Putrada Ekadashi Shravan | पुत्रदा एकादशी श्रावण – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Putrada Ekadashi Shravan | पुत्रदा एकादशी श्रावण – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein20 May 202641 views📖 1 min read
पुत्रदा एकादशी श्रावण – Putrada Ekadashi Shravan
पुत्रदा एकादशी श्रावण 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

पुत्रदा एकादशी श्रावण – परिचय

पुत्रदा एकादशी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। 2026 में यह एकादशी 16 अगस्त को पड़ेगी। 'पुत्रदा' नाम का अर्थ है 'पुत्र प्रदान करने वाली'। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। यह एकादशी सभी एकादशियों में श्रेष्ठ मानी जाती है क्योंकि यह संतान सुख और मोक्ष दोनों प्रदान करती है।

सभी एकादशियों में पुत्रदा एकादशी का विशेष स्थान है। इसे अत्यंत फलदायी और पुण्यदायी माना जाता है। इस व्रत को करने से न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इसीलिए इसे सर्वश्रेष्ठ एकादशी कहा गया है।

पुत्रदा एकादशी श्रावण की व्रत कथा

प्राचीन काल में महिष्मति नामक एक राज्य था, जिसके राजा वीरसेन थे। राजा को कोई संतान नहीं थी, जिस कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे। अपने पुत्र के वियोग में राजा ने अपना राज्य त्याग दिया और वन में चले गए।

वन में भटकते हुए राजा वीरसेन को एक दिन महर्षि मार्कण्डेय मिले। महर्षि ने राजा की पीड़ा को समझा और उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने का विधान बताया। राजा ने महर्षि के कहे अनुसार, विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की।

भगवान विष्णु राजा की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ समय पश्चात राजा वीरसेन को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसने बाद में राज्य का संचालन किया। इस प्रकार, इस व्रत के प्रभाव से राजा को पुत्र सुख की प्राप्ति हुई।

व्रत विधि

दशमी की रात्रि से ही व्रत का आरंभ हो जाता है। दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। रात्रि में जमीन पर शयन करना उत्तम माना जाता है।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और धूप, दीप, नैवेद्य आदि से उनकी पूजा करें। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालस्नान कर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
सुबहश्री विष्णु की मूर्ति को स्नान कराकर षोडशोपचार (16 प्रकार की पूजा सामग्री) से पूजा करें।
दिन मेंव्रत का पालन करें, मंदिर में जाकर या घर पर ही भजन-कीर्तन करें।
सायंकालभगवान विष्णु की आरती करें और कथा सुनें।
रात्रिफलाहार करें और श्री विष्णु का ध्यान करते हुए सोएं।

द्वादशी के दिन, एकादशी व्रत का पारण किया जाता है। द्वादशी तिथि लगने के बाद ही पारण करना चाहिए। पूजा-पाठ के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दक्षिणा देकर, स्वयं भी सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

पुत्रदा एकादशी श्रावण व्रत में फलाहार, दूध, दही, घी, मेवे, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और साबूदाने से बने व्यंजन खाए जा सकते हैं। व्रत में नमक का सेवन सेंधा नमक के रूप में किया जा सकता है।

इस व्रत में चावल खाना वर्जित है। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की दाल, लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाना भगवान विष्णु को अप्रिय होता है और इससे व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है।

पुत्रदा एकादशी श्रावण व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार, यह व्रत गौ हत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति दिलाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं, उन्हें अंत में वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और वे मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी है। इसके अलावा, यह धन-धान्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करता है।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया को आराम मिलता है और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में पुत्रदा एकादशी श्रावण कब है?

2026 में पुत्रदा एकादशी श्रावण 16 अगस्त, शनिवार को पड़ेगी। इस दिन व्रत रखना अत्यंत शुभ फलदायी होगा।

पुत्रदा एकादशी श्रावण व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना भगवान विष्णु को अप्रिय है। ऐसी कथा है कि एक बार महर्षि मेधावी ने अपने तप से प्राप्त अन्न को देवताओं को अर्पित किया, लेकिन प्यास लगने पर उन्होंने एक स्त्री को उत्पन्न किया, जो चावल के रूप में थी। इस कारण एकादशी को चावल खाना वर्जित माना जाता है।

क्या बीमार व्यक्ति पुत्रदा एकादशी श्रावण व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं, वृद्धजन या जो बहुत कमजोर हैं, वे पूर्ण उपवास न रखकर केवल फलाहार या एक समय का भोजन कर सकते हैं। वे चाहें तो किसी योग्य पंडित से अपनी ओर से व्रत का संकल्प करवा सकते हैं।

निष्कर्ष

पुत्रदा एकादशी श्रावण का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। भगवान विष्णु अपने भक्तों को संतान सुख, समृद्धि और अंत में मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह एकादशी सभी एकादशियों में सबसे शक्तिशाली मानी जाती है, जो निष्ठापूर्वक व्रत करने वालों की हर मनोकामना पूर्ण करती है।

भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पुत्रदा एकादशी श्रावण का व्रत रखना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

शेयर करें:

संबंधित लेख

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
ब्लॉग

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व

कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

07 Jun 202627
मंगल दोष
ब्लॉग

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?

हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

02 Jun 202671
श्री कार्तिकेय चालीसा
चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

01 Jun 202647