वामन अवतार कथा – अध्याय 6: तीन पगों में ब्रह्माण्ड व्याप्त | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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वामन अवतार कथा – अध्याय 6: तीन पगों में ब्रह्माण्ड व्याप्त

Tilak Kathayein12 Apr 202641 views📖 1 min read
वामन अवतार कथा
वामन अवतार कथा का अध्याय 6 — तीन पगों में ब्रह्माण्ड व्याप्त। वामन पहले पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग और तीसरे पग के लिए महाबली से पूछते हैं।

तीन पगों में ब्रह्माण्ड व्याप्त

शुक्राचार्य की चेतावनी को अनसुना करते हुए, राजा महाबली ने वामन ब्राह्मण को दान देने का संकल्प लिया। गुरु की बातों का उल्लंघन एक भारी भूल साबित होने वाली थी, क्योंकि वह ब्राह्मण बालक वास्तव में भगवान विष्णु ही थे, जो अपने भक्तों को बचाने और धर्म की स्थापना के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।

विराट रूप का प्रदर्शन

जैसे ही राजा महाबली ने वामन को दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, वामन का शरीर तेज़ी से बढ़ने लगा। उनकी काया इतनी विशाल हो गई कि देखते ही देखते उन्होंने पूरे महल को ढक लिया। राजा और उनके दरबारी आश्चर्य और भय से कांप उठे। अब वह बालक नहीं रहे, बल्कि एक प्रकाशमय, असीम शक्ति से परिपूर्ण भगवान विष्णु थे। उनका दिव्य तेज सभी को चकाचौंध कर रहा था। राजा महाबली ने अपनी आँखें बंद कर लीं, पर अपने हृदय में उस अद्भुत रूप की छवि को अंकित कर लिया। “हे प्रभु,” राजा ने मन ही मन कहा, “आपने मुझे दर्शन दिए, मैं धन्य हो गया।”

“महाबली,” विष्णु ने गर्जीली आवाज में कहा, “तुमने मुझे तीन पग भूमि दान करने का वचन दिया है। अब मुझे वह भूमि प्राप्त करने दो।” उनका स्वर ऐसा था जैसे बादलों की गर्जना हो, जिसने सब कुछ हिला दिया। देवता भी आकाश से यह अद्भुत दृश्य देख रहे थे, और वे विष्णु भगवान की जय-जयकार कर रहे थे। राजा महाबली, हालांकि थोड़ा डरे हुए थे, फिर भी अपने वचन पर अटल रहे।

पृथ्वी और स्वर्ग का माप

भगवान विष्णु ने अपना पहला पग बढ़ाया, और देखते ही देखते उन्होंने पूरी पृथ्वी को माप लिया। पर्वत, नदियाँ, सागर, वन – सब कुछ उनके पैर के नीचे समा गया। फिर उन्होंने दूसरा पग रखा, और इस बार उन्होंने स्वर्गलोक को भी नाप लिया। देवलोक, इंद्र का सिंहासन, सब कुछ उनके दूसरे पग में आ गया। अब प्रश्न यह था कि वह अपना तीसरा पग कहाँ रखेंगे? राजा महाबली और उनके दरबारी अचंभे में थे। उनके पास कोई उत्तर नहीं था, कोई उपाय नहीं था।

भगवान विष्णु की कृपा अपार थी। उन्होंने महाबली को यह अवसर दिया कि वे अपने भक्त बनें और अपने अहंकार का त्याग करें। यह केवल भूमि का माप नहीं था, बल्कि हृदय का माप था, समर्पण का माप था। भगवान देखना चाहते थे कि क्या महाबली अपने वचन के प्रति कितने सच्चे हैं, और क्या वे अपने अहंकार को त्यागने के लिए तैयार हैं?

महाबली का समर्पण

जब भगवान विष्णु ने पूछा कि वे अपना तीसरा पग कहाँ रखें, तो राजा महाबली ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सिर झुका दिया। उन्होंने कहा, "हे प्रभु, अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है। कृपया अपना तीसरा पग मेरे सिर पर रखें।" उनकी आँखें भय से नहीं, श्रद्धा से भरी हुई थीं। उन्होंने अपना पूरा अस्तित्व भगवान को समर्पित कर दिया। उन्होंने जान लिया था कि सच्चा दान भौतिक वस्तुओं का नहीं, बल्कि स्वयं का समर्पण है।

राजा महाबली का यह समर्पण देखकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने भक्त की सच्चाई और त्याग को पहचाना। यह उनका परीक्षण था, और महाबली इसमें सफल हुए थे। भगवान विष्णु ने विनम्रता से महाबली के सर पर अपना तीसरा पग रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया, पर उन्हें यह आशीर्वाद भी दिया कि वे वहां राज करेंगे और उनकी कीर्ति युगों-युगों तक अमर रहेगी।

अध्याय 6 का सार: इस अध्याय में भगवान विष्णु ने वामन अवतार में अपने विराट रूप का प्रदर्शन किया और दो पगों में पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया। राजा महाबली ने अपना सबकुछ समर्पित कर दिया, जिससे यह सीख मिलती है कि सच्चा दान और भक्ति अहंकार का त्याग करने में है। अगले अध्याय में महाबली को आशीर्वाद और पाताल लोक में उनके राज्य की स्थापना का वर्णन होगा।

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