खंड में यहाँ समुद्र स्नान को सौ अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यकारी बताया गया है।
  17. अखंड ज्योति और समुद्र हवाएं: मंदिर की गर्भगृह की संरचना ऐसी है कि कड़े समुद्री तूफानों में भी मंदिर सुरक्षित रहता है।
  18. सोमपुरा शिल्पकारों की कला: इस मंदिर के अद्भुत पाषाण तराशने का कार्य गुजरात के पारंपरिक सोमपुरा कारीगरों ने किया।
  19. सोमनाथ-द्वारका सर्किट: गुजरात का यह तीर्थ भारत के प्रमुख 'हरि-हर' (शिव-विष्णु) तीर्थ सर्किट का मुख्य केंद्र है।
  20. पुनरुत्थान का शाश्वत प्रतीक: विश्व इतिहास में किसी भी धार्मिक स्थल को 17 से अधिक बार तोड़े जाने के बाद उतनी ही भव्यता से दोबारा खड़ा नहीं देखा गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सोमनाथ मंदिर के दर्शन और आरती का सबसे सही समय क्या है?

मंदिर प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है। प्रातः 7:00 बजे की प्रभात आरती और सायं 7:00 बजे की संध्या महाआरती का समय दर्शन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

2. क्या सोमनाथ मंदिर में मोबाइल फोन और कैमरा ले जाने की अनुमति है?

नहीं, सुरक्षा कारणों से मंदिर के मुख्य परिसर में मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच और चमड़े की वस्तुएं ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। प्रवेश द्वार पर ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क लॉकर सुविधा उपलब्ध है।

3. क्या सोमनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क (Entry Fee) लगता है?

नहीं, सोमनाथ मंदिर में सामान्य दर्शन के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है, यह पूर्णतः निःशुल्क है। विशेष पूजा, अभिषेक और साउंड एंड लाइट शो के लिए निर्धारित शुल्क लागू होता है।

4. सोमनाथ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट कौन सा है?

निकटतम रेलवे स्टेशन वेरावल जंक्शन (5 किमी) है। निकटतम घरेलू हवाई अड्डा दीव एयरपोर्ट (85 किमी) और प्रमुख हवाई अड्डा राजकोट (200 किमी) है।

5. सोमनाथ के पास स्थित 'भालका तीर्थ' का क्या महत्व है?

भालका तीर्थ वह पवित्र स्थल है जहाँ द्वापर युग के अंत में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यानमग्न भगवान श्रीकृष्ण को जरा नामक शिकारी का तीर लगा था, जिसके उपरांत उन्होंने गोलोक प्रस्थान किया।

6. क्या सोमनाथ में ठहरने के लिए ट्रस्ट के गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं?

हाँ, श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा 'सागर दर्शन', 'महेश्वरी अतिथि भवन' और 'लीलावती अतिथि भवन' जैसे अत्यंत सुसज्जित, स्वच्छ और किफायती गेस्ट हाउस संचालित किए जाते हैं, जिनकी ऑनलाइन बुकिंग somnath.org से की जा सकती है।


निष्कर्ष एवं भारत के अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंग

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग केवल पत्थरों और नक्काशी से बना देवालय नहीं, बल्कि भारत की अमर आत्मा, सनातन संस्कृति और अजेय आस्था का चैतन्य शिखर है। अरब सागर की गर्जना करती लहरें जब सोमनाथ के पाषाण चरणों को पखारती हैं और मंदिर से "हर हर महादेव" का सामूहिक जयघोष गूंजता है, तो प्रत्येक श्रद्धालु एक अलौकिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव करता है।

यदि आप अपने जीवन में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पावन तीर्थयात्रा का शुभारंभ करना चाहते हैं, तो प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव के दर्शन आपके जीवन को धन्य और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना देंगे।

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अन्य प्रमुख पावन धामों के बारे में पढ़ें:

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
भगवान सोमनाथ महादेव आप सभी के जीवन से अंधकार, रोग और कष्टों का निवारण कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।

ॐ नमः शिवाय। जय सोमनाथ! हर हर महादेव! 🙏🔱🚩🌊

🕉

आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

vaidyanath-jyotirlinga-guide
12 Jyotirlingas

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: Baidyanath Dham Guide & Katha

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे 'कामना लिंग' के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, लंकापति रावण ने महादेव को लंका ले जाने के लिए यहाँ अपने दस शीश काटकर घोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रकट होकर उसके शीश पुनः जोड़ दिए और एक कुशल वैद्य की तरह उसकी चिकित्सा की, जिससे इस धाम का नाम 'वैद्यनाथ' पड़ा। सावन के पावन मास में सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा धाम में जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व है।

07 Sep 202628
omkareshwar-jyotirlinga-history-katha-darshan-guide
12 Jyotirlingas

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

06 Sep 202636
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग | Nageshwar Jyotirlinga Temple in Hindi
12 Jyotirlingas

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग | Nageshwar Jyotirlinga Temple in Hindi

गुजरात के द्वारका स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में पढ़ें। जानें इसकी पौराणिक कथा, इतिहास, धार्मिक महत्व, दर्शन समय, पूजा विधि और यात्रा मार्ग।

31 May 2026343
kedarnath-dham-history-mystery-yatra-guide
12 Jyotirlingas

केदारनाथ धाम: इतिहास, पौराणिक कथा, रहस्य व यात्रा गाइड

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट और गढ़वाल हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों तथा चार धामों में से एक है। महाभारत काल की पौराणिक मान्यता के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के पापों के प्रायश्चित हेतु जब पांडव शिवजी की खोज में हिमालय पहुँचे, तब महादेव ने बैल (नंदी) का रूप धारण किया और उनका पृष्ठ (पीठ) भाग केदारनाथ में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुआ। यह पावन धाम मोक्ष, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

02 Apr 2026816
kashi-vishwanath-jyotirlinga-guide
12 Jyotirlingas

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: Kashi Vishwanath Guide & Katha

उत्तर प्रदेश के प्राचीन एवं पावन नगर वाराणसी (काशी) में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। स्कंद पुराण और शिव पुराण के अनुसार, काशी नगरी महादेव के त्रिशूल पर बसी हुई है और इसे 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति यहाँ काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है और अपने प्राण त्यागता है, उसे स्वयं महादेव तारक मंत्र देकर जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) प्रदान करते हैं।

27 Mar 2026280
mallikarjuna-jyotirlinga-guide
12 Jyotirlingas

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: Mallikarjuna Temple Guide & Katha

आंध्र प्रदेश के नंदयाल जिले में कृष्णा नदी (पाताल गंगा) के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में द्वितीय ज्योतिर्लिंग है. यह पावन तीर्थ ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ माता सती के 18 महाशक्तिपीठों (माँ भ्रमरांबा देवी) में से एक होने का अद्वितीय गौरव रखता है. शिव पुराण के अनुसार, कार्तिकेय जी के रुष्ट होकर क्रौंच पर्वत जाने पर उन्हें मनाने हेतु भगवान शिव 'अर्जुन' और माता पार्वती 'मल्लिका' स्वरूप में यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे. यहाँ किए जाने वाले स्पर्श दर्शन और पाताल गंगा स्नान से जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति मिलती है.

24 Feb 2025397