लंका विजय कथा – अध्याय 9: विजय और वापसी | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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लंका विजय कथा – अध्याय 9: विजय और वापसी

Tilak Kathayein12 Apr 202645 views📖 1 min read
लंका विजय कथा
लंका विजय कथा का अध्याय 9 — विजय और वापसी। राम, सीता को वापस लेकर अयोध्या लौटते हैं और उनका राज्याभिषेक होता है।

विजय और वापसी

रावण के वध के पश्चात लंका में शांति छा गई थी, परंतु श्री राम के मन में सीता माता की पवित्रता को लेकर चिंता व्याप्त थी। युद्ध की भीषणता के बाद, अब अयोध्या वापसी की तैयारी करने से पहले एक और कठिन परीक्षा शेष थी। सम्पूर्ण वानर सेना और लंकावासी उत्सुकता से अगले चरण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

सीता की अग्नि परीक्षा

लंका के अशोक वाटिका में वर्षों के कारावास के बाद, सीता माता को राम के सम्मुख लाया गया। उनका तेज सूर्य के समान था, परंतु आंखों में अनिश्चितता का भाव था। राम ने गंभीर स्वर में कहा, "हे देवी, आपने रावण के बंधन में रहकर जो कष्ट सहा, वह सर्वविदित है। परन्तु लोक मर्यादा के अनुसार, आपकी पवित्रता सिद्ध करना आवश्यक है।" वातावरण में सन्नाटा छा गया। वानर सेना और रावण के राज्य के नागरिक, सभी की निगाहें सीता माता पर टिकी थीं।

सीता माता ने शांत भाव से उत्तर दिया, "यदि मेरा मन, वचन और कर्म सदैव राम के प्रति समर्पित रहे हैं, तो अग्नि मेरी रक्षा करेगी।" यह कहते हुए उन्होंने अग्नि में प्रवेश किया। चारों ओर हाहाकार मच गया, परन्तु अग्नि ने उन्हें स्पर्श तक नहीं किया। अग्नि देव स्वयं नारायण के चरणों में गिर पड़े और सीता माता की पवित्रता की साक्षी दी। देवताओं ने आकाश से पुष्पों की वर्षा की, और सभी ने जय जयकार किया। "जय सीता राम!" की ध्वनि से लंका गूंज उठी।

अयोध्या वापसी

विभीषण को लंका का राजा घोषित किया गया। लंका को योग्य राजा मिलने पर श्री राम प्रसन्न हुए। हनुमान जी ने भरत को श्री राम के कुशलता की सूचना देने के लिए अयोध्या की ओर उड़ान भरी। विभीषण ने पुष्पक विमान को सजाया और श्री राम, सीता माता, लक्ष्मण और वानर सेना के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान किया। विमान आकाश में उड़ता हुआ, मानो अयोध्या के लिए एक शुभ संदेश लेकर जा रहा था। रास्ते में अनेक दिव्य दृश्य दिखाई दिए, जिन्हें देखकर सभी आनंदित हुए।

जब पुष्पक विमान अयोध्या पहुंचा, तो पूरी नगरी दीपों से जगमगा उठी। भरत, शत्रुघ्न, माता कौशल्या और कैकेयी सहित पूरा अयोध्या परिवार श्री राम के स्वागत के लिए आतुर था। भरत ने राम के चरण पकड़ लिए, उनकी आंखों में वर्षों का विरह आंसुओं के रूप में बह रहा था। मानो युगों बाद अयोध्या को अपना राजकुमार वापस मिला हो। श्री राम ने सबको प्रेम से गले लगाया। वातावरण भक्ति और आनंद से परिपूर्ण था। राम के स्पर्श से अयोध्या धन्य हो गई।

राम का राज्याभिषेक

शुभ मुहूर्त में, श्री राम का राज्याभिषेक किया गया। वसिष्ठ मुनि ने विधि-विधान से राम को अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित किया। शंख और नगाड़ों की ध्वनि से दिशाएं गूंज उठीं। प्रजा राम राज्य की स्थापना से अत्यंत प्रसन्न थी। राम ने न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। चारों ओर सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण था।

राम राज्य में कोई दुखी या दरिद्र नहीं था। सभी एक दूसरे से प्रेम करते थे, और धर्म का पालन करते थे। श्री राम का शासनकाल सत्य, न्याय और नैतिकता का प्रतीक बन गया। हर घर में राम नाम की चर्चा थी, और अयोध्या एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो गया। राम के कृपा से पृथ्वी पर धर्म की स्थापना हुई, और सभी देवताओं ने आनंदित होकर जय जयकार किया।

अध्याय 9 का सार: इस अध्याय में, सीता माता की अग्नि परीक्षा और उनकी पवित्रता की पुष्टि हुई। इसके बाद, श्री राम अयोध्या वापस लौटे और उनका राज्याभिषेक हुआ, जिससे धर्म और न्याय का शासन स्थापित हुआ। यह अध्याय हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है, और भगवान राम की कृपा से धरती पर शांति स्थापित होती है।

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