ग्रंथ

शिव पुराण – अध्याय 4: शिव की शक्तियों की कथाएँ

Tilak Kathayein13 Apr 2026151 views
शिव पुराण
शिव पुराण का अध्याय 4 — शिव की शक्तियों की कथाएँ। यह अध्याय शिव की विभिन्न शक्तियों और उनके अद्भुत कार्यों से संबंधित कहानियों का वर्णन करता है।

शिव की शक्तियों की कथाएँ

पार्वती और शिव के विवाह के उपरांत, कैलाश पर्वत पर आनंद और उत्सव का वातावरण था। देवताओं, ऋषियों और गंधर्वों ने मिलकर शिव और पार्वती का अभिनंदन किया। अब हम भगवान शिव की उन शक्तियों और लीलाओं का वर्णन करेंगे, जिन्होंने उन्हें महादेव बना दिया।

त्रिपुरासुर का वध

बहुत समय पहले, तारकासुर के तीन बलवान पुत्रों - तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली - ने देवताओं को त्रस्त कर दिया था। उन्होंने तीन अभेद्य पुरों का निर्माण किया, जो त्रिलोक में कहीं भी जा सकते थे। इन पुरों के कारण उन्हें त्रिपुरासुर कहा जाता था और उनके अत्याचार असहनीय हो गए थे। इंद्र सहित सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए, और विष्णु ने उन्हें भगवान शिव की शरण में जाने की सलाह दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सभी देवता कैलाश पर्वत की ओर चल पड़े, आशा और भय से भरे हुए।

देवताओं ने भगवान शिव के चरणों में दंडवत प्रणाम किया और कहा, "हे महादेव, आप सर्वशक्तिमान हैं। त्रिपुरासुर के अत्याचार से त्रिलोक पीड़ित है। कृपया हमारी रक्षा करें!" भगवान शिव ने शांत भाव से उत्तर दिया, "चिंता मत करो। मैं त्रिपुरासुर का वध करूंगा। तुम सब अपने-अपने लोकों को लौट जाओ।"

कालकूट विष का पान

एक बार, देवता और असुर मिलकर अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे। मंथन के दौरान, हलाहल नामक भयंकर विष प्रकट हुआ। उस विष की ज्वाला से त्रिलोक जलने लगा। देवता और असुर दोनों ही भयभीत हो गए और अपनी रक्षा के लिए भगवान शिव की ओर भागे। संसार की रक्षा के लिए, भगवान शिव ने उस विष को अपने हाथों में लिया और उसे पी लिया। पार्वती ने उनका कंठ दबा दिया, जिससे विष उनके गले में ही रुक गया। इसी कारण भगवान शिव नीलकंठ कहलाए।

विष पीने के बाद माता पार्वती व्याकुल हो उठीं। उन्होंने शिव से कहा, "हे स्वामी, यह क्या कर डाला? आपने अपने आप को खतरे में क्यों डाला?" शिव मुस्कुराए और बोले, "हे पार्वती, संसार के कल्याण के लिए, मुझे यह विष पीना पड़ा। सत्य यही है कि अपने भक्तों के कष्ट हरने से बढ़कर कोई और सुख नहीं।" विष का प्रभाव इतना तीव्र था कि शिव को हल्का सा ज्वर भी हुआ, लेकिन उन्होंने अपने तेज और तप के बल से उस पर विजय प्राप्त की।

अंधकासुर का वध

अंधकासुर एक शक्तिशाली असुर था, जो हिरण्याक्ष का पुत्र था। उसने भगवान शिव से अमर होने का वरदान प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। एक कथा के अनुसार, वह देवी पार्वती को अपनी माता समझ बैठा था और उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करने लगा। क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से अंधकासुर पर प्रहार किया। प्रत्येक रक्त की बूंद जो अंधकासुर के शरीर से गिरी, उससे एक नया असुर उत्पन्न हो गया। देवताओं ने भयभीत होकर भगवान शिव से प्रार्थना की।

तब भगवान शिव ने अपनी शक्ति से एक देवी को प्रकट किया, जिन्होंने अंधकासुर के रक्त की प्रत्येक बूंद को पी लिया। इस प्रकार, अंधकासुर का वध हुआ। अंधकासुर अंत में शिव का भक्त बन गया और उनके गणों में शामिल हो गया। भगवान शिव ने अपनी शक्ति से यह सिद्ध कर दिया कि वे दयालु और शक्तिशाली दोनों हैं। उनकी कृपा से दुष्ट भी सद्गति को प्राप्त होते हैं।

अध्याय का समापन

इस प्रकार भगवान शिव ने अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करके देवताओं और मनुष्यों को संकटों से बचाया। उनकी लीलाएँ अनंत हैं और उनका वर्णन करना असंभव है। अगले अध्याय में हम भगवान शिव और उनके गणों की कथाओं का वर्णन करेंगे, जिसमें नंदी, वीरभद्र और अन्य गणों की महिमा का वर्णन होगा। जानने के लिए उत्सुक रहें कि शिव के इन अनन्य भक्तों ने किस प्रकार उनकी सेवा की।

अध्याय 4 का सार: इस अध्याय में भगवान शिव की तीन प्रमुख शक्तियों - त्रिपुरासुर का वध, कालकूट विष का पान और अंधकासुर का वध - का वर्णन किया गया है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि भगवान शिव हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और संसार के कल्याण के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। इससे यह भी ज्ञात होता है कि शिव की भक्ति से दुष्ट भी सद्गति को प्राप्त हो सकते हैं।

🕉

आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026193
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026159
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 3 — परीक्षा और कष्टों का सामना। इस अध्याय में, भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त करने से पहले कई बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।

08 Jun 2026162
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 2 — भक्त की विनती और भक्ति। इस अध्याय में, एक भक्त की सच्ची भक्ति और भगवान भैरव से उसकी पुकार का वर्णन किया गया है।

08 Jun 2026148
अंबरनाथ शिव मंदिर
मंदिर

Ambernath Shiv Mandir | अंबरनाथ शिव मंदिर

अंबरनाथ शिव मंदिर एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है, जहाँ दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक है; मुंबई से रेल द्वारा आसानी से पहुँचें और शिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।

08 May 2026350