
पातंजल योगसूत्र – अध्याय 5: विरासत: मिलन और मुक्ति
पातंजल योगसूत्र का अध्याय 5 — विरासत: मिलन और मुक्ति। यह अध्याय पतंजलि की विरासत, योग के माध्यम से मिलन और मुक्ति के मार्ग, और उनके दर्शन के शाश्वत महत्व को दर्शाता है।
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पातंजल योगसूत्र का अध्याय 5 — विरासत: मिलन और मुक्ति। यह अध्याय पतंजलि की विरासत, योग के माध्यम से मिलन और मुक्ति के मार्ग, और उनके दर्शन के शाश्वत महत्व को दर्शाता है।

गरुड़ पुराण का अध्याय 5 — मोक्ष और भक्ति। यह अध्याय मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग, भगवान विष्णु की भक्ति के महत्व और ज्ञान की प्राप्ति पर जोर देकर गरुड़ पुराण का समापन करता है।

पातंजल योगसूत्र का अध्याय 4 — व्याख्याएँ और प्रभाव। यह अध्याय पतंजलि के योग सूत्रों पर लिखी गई विभिन्न टीकाओं और उनके योग दर्शन के प्रभाव पर केंद्रित है।

गरुड़ पुराण का अध्याय 4 — पुनर्जन्म और कर्म। यह अध्याय कर्म के सिद्धांत और पुनर्जन्म के चक्र पर केंद्रित है, जिसमें अच्छे और बुरे कर्मों के परिणाम विस्तार से बताए गए हैं।

पातंजल योगसूत्र का अध्याय 3 — योग सूत्र: संकलन। यह अध्याय पतंजलि द्वारा योग सूत्रों के संकलन और योग के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

गरुड़ पुराण का अध्याय 3 — मृतकों के लिए कर्मकाण्ड। यह अध्याय मृतकों के लिए किए जाने वाले विभिन्न अनुष्ठानों, जैसे कि श्राद्ध और पिंडदान के महत्व पर प्रकाश डालता है, जिससे आत्मा को शांति मिलती है।

सुंदरकांड का अध्याय 5 — विजय सहित वापसी। हनुमान लंका से लौटकर राम को सीता का संदेश और मणि देते हैं।

पातंजल योगसूत्र का अध्याय 2 — प्रारंभिक शिक्षाएँ और व्याकरण। इस अध्याय में, पतंजलि की बाल्यवस्था, उनकी विलक्षण प्रतिभा, और उनके संस्कृत व्याकरण पर किए गए कार्यों का वर्णन है।

गरुड़ पुराण का अध्याय 2 — मृत्यु के बाद की यात्रा। इस अध्याय में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का वर्णन है, जिसमें यमलोक का मार्ग और विभिन्न प्रकार की यातनाएँ शामिल हैं।

सुंदरकांड का अध्याय 4 — संदेश और विनाश। हनुमान सीता को राम की मुद्रिका देते हैं, वाटिका को नष्ट करते हैं और मेघनाद से युद्ध करते हैं।

पातंजल योगसूत्र का अध्याय 1 — पतंजलि: दिव्य अवतार। यह अध्याय पतंजलि के दिव्य जन्म और शैव अवतार के रूप में धरती पर आने की कहानी का वर्णन करता है।

देवी भागवत पुराण का अध्याय 7 — महिमा और सीख। देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन, उनकी भक्ति का महत्व, और इस कथा से मिलने वाली नैतिक शिक्षाओं का उल्लेख किया गया है।