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लंका विजय कथा – अध्याय 4: सीता हरण कांड

Tilak Kathayein12 Apr 2026136 views
लंका विजय कथा
लंका विजय कथा का अध्याय 4 — सीता हरण कांड। रावण छल से सीता का हरण करता है और उन्हें लंका ले जाता है।

सीता हरण कांड

राम, लक्ष्मण और सीता दंडक वन में शांतिपूर्वक निवास कर रहे थे। ऋषि-मुनियों को राक्षसों से अभयदान देते हुए, राम ने अपना वनवास धर्मानुसार निभाया। दंडक वन से आगे बढ़ते हुए, उनकी यात्रा एक ऐसे मोड़ पर आने वाली थी, जो लंका विजय की कथा का सूत्रपात करता।

शूर्पणखा का अपमान

पंचवटी के शांत वातावरण में एक दिन, रावण की बहन शूर्पणखा भटकती हुई आई। उसकी दृष्टि राम पर पड़ी, और वह उनके सौंदर्य से मोहित हो गई। काम के वशीभूत होकर, उसने राम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, यह भूलकर कि वह विवाहित हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। शूर्पणखा का रूप अत्यंत भयानक था, उसका शरीर कुरूप और वाणी कर्कश थी। राम ने हास्य करते हुए उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया।

लक्ष्मण ने भी उससे परिहास किया और उसे राम के पास वापस भेज दिया। शूर्पणखा क्रोध से भर उठी। उसने सोचा, "ये दोनों भाई मिलकर मेरा अपमान कर रहे हैं! मुझे इनका गर्व तोड़ना होगा।" उसने सीता को मारने का निश्चय किया, क्योंकि वह जानती थी कि सीता ही राम की प्रिय हैं।

जब शूर्पणखा ने सीता पर आक्रमण करने का प्रयास किया, तो राम ने लक्ष्मण को संकेत किया। क्रोधित लक्ष्मण ने तत्काल अपनी तलवार निकाली और शूर्पणखा की नाक और कान काट दिए। वह चीत्कार करती हुई, लहूलुहान होकर खर और दूषण के पास सहायता के लिए भागी।

मारीच का छल

शूर्पणखा के अपमान की खबर सुनकर, खर और दूषण क्रोधित हो उठे और राम-लक्ष्मण पर आक्रमण करने के लिए अपनी सेना ले आए। भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें राम ने अकेले ही खर-दूषण और उनकी पूरी सेना को मार डाला। अपमानित शूर्पणखा लंका पहुंची और अपने भाई रावण को सारी कथा सुनाई। उसने सीता के अद्वितीय सौंदर्य का वर्णन किया, जिससे रावण के मन में सीता को पाने की लालसा उत्पन्न हो गई।

रावण ने सीता हरण की योजना बनाई और अपने मामा मारीच की सहायता लेने का निश्चय किया। मारीच पहले राम की शक्ति का अनुभव कर चुका था, जब রাম ने ताड़का का वध किया था। उसने रावण को समझाने का प्रयास किया, "राम साधारण मनुष्य नहीं हैं, वे स्वयं विष्णु के अवतार हैं। उनसे बैर लेना विनाशकारी होगा।"

परंतु रावण काम, क्रोध और अहंकार से अंधा हो चुका था। उसने मारीच को धमकाया, "यदि तुम मेरी सहायता नहीं करोगे, तो मैं तुम्हें मार डालूंगा।" भयभीत होकर, मारीच रावण की योजना में शामिल होने को तैयार हो गया। मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण किया और सीता को लुभाने के लिए पंचवटी के वन में घूमने लगा।

सीता का हरण

स्वर्ण मृग को देखकर सीता मोहित हो गईं। उन्होंने राम से उस मृग को पकड़ने का आग्रह किया। राम जानते थे कि यह कोई छल है, परंतु सीता के आग्रह को वे टाल नहीं सके। उन्होंने लक्ष्मण को सीता की रक्षा करने का आदेश दिया और स्वर्ण मृग के पीछे चल पड़े। बहुत दूर जाने के बाद, राम ने अपने बाण से मारीच को मार गिराया। मरते समय, मारीच ने राम की आवाज़ में "हे सीते! हे लक्ष्मण!" कहकर पुकारा, ताकि सीता और लक्ष्मण भ्रमित हो जाएं।

सीता ने लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए जाने को कहा, परंतु लक्ष्मण ने उनकी आज्ञा का उल्लंघन करने से इनकार कर दिया। सीता ने लक्ष्मण पर कठोर वचन कहे, जिससे वे विवश हो गए। लक्ष्मण ने कुटिया के चारों ओर एक लक्ष्मण रेखा खींची और सीता को आदेश दिया कि वे किसी भी परिस्थिति में इस रेखा को पार न करें। जैसे ही लक्ष्मण राम की खोज में निकले, रावण एक साधु के वेश में कुटिया के पास पहुंचा।

रावण ने भिक्षा मांगी, और सीता ने साधु को निराश न करने के लिए लक्ष्मण रेखा पार कर दी। अवसर पाकर, रावण ने अपने असली रूप में आकर सीता का हरण कर लिया और उन्हें अपने पुष्पक विमान में लंका ले गया। सीता विलाप करती रहीं, "हे राम! हे लक्ष्मण!" उनकी चीखें वन में गूंजती रहीं, परंतु उस समय उनकी सहायता करने वाला कोई नहीं था। जटायु ने रावण को रोकने का प्रयास किया, परंतु रावण ने उसके पंख काट डाले और उसे घायल कर दिया। सीता को लंका ले जाने के बाद, रावण ने उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बना लिया। यह घटना लंका विजय की कथा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने हनुमान की भक्ति और राम के पराक्रम को प्रदर्शित करने का मार्ग प्रशस्त किया।

अध्याय 4 का सार: इस अध्याय में शूर्पणखा के अपमान, मारीच के छल और सीता हरण की घटनाओं का वर्णन है। यह दिखाता है कि काम, क्रोध और अहंकार विनाश का कारण बन सकते हैं, और भगवान की माया को समझना कठिन है। सीता का हरण धर्म की रक्षा और रावण के अंत की शुरुआत थी।

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आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

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