करणी माता कथा – अध्याय 7: करणी माता की विदाई

करणी माता की विदाई
चूहों के मंदिर के निर्माण के पश्चात, करणी माता की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। भक्तों का तांता लगा रहता, हर कोई उनकी कृपा दृष्टि पाने को आतुर दिखता। लेकिन करणी माता का मन अब तीर्थयात्रा की ओर था, वह सांसारिक मोह-माया से दूर, परमात्मा के चिंतन में लीन होना चाहती थीं।
तीर्थयात्रा की तैयारी
सुबह की पहली किरण के साथ ही माहौल भक्तिमय हो गया था। भक्तजन भजन-कीर्तन कर रहे थे, धूप और अगरबत्ती की सुगंध से वातावरण पवित्र हो रहा था। करणी माता ने भक्तों को आशीर्वाद दिया, उनकी आंखों में स्नेह और विदाई का भाव झलक रहा था। उनके चेहरे पर एक अद्भुत शांति थी, मानो उन्हें अपने भविष्य का ज्ञान हो गया हो। उन्होंने सफ़ेद वस्त्र धारण किए थे, और गले में रुद्राक्ष की माला शोभा दे रही थी। उनकी आभा से संपूर्ण वातावरण प्रकाशमय था।
करणी माता ने अपने भतीजे पूंजाजी को बुलाया और कहा, "पूंजा, अब मेरा समय निकट आ रहा है। मैं तीर्थयात्रा पर जा रही हूँ। तुम लोगों को धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलना है। सदैव निर्बलों की सहायता करना और दीन दुखियों का सहारा बनना।" पूंजाजी ने नम आँखों से कहा, "माताजी, आपके बिना हम कैसे रहेंगे? आपकी छत्रछाया हमेशा हमारे ऊपर बनी रहे।" करणी माता ने मुस्कराकर कहा, "मैं सदैव तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हारे हृदय में निवास करती हूँ। बस, सच्चे मन से मुझे याद करना।"
रहस्यमय अंतर्धान
करणी माता ने अपने कुछ विश्वस्त सेवकों के साथ तीर्थयात्रा आरम्भ की। उन्होंने अनेक पवित्र स्थलों के दर्शन किए, गरीबों को दान दिया और जरूरतमंदों की सहायता की। एक दिन, वे देशनोक से कुछ दूर एक झील के किनारे पहुंचीं। उन्होंने अपने साथियों से कहा कि वे कुछ देर के लिए विश्राम करना चाहती हैं। करणी माता झील के किनारे बैठीं और ध्यान में लीन हो गईं। कुछ समय पश्चात, जब सेवक उन्हें देखने गए, तो वे वहां नहीं थीं।
करणी माता का कहीं पता नहीं चला। लोगों ने उन्हें हर जगह ढूंढा, लेकिन वे नहीं मिलीं। कुछ लोगों का कहना था कि वे परमात्मा में लीन हो गईं, तो कुछ ने कहा कि वे किसी गुप्त स्थान पर तपस्या करने चली गई हैं। उनकी लापता होने की घटना आज भी एक रहस्य बनी हुई है। भक्तों का मानना है कि करणी माता आज भी सूक्ष्म रूप से अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
भक्ति और आस्था का महत्त्व
करणी माता के विदा होने के बाद, उनके भक्तों की आस्था और भी दृढ़ हो गई। उन्होंने करणी माता के सिद्धांतों का पालन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। करणी माता की कहानी हमें सिखाती है कि भक्ति और आस्था में कितनी शक्ति होती है। यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें सदैव दूसरों की सहायता करनी चाहिए और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। करणी माता भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी, हमारी प्रेरणा बनी रहेंगी। उनकी कथा युगों युगों तक भक्तों को प्रेरित करती रहेगी, आस्था और विश्वास की ज्योति जलाए रखेगी। इस कथा का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय का आरंभ है, जहां भक्ति और विश्वास की शक्ति अनंत काल तक विद्यमान रहेगी।
अध्याय 7 का सार: करणी माता तीर्थयात्रा पर जाती हैं और रहस्यमय ढंग से गायब हो जाती हैं। उनकी विदाई भक्तों की आस्था को और मजबूत करती है, और यह अध्याय भक्ति और विश्वास के महत्व को उजागर करता है। करणी माता का जीवन हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देता है।
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