करणी माता कथा – अध्याय 5: राठौड़ों से सम्बन्ध

राठौड़ों से सम्बन्ध
देशनोक की स्थापना के पश्चात, करणी माता की कीर्ति चारों ओर फैलने लगी। उनकी सिद्धियों और त्याग की कथाएँ जन-जन तक पहुंचीं। इसी दौरान, राव जोधा, मारवाड़ के राठौड़ शासक, अपनी खोई हुई सल्तनत को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्हें करणी माता की महिमा का पता चला और वे मदद की आस लेकर देशनोक की ओर चल पड़े।
राव जोधा का आगमन
रेतीले टीलों को पार करते हुए, राव जोधा अपने कुछ विश्वस्त सैनिकों के साथ देशनोक पहुंचे। धूप तेज थी और हवा में रेत उड़ रही थी, लेकिन राव जोधा के मन में एक आशा की किरण थी। वे करणी माता के दर्शनों के लिए व्याकुल थे। उनके चेहरे पर हार और निराशा के भाव स्पष्ट थे, क्योंकि वे कई वर्षों से अपनी पैतृक भूमि को वापस पाने के लिए जूझ रहे थे। उनके मन में करणी माता के प्रति श्रद्धा और आस्था का भाव उमड़ रहा था, और वे यह जानने को उत्सुक थे कि क्या वे उन्हें मार्गदर्शन दे पाएंगी।
राव जोधा ने मन ही मन प्रार्थना की, "हे माता, मेरी रक्षा करो। मुझे अपनी खोई भूमि पुनः प्राप्त करने में सहायता करो। मैं शरण में आया हूँ, मेरी लाज रखना।"
आशीर्वाद और मेहरानगढ़ की नींव
जब राव जोधा करणी माता के सामने पहुंचे, तो माता ने उन्हें देखते ही पहचान लिया। उन्होंने राव जोधा को स्नेह से अपने पास बुलाया और कहा,"जोधा, तू निराश मत हो। तेरा समय आने वाला है। तुम्हें अपनी भूमि वापस मिलेगी।" करणी माता ने राव जोधा को आशीर्वाद दिया और भविष्यवाणी की कि उनका वंश सदैव मारवाड़ पर शासन करेगा। उन्होंने राव जोधा को एक नया किला बनवाने का आदेश दिया, जो शत्रुओं से अभेद्य होगा। उसी किले की नींव रखने के लिए, करणी माता स्वयं राव जोधा के साथ गईं। 1459 में, मेहरानगढ़ किले की नींव करणी माता के हाथों से रखी गई। यह किला आज भी राठौड़ों की शक्ति और करणी माता के आशीर्वाद का प्रतीक है।
करणी माता के आशीर्वाद से राव जोधा का आत्मविश्वास फिर से जाग उठा। उन्होंने माता के वचनों पर पूर्ण विश्वास किया और अपनी सेना को संगठित करना शुरू कर दिया। माता की कृपा से उन्हें हर युद्ध में विजय प्राप्त हुई और धीरे-धीरे उन्होंने अपनी खोई हुई सल्तनत को पुनः प्राप्त कर लिया। मेहरानगढ़ किला राठौड़ों की शक्ति का केंद्र बन गया और आज भी उनके गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है।
राठौड़ों का मार्गदर्शन
करणी माता ने सिर्फ राव जोधा को ही नहीं, बल्कि पूरे राठौड़ वंश को समय-समय पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने उन्हें धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वे उनकी कुलदेवी के रूप में पूजी जाने लगीं। करणी माता ने राठौड़ों से कहा कि वे हमेशा गरीबों और असहायों की मदद करें। उन्होंने उन्हें गौ रक्षा का महत्व समझाया और हमेशा अपनी प्रजा का ध्यान रखने का आदेश दिया। करणी माता के इन उपदेशों ने राठौड़ वंश को एक शक्तिशाली और न्यायप्रिय शासक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगे, हम देखेंगे कि किस प्रकार करणी माता के आशीर्वाद से देशनोक में चूहों का बसेरा हो गया और वे पूजनीय बन गए।
अध्याय 5 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि करणी माता ने किस प्रकार राव जोधा को आशीर्वाद दिया और मेहरानगढ़ किले की नींव रखने में उनकी सहायता की। करणी माता का आशीर्वाद राठौड़ों के लिए शक्ति और न्याय का मार्गदर्शक बना। यह अध्याय यह सीख देता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और अच्छे कर्मों से ईश्वर की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
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