देवी की कथाएँ

मंगला गौरी कथा – अध्याय 3: पुत्र का भाग्य

Tilak Kathayein13 Apr 2026148 views
मंगला गौरी कथा
मंगला गौरी कथा का अध्याय 3 — पुत्र का भाग्य। व्यापारी का पुत्र अल्पायु होता है जिसके कारण मंगला गौरी की पूजा से उसे लम्बी आयु का वरदान मिलता है।

पुत्र का भाग्य

पिछले अध्याय में हमने देखा कि किस प्रकार कमला ने कठिनाइयों से लड़ते हुए और अटूट भक्ति से मंगला गौरी की आराधना की। उसकी त्याग और समर्पण की भावना ने देवताओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया था। अब आगे, भाग्य के लेख और देवी के आशीर्वाद के बारे में जानते है।

भविष्यवाणी की छाया

कमला और मदन के जीवन में पुत्र प्राप्ति की ख़ुशी अधिक समय तक नहीं रही। एक दिन, एक महान ज्योतिषी उनके घर पहुंचे। कमला और मदन ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया और अपने नवजात शिशु का भविष्य जानने की इच्छा व्यक्त की। ज्योतिषी ने बच्चे की कुंडली देखी, उनकी आँखें गंभीर हो गईं और माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। घर में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया, जैसे कोई अनहोनी होने वाली हो। हवा भी भारी लग रही थी, मानो कुछ डर छिपा हो।

ज्योतिषी ने गहरी सांस ली और धीरे से कहा, "हे देवी, ये कैसा विधान है? पुत्र अल्पायु है। सोलह वर्ष की आयु तक ही इसका जीवनकाल है।" कमला का हृदय मानो फट गया। मदन के पैरों तले जमीन खिसक गई। कमला विलाप करते हुए ज्योतिषी के पैरों पर गिर पड़ी, "क्या कोई उपाय नहीं है मुनिवर? क्या हम अपने पुत्र को बचा नहीं सकते?"

मंगला गौरी का महत्व

ज्योतिषी ने कमला को उठाया और शांत करते हुए कहा, "पुत्री, भाग्य के लेख को पूरी तरह से बदला नहीं जा सकता, परन्तु मंगला गौरी की आराधना से, उनके आशीर्वाद से, इस कठोर भाग्य को कुछ हद तक कम अवश्य किया जा सकता है। मंगला गौरी की श्रृद्धा पूर्वक पूजा करो, उनसे अपने पुत्र के जीवन की भीख मांगो। वे दयालु हैं और भक्तों की पुकार अवश्य सुनती हैं।" उन्होंने आगे बताया कि श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत करना और विधि-विधान से उनकी पूजा करना अनिवार्य है। इससे पुत्र के जीवन पर आने वाला संकट टल सकता है।

ज्योतिषी के वचन कमला के लिए उम्मीद की किरण लेकर आए। उसने उसी क्षण निश्चय कर लिया कि वह अपने पुत्र के जीवन की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उसने मन ही मन मंगला गौरी से प्रार्थना की, "हे माँ, मुझ पर दया करो। मेरे पुत्र को दीर्घायु प्रदान करो। मैं तुम्हारी शरण में हूँ।" कमला ने अपने पति को ज्योतिषी द्वारा बताई गई सभी बातें बताईं और दोनों ने मिलकर मंगला गौरी की पूजा करने का संकल्प लिया।

वरदान का उदय

कमला ने श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को पूरे विधि-विधान से मंगला गौरी की पूजा की। उसने व्रत रखा, दान-पुण्य किया और मंगला गौरी के मंत्रों का जाप किया। उसकी भक्ति और श्रद्धा देखकर देवी मंगला गौरी प्रसन्न हुईं। एक दिन, पूजा करते समय, कमला को देवी का दिव्य दर्शन हुआ। देवी ने मुस्कुराकर कहा, "पुत्री, तुम्हारी भक्ति से मैं प्रसन्न हूँ। तुम्हारे पुत्र के ऊपर जो संकट आने वाला था, उसे मैंने कम कर दिया है। वह दीर्घायु होगा और उसे जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।"

देवी का आशीर्वाद सुनकर कमला के हृदय में आनंद की लहर दौड़ गई। उसकी आँखों से कृतज्ञता के आंसू बहने लगे। उसने देवी को बार-बार प्रणाम किया और उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद दिया। मंगला गौरी की कृपा से कमला और मदन के जीवन में एक नई आशा का उदय हुआ। उन्होंने अपने पुत्र का पालन पोषण प्रेम और सावधानी से किया, हमेशा मंगला गौरी का स्मरण करते हुए।

अध्याय 3 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि कैसे एक भविष्यवाणी ने कमला और मदन के जीवन में डर भर दिया, लेकिन मंगला गौरी की आराधना ने उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई। सच्ची भक्ति और विश्वास से मंगला गौरी ने उनके पुत्र की रक्षा की। इस अध्याय से हमें यह सीख मिलती है कि विपत्ति के समय में ईश्वर पर विश्वास रखना और उनकी शरण में जाना ही सच्चा मार्ग है।

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आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

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