
Piyo Ji Maine Ram Ratan Dhan Payo – पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु । कृपा कर अपनायो ॥ पायो जी मैंने राम रतन...
Tilak Kathayein TilakKathayein की संपादकीय टीम है, जो प्रामाणिक शास्त्रों पर आधारित हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा, मंत्र और पंचांग प्रकाशित करती है।

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । पायो जी मैंने राम रतन धन पायो । वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु । कृपा कर अपनायो ॥ पायो जी मैंने राम रतन...

श्रीभगवानुवाच: अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥ श्रीभगवान् बोले- जो पुरुष कर्मफलका आश्रय न लेकर करनेयोग्य कर्म करता है, वह सन्यासी है और योगी भी है, केवल अग्निहोत्र न करनेवाला या कर्म न करनेवाला सन्यासी नहीं है।

मीराबाई को भगवान कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। मीराबाई ने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की और कहा जाता है कि उनकी मृत्यु भी…

महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस दिन व्रत रखकर भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।...

संतोषी माता व्रत और कथा का पालन भारत में बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। यह व्रत मुख्यतः शुक्रवार को किया जाता है और इसे करने से...

अर्जुन उवाच: सन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥ अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मोंके संन्यासकी और फिर कर्मयोगकी प्रशंसा करते हैं। इसलिये इन…

भगवद गीता का चौथा अध्याय “ज्ञान कर्म संन्यास योग” है। इसमें श्री कृष्ण ने आत्मज्ञान, निष्काम कर्म और दिव्य ज्ञान के माध्यम से कर्तव्यों के निर्वहन को समझाया है। श्रीभगवानुवाच:…

भगवद गीता का तीसरा अध्याय “कर्म योग” पर आधारित है, जिसमें श्री कृष्ण ने कर्म करने, बिना फल की चिंता किए, अपने धर्म का पालन करने और आत्म-निर्भरता की महत्ता…

संजय बोले- उस प्रकार करुणासे व्याप्त और आँसुओंसे पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रोंवाले शोकयुक्त उस अर्जुनके प्रति भगवान् मधुसूदनने यह वचन…

खाटू श्याम की आरती एक प्रसिद्ध हिंदी आरती है जो खाटू श्याम जी की पूजा में उतारी जाती है। यह आरती उनकी भक्ति में उत्साह और आनंद को अभिव्यक्त करती…

मीराबाई भारत की महान कृष्ण भक्त, संत और कवयित्री थीं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को समर्पित कर दिया। राजघराने में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने सांसारिक वैभव का त्याग कर प्रेम, भक्ति और समर्पण का मार्ग अपनाया। इस लेख में जानें मीराबाई का जीवन परिचय, श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति, प्रमुख भजन, संघर्ष, आध्यात्मिक यात्रा और भारतीय भक्ति आंदोलन में उनके अमूल्य योगदान।

पुरुषोत्तम मास, जिसे मलमास के नाम से जाना जाता था, श्रीकृष्ण के वरदान से विशेष महत्व प्राप्त करता है। इस माह में तप, पूजा, दान, कथा श्रवण से अनंत पुण्य…