Amalaki Ekadashi | आमलकी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Amalaki Ekadashi | आमलकी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein21 May 202643 views📖 1 min read
आमलकी एकादशी – Amalaki Ekadashi
आमलकी एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

आमलकी एकादशी – परिचय

आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 2 मार्च, सोमवार को पड़ रही है। इस एकादशी का नाम 'आमलकी' इसलिए है क्योंकि इस दिन आंवले के वृक्ष का विशेष महत्व होता है और भगवान विष्णु को आंवला अत्यंत प्रिय है। माना जाता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है, अतः इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सभी एकादशियों में आमलकी एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे 'रंग एकादशी' या 'विजया एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। यह एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर प्रदान करती है।

आमलकी एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में एक राज्य था जहाँ चैत्ररथ नामक राजा राज्य करते थे। राजा बड़े धर्मनिष्ठ और प्रजावत्सल थे। एक बार उन्होंने अपनी प्रजा के साथ आमलकी एकादशी का व्रत रखा। उसी राज्य में एक भील (कठोर हृदय वाला) भी रहता था, जो राजा की प्रजा पर घात लगाए हुए था।

एक दिन जब राजा और प्रजा एकादशी का व्रत मना रहे थे, तब उस भील ने राजा पर आक्रमण कर दिया। भील के प्रहार से राजा मूर्छित हो गए। तभी राजा के शरीर से एक दिव्य स्त्री उत्पन्न हुई जिसने उस भील को मार गिराया। जब राजा को होश आया तो उन्होंने देखा कि एक दिव्य स्त्री उनके समीप खड़ी है और भील का शव पड़ा है।

दिव्य स्त्री ने राजा को बताया कि वह उनके एकादशी व्रत के पुण्य से उत्पन्न हुई है और उन्होंने ही भील का वध किया है। इस प्रकार राजा चैत्ररथ ने आमलकी एकादशी का व्रत करके अनन्त पुण्य अर्जित किया और मोक्ष को प्राप्त हुए।

व्रत विधि

दशमी की रात से ही व्रत की शुरुआत हो जाती है। इस रात हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर शयन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। भगवान को स्नान कराएं, नवीन वस्त्र अर्पित करें और तुलसी दल चढ़ाना अत्यंत शुभ होता है। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते रहें।

समयकरने का कार्य
सूर्योदय से पूर्वनित्यकर्म से निवृत होकर स्नान करें।
प्रातःकालभगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
मध्य दिवसभगवान विष्णु की षोडशोपचार (16 प्रकार से) पूजा करें।
सायंकालभगवान विष्णु के समक्ष दीपक प्रज्वलित कर भजन-कीर्तन करें।
रात्रिफलाहार ग्रहण कर भगवान का स्मरण करते हुए शयन करें।

द्वादशी के दिन, सूर्योदय के पश्चात, ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देकर, पश्चात स्वयं पारण करें। पारण के समय भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

आमलकी एकादशी के व्रत में फलाहार, कूटू का आटा, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, दूध और दूध से बने पदार्थ, मेवे (जैसे बादाम, काजू, किशमिश) आदि का सेवन किया जा सकता है। विशेष रूप से आंवले का सेवन और दान करना इस दिन अत्यधिक शुभ माना जाता है।

इस व्रत में चावल का सेवन पूर्णतया वर्जित है। साथ ही, किसी भी प्रकार की दाल, बैंगन, लौकी, और प्याज-लहसुन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि मान्यतानुसार, चावल में भगवान विष्णु का अंश माना जाता है और एकादशी के दिन इसके सेवन से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है।

आमलकी एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के समस्त पूर्व जन्म के और इस जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को असह्य पापों से मुक्ति मिलती है।
  • मोक्ष प्राप्ति – आमलकी एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष को प्राप्त होता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत धन, यश, सुख-समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करता है। घर में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया को आराम मिलता है, जिससे शरीर डिटॉक्स होता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि का एक उत्तम माध्यम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में आमलकी एकादशी कब है?

2026 में आमलकी एकादशी 2 मार्च, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च की सुबह 4:37 बजे तक रहेगा।

आमलकी एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, चावल को अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है और कुछ कथाओं के अनुसार, यह भगवान विष्णु के अंश से उत्पन्न हुआ है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन चावल का सेवन करना उनके प्रति अनादर माना जाता है और व्रत के पुण्य को क्षीण करता है।

क्या बीमार व्यक्ति आमलकी एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, वृद्ध या गर्भवती महिलाएं यदि पूर्ण उपवास न रख सकें तो वे फलाहार कर सकती हैं या दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण कर सकती हैं। वे चाहें तो किसी अन्य को व्रत का पुण्य दान भी कर सकती हैं।

निष्कर्ष

आमलकी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। यह उन सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है जो भगवान विष्णु को समर्पित हैं। इस व्रत का पालन करने वाले भक्तों को भगवान विष्णु स्वयं अक्षय पुण्य का वरदान देते हैं। इस एकादशी को विधि-विधान से करने पर मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है। आंवले के वृक्ष की पूजा और दान इस दिन को और भी कल्याणकारी बना देता है।

सभी भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ आमलकी एकादशी का व्रत रखना चाहिए। भगवान विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उन्हें संसार के दुखों से मुक्ति दिलाते हैं। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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