Yogini Ekadashi | योगिनी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Yogini Ekadashi | योगिनी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein20 May 202667 views📖 1 min read
योगिनी एकादशी – Yogini Ekadashi
योगिनी एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

योगिनी एकादशी – परिचय

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है। 2026 में, योगिनी एकादशी 20 जून को मनाई जाएगी। इस एकादशी का नाम 'योगिनी' इसलिए है क्योंकि यह व्रत करने वाले को सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है।

सभी एकादशियों में योगिनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे 'सर्वपाप-हरा' एकादशी भी कहा जाता है, अर्थात यह सभी प्रकार के पापों को नष्ट करने वाली है। पुराणों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और वह समस्त कष्टों से मुक्त हो जाता है।

योगिनी एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में अलकापुरी नामक नगर में राजा कुबेर के सेवक हेममाली रहते थे। एक दिन वे अपनी पत्नी के साथ विहार कर रहे थे जब वे भगवान शिव की पूजा के लिए मानसरोवर से फूल लेने गए। वे अपनी पत्नी के मोह में इतने आसक्त हो गए कि वे पूजा का समय भूल गए और खाली हाथ लौट आए।

इस अपराध से क्रोधित होकर भगवान शिव ने उन्हें कुष्ठ रोग से पीड़ित होने का श्राप दिया। हेममाली अत्यंत दुखी हुए और श्राप से मुक्ति पाने के लिए वे पृथ्वी पर भटकने लगे। एक दिन वे मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचे, जिन्होंने उन्हें योगिनी एकादशी का व्रत रखने की विधि बताई।

हेममाली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति मिल गई। व्रत के पुण्य से वे पुनः अपने पूर्व वैभव को प्राप्त हुए और सुखपूर्वक रहने लगे।

व्रत विधि

दशमी की रात को सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। देर रात तक नहीं जागना चाहिए और जमीन पर सोना चाहिए।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा के लिए फूल, फल, तुलसी दल, धूप, दीप आदि अर्पित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालउठकर स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
सूर्योदय के पश्चातभगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें।
पूरे दिनव्रत रखें, अन्न ग्रहण न करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
शाम कोभगवान विष्णु की आरती करें और भजन-कीर्तन करें।
रात्रि मेंजागरण करें और भगवान का स्मरण करें।

द्वादशी के दिन, सूर्योदय के पश्चात स्नान कर ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दें। इसके बाद पारण मुहूर्त में व्रत खोलें। पारण के लिए सात्विक भोजन जैसे फल, दही, या हलवा ग्रहण कर सकते हैं।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

योगिनी एकादशी के व्रत में फलाहार का विधान है। आप फल, दूध, दही, मेवे, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, और साबूदाना खा सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों को खाने से व्रत की पवित्रता बनी रहती है।

योगिनी एकादशी के व्रत में चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की दाल, लहसुन, प्याज, और मांसाहार का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि कहा जाता है कि चावल में जल तत्व की अधिकता होती है और एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन त्यागना चाहिए।

योगिनी एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार, यह व्रत समस्त पापों को भस्म करने की क्षमता रखता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह भगवान विष्णु के लोक में स्थान पाता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत व्यक्ति को जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करता है। सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया सुधरती है और शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में योगिनी एकादशी कब है?

2026 में योगिनी एकादशी 20 जून, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 08:08 से अगले दिन सुबह 07:10 तक रहेगा।

योगिनी एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चावल को जल तत्व का प्रतीक माना जाता है और एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन वर्जित है। कुछ कथाओं के अनुसार, चावल को महर्षि मेधा की पुत्री माना जाता है, जिनका सेवन करने से व्यक्ति को पाप लगता है।

क्या बीमार व्यक्ति योगिनी एकादशी व्रत रख सकता है?

जी हां, बीमार, गर्भवती महिलाएं या वृद्ध व्यक्ति यदि पूर्ण उपवास नहीं रख सकते, तो वे फलाहार कर सकते हैं या किसी अन्य व्यक्ति से व्रत का संकल्प करवा सकते हैं। वे केवल एक समय भोजन करके भी व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनकी असीम कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस एकादशी का पालन करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु सभी मनोरथ पूर्ण करने का वरदान देते हैं। इसीलिए इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जो समस्त पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

सभी भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखना चाहिए। यह व्रत न केवल सांसारिक सुख प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति भी कराता है। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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