12 Jyotirlingas

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

Tilak Kathayein06 Sep 202636 views
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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

📋 विषय सूची

  1. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: परिचय, आध्यात्मिक महत्ता एवं महत्वपूर्ण तथ्य
  2. पौराणिक कथा: राजा मांधाता, विंध्याचल पर्वत की तपस्या और 'ॐ' द्वीप का रहस्य
  3. एक ज्योतिर्लिंग, दो स्वरूप: ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (अमलेश्वर) का पावन रहस्य
  4. ओंकारेश्वर का इतिहास, परमार राजवंश एवं अहिल्याबाई होल्कर का योगदान
  5. नागर स्थापत्य शैली, पांच-मंजिला मंदिर और नक्काशीदार सभा मंडप
  6. मोक्षदायिनी मां नर्मदा, कावेरी संगम और ओंकार पर्वत परिक्रमा
  7. दैनिक दर्शन समय सारणी, आरती विवरण एवं विशेष अभिषेक व्यवस्था
  8. प्रमुख धार्मिक उत्सव: महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और नर्मदा जयंती
  9. आगंतुक नियम: नौका विहार, वेशभूषा, सुरक्षा और फोटोग्राफी नियम
  10. ओंकारेश्वर यात्रा गाइड: कैसे पहुँचें और यात्रा का सर्वश्रेष्ठ समय
  11. 1-दिन का ओंकारेश्वर तीर्थ यात्रा कार्यक्रम (Detailed Itinerary)
  12. श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास घूमने की जगह (Nearby Places to Visit)
  13. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़े 20 रोचक एवं ऐतिहासिक तथ्य
  14. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
  15. निष्कर्ष एवं अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का परिचय एवं महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पुण्यसलिला मां नर्मदा के पावन तट पर स्थित श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म के सबसे अलौकिक और जाग्रत तीर्थस्थलों में से एक है। यह भगवान शिव के द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ ज्योतिर्लिंग है। इस पावन तीर्थ का नामकरण ओंकार (प्रणव नाद 'ॐ') के आधार पर हुआ है।

इस धाम की सबसे विस्मयकारी और प्राकृतिक विशेषता यह है कि नर्मदा नदी की दो धाराओं के बीच स्थित मांधाता द्वीप (शिवपुरी द्वीप) का भौगोलिक आकार आकाश से देखने पर साक्षात पवित्र 'ॐ' (Om) की आकृति जैसा दिखाई देता है। प्रकृति और अध्यात्म का ऐसा दुर्लभ समन्वय पूरे विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिलता।

आध्यात्मिक महत्ता: शिव पुराण के अनुसार, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दो स्वरूपों में विभाजित है नर्मदा के उत्तरी तट (मांधाता द्वीप) पर श्री ओंकारेश्वर और दक्षिणी तट पर श्री ममलेश्वर (अमलेश्वर)। इन दोनों स्वरूपों के दर्शन व नर्मदा जल से अभिषेक के उपरांत ही चतुर्थ ज्योतिर्लिंग की यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

ओंकारेश्वर मंदिर: एक नजर में (Quick Facts)

विवरण जानकारी
मंदिर का नाम श्री ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग (Omkareshwar Temple)
ज्योतिर्लिंग क्रम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (4th Jyotirlinga)
मुख्य आराध्य देव भगवान शिव (ओंकारेश्वर / सदाशिव)
भौगोलिक विशिष्टता प्राकृतिक रूप से 'ॐ' आकार का मांधाता द्वीप
स्थान एवं राज्य मांधाता (ओंकारेश्वर), खंडवा जिला, मध्य प्रदेश, भारत
पवित्र नदियां मां नर्मदा एवं कावेरी नदी (नर्मदा की उपधारा) का पावन संगम
स्थापत्य शैली नागर एवं उत्तर-भारतीय पाषाण शैली (पंच-मंजिला देवालय)
प्रमुख आकर्षण एकात्म धाम (आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा), झूला पुल
मंदिर खुलने का समय प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
प्रबंधन निकाय श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट एवं मध्य प्रदेश शासन

पौराणिक कथा: राजा मांधाता, विंध्याचल पर्वत की तपस्या और 'ॐ' द्वीप का रहस्य

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य से जुड़ी दो अत्यंत पावन और प्रसिद्ध पौराणिक कथाएं हैं:

1. विंध्याचल पर्वत का घोर तप और वरदान

एक बार देवर्षि नारद विंध्याचल पर्वत पर पधारे और उन्होंने सुमेरु पर्वत की भव्यता की प्रशंसा की। इससे विंध्याचल को अपने लघु होने का भान हुआ। अपने अहंकार का शमन करने और आत्मिक उन्नति के लिए विंध्याचल पर्वत नर्मदा तट पर आया और उसने छह माह तक मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की।

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव 'ओंकार' स्वरूप में प्रकट हुए। विंध्याचल की प्रार्थना पर भगवान शिव ने सदा के लिए इस पावन धरा पर निवास करने का वरदान दिया और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

2. इक्ष्वाकु वंशीय राजा मांधाता की तपस्या

सूर्यवंश के प्रतापी चक्रवर्ती राजा मांधाता (भगवान श्रीराम के पूर्वज) ने इसी पर्वत पर घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। महादेव ने उनके अनुरोध पर इसी पर्वत पर अपना स्थायी वास बनाया। राजा मांधाता के नाम पर ही इस द्वीप का नाम 'मांधाता द्वीप' पड़ा।


एक ज्योतिर्लिंग, दो स्वरूप: ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (अमलेश्वर) का पावन रहस्य

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर की परंपरा सबसे अनूठी है क्योंकि यहाँ एक ही ज्योतिर्लिंग दो अलग-अलग मंदिरों में विभक्त होकर पूजनीय है:

  • 1. श्री ओंकारेश्वर (मांधाता द्वीप): यह नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर द्वीप के ऊपर स्थित मुख्य मंदिर है, जहाँ स्वयंभू शिवलिंग प्राकृतिक रूप से स्थापित है।
  • 2. श्री ममलेश्वर / अमलेश्वर (दक्षिणी तट): यह नर्मदा नदी के मुख्य मैदानी तट पर स्थित 10वीं शताब्दी का एक अत्यंत भव्य और नक्काशीदार प्राचीन पाषाण मंदिर है। इसे 'अमरेश्वर' भी कहा जाता है।

धार्मिक नियम: शिव पुराण के अनुसार, विंध्याचल की तपस्या से प्रसन्न होकर जब शिवजी प्रकट हुए, तो देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर ज्योतिर्लिंग के दो अंश हुए एक 'ओंकारेश्वर' (प्रणव लिंग) और दूसरा 'ममलेश्वर' (पार्थिव लिंग)। इसलिए, जब तक श्रद्धालु दोनों मंदिरों के दर्शन नहीं कर लेते, तब तक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की तीर्थयात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।


ओंकारेश्वर का इतिहास, परमार राजवंश एवं अहिल्याबाई होल्कर का योगदान

ओंकारेश्वर का इतिहास सदियों पुराना है। 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान मालवा के परमार राजाओं ने इस क्षेत्र में अनेक भव्य पाषाण मंदिरों और घाटों का निर्माण कराया।

1. मुस्लिम आक्रमण और जीर्णोद्धार

मध्यकाल में 13वीं शताब्दी में सुल्तान महमूद खिलजी और अन्य आक्रांताओं ने मंदिर के ऊपरी हिस्सों को क्षतिग्रस्त किया था। इसके बावजूद स्थानीय भील राजाओं और बाद में होल्कर शासकों ने मंदिर की रक्षा की।

2. पुण्यश्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर का योगदान

18वीं शताब्दी में मालवा की धर्मपरायण शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने यहाँ प्रतिदिन 'पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं नित्य महापूजा' की परंपरा प्रारंभ कराई, जिसके तहत प्रतिदिन 22 ब्राह्मणों द्वारा सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका पूजन और नर्मदा में विसर्जन किया जाता है। यह परंपरा आज भी जारी है।


नागर स्थापत्य शैली, पांच-मंजिला मंदिर और नक्काशीदार सभा मंडप

श्री ओंकारेश्वर मंदिर नागर स्थापत्य शैली में निर्मित पांच मंजिला (Five-Storeyed) एक विशाल पाषाण मंदिर है:

  • प्रथम तल (भूतल - गर्भगृह): मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यहाँ शिवलिंग एक छोटे गड्ढे (जलहरी) के रूप में है, जिसके चारों ओर निरंतर जल भरा रहता है।
  • द्वितीय तल: यहाँ श्री महाकालेश्वर का विग्रह स्थापित है।
  • तृतीय तल: इस तल पर श्री सिद्धनाथ (सिद्धेश्वर) महादेव स्थापित हैं।
  • चतुर्थ तल: यहाँ श्री गुप्तेश्वर महादेव की पूजा होती है।
  • पंचम तल: सबसे ऊपरी तल पर श्री ध्वजेश्वर महादेव विराजमान हैं।
  • सभा मंडप के 60 पाषाण स्तंभ: मंदिर के सभा मंडप की छत लगभग 60 विशाल, नक्काशीदार और कलात्मक पाषाण स्तंभों पर टिकी है, जिन पर देवी-देवताओं, यक्षों और अप्सराओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं।

मोक्षदायिनी मां नर्मदा, कावेरी संगम और ओंकार पर्वत परिक्रमा

सनातन धर्म में मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं जिनकी संपूर्ण परिक्रमा की जाती है। ओंकारेश्वर नर्मदा परिक्रमा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।

1. नर्मदा और कावेरी संगम

मांधाता द्वीप के पास नर्मदा नदी से एक छोटी उपधारा अलग होकर द्वीप का चक्कर लगाकर पुनः मुख्य नर्मदा में मिलती है, जिसे 'कावेरी संगम' कहा जाता है। इस संगम पर स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

2. ओंकार पर्वत परिक्रमा (Mandhata Island Parikrama)

मांधाता पर्वत की परिक्रमा का मार्ग लगभग 7 से 8 किलोमीटर लंबा है। इस परिक्रमा मार्ग में अनेक प्राचीन और रहस्यमयी देवालय स्थित हैं:

  • ऋणमुक्तेश्वर महादेव: जहाँ चने की दाल चढ़ाने से व्यक्ति पितृ और सांसारिक ऋणों से मुक्त होता है।
  • गौरी सोमनाथ मंदिर: यहाँ एक विशालकाय 6 फीट ऊंचा काला पाषाण शिवलिंग है।
  • सिद्धनाथ मंदिर: 13वीं शताब्दी का उत्कृष्ट नक्काशीदार स्थापत्य स्मारक।
  • कुबेर भंडारी मंदिर: धन के अधिपति कुबेर देव का प्राचीन मंदिर।

दैनिक दर्शन समय सारणी, आरती विवरण एवं विशेष अभिषेक व्यवस्था

श्री ओंकारेश्वर मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक निर्धारित वैदिक क्रम के अनुसार दर्शन और आरतियां संपन्न होती हैं।

दैनिक आरती / अनुष्ठान समय सारणी विशेष विवरण
मंदिर कपाट खुलना एवं मंगला आरती प्रातः 5:00 – 5:30 बजे प्रातःकालीन अभिषेक एवं प्रथम मंगला दर्शन
सामान्य दर्शन एवं जलाभिषेक प्रातः 5:30 – दोपहर 12:00 बजे श्रद्धालुओं द्वारा नर्मदा जल से अभिषेक व पूजन
मध्याह्न राजभोग आरती दोपहर 12:00 – 12:30 बजे भगवान को विशेष राजभोग समर्पण
मध्याह्न विश्राम (कपाट बंद) दोपहर 12:30 – 1:30 बजे मंदिर के कपाट अल्प समय के लिए बंद
संध्या श्रृंगार दर्शन दोपहर 1:30 – सायं 7:30 बजे पुनः सामान्य दर्शन एवं विशेष पूजन
सायंकालीन संध्या महाआरती सायं 7:30 – 8:30 बजे दीपों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भव्य आरती
शयन आरती एवं चौपड़ पासा बिछाना रात्रि 9:00 – 9:30 बजे शिव-पार्वती शयन हेतु चौपड़ बिछाने की पावन परंपरा
कपाट बंद रात्रि 10:00 बजे रात्रि विश्राम

चौपड़-पासा (Chausar) का अलौकिक रहस्य: प्रतिदिन शयन आरती के समय गर्भगृह में भगवान शिव और माता पार्वती के शयन के लिए सेज सजाई जाती है और खेलने के लिए चौपड़-पासा (चौसर) की बिसात बिछाई जाती है। मान्यता है कि रात्रि में शिव-पार्वती यहाँ चौपड़ खेलते हैं, क्योंकि सुबह कपाट खुलने पर पासों की स्थिति बदली हुई मिलती है।


प्रमुख धार्मिक उत्सव: महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और नर्मदा जयंती

  • महाशिवरात्रि महापर्व: इस दिन देश भर से लाखों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुँचते हैं। मंदिर 24 घंटे खुला रहता है और चारों प्रहर की महापूजा संपन्न होती है।
  • श्रावण मास एवं सवारी: सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर की पालकी यात्रा (सवारी) नौकाओं में नर्मदा नदी के जलमार्ग से निकाली जाती है, जो अत्यंत मनोहारी होती है।
  • नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी): इस दिन मां नर्मदा के दोनों तटों पर लाखों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और भव्य महाआरती होती है।
  • कार्तिक पूर्णिमा मेला: इस अवसर पर पाँच दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है और श्रद्धालु दीपदान करते हैं।

आगंतुक नियम: नौका विहार, वेशभूषा, सुरक्षा और फोटोग्राफी नियम

  • ड्रेस कोड एवं आचरण: मंदिर में शालीन और पारंपरिक वस्त्र पहनना अनिवार्य है। गर्भगृह में विशेष जलाभिषेक हेतु पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-सूट उपयुक्त हैं।
  • नर्मदा पार करने के साधन: मुख्य भूमि से मांधाता द्वीप जाने के लिए दो विकल्प हैं:
    • झूला पुल (Suspension Bridges): पैदल यात्रियों के लिए दो मजबूत सस्पेंशन ब्रिज बने हैं।
    • नाव सेवा (Boating): सरकारी लाइसेंस प्राप्त नावों द्वारा नर्मदा पार की जा सकती है (नाव में लाइफ जैकेट अवश्य पहनें)।
  • फोटोग्राफी प्रतिबंध: मुख्य गर्भगृह के भीतर मोबाइल फोन, कैमरा ले जाना और वीडियोग्राफी करना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
  • नर्मदा स्नान सुरक्षा: नर्मदा नदी में निर्धारित घाटों (नागर घाट, कोटितीर्थ घाट, चक्रतीर्थ घाट) पर ही स्नान करें। गहरे पानी और तेज बहाव की ओर न जाएं।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे पहुंचें? (How to Reach Omkareshwar)

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पुण्यसलिला मां नर्मदा के तट पर स्थित है। यहाँ सड़क, रेल और हवाई मार्ग द्वारा सुगमता से पहुँचा जा सकता है।

1️⃣ हवाई मार्ग (By Air) – निकटतम हवाई अड्डा

ओंकारेश्वर पहुँचने के लिए सबसे प्रमुख एवं निकटतम एयरपोर्ट इंदौर में स्थित है:

  • देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर (IDR): मंदिर से लगभग 77 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर और कोलकाता जैसे सभी प्रमुख महानगरों से नियमित सीधी उड़ानों से जुड़ा है।

✈️ एयरपोर्ट से मंदिर कैसे पहुंचें?

  • इंदौर एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा सिमरोल और बड़वाह मार्ग (NH-347BG) होते हुए लगभग 2 से 2.5 घंटे में ओंकारेश्वर पहुँचा जा सकता है।
  • टैक्सी/कैब किराया: इंदौर एयरपोर्ट से ओंकारेश्वर के लिए वन-वे प्राइवेट कैब का किराया लगभग ₹1,800 से ₹2,800 (सेडान/एसयूवी के अनुसार) रहता है।
  • इंदौर बस स्टैंड (सरवटे/नवलखा) से ओंकारेश्वर के लिए हर 30 मिनट में बसें उपलब्ध रहती हैं।

2️⃣ रेल मार्ग (By Train) – निकटतम रेलवे स्टेशन

ओंकारेश्वर तीर्थ के समीपवर्ती रेलवे स्टेशन और प्रमुख जंक्शन निम्नलिखित हैं:

🚆 मुख्य रेलवे स्टेशन और दूरी

  1. सनावद रेलवे स्टेशन (SWD): मंदिर से मात्र 12 किलोमीटर दूर (लोकल व मेमू ट्रेनों के लिए निकटतम स्टेशन)।
  2. खंडवा जंक्शन (KNW): मुख्य और बड़ा रेलवे जंक्शन, जो मंदिर से लगभग 70 से 72 किलोमीटर दूर स्थित है।
  3. इंदौर जंक्शन (INDB): लगभग 80 किलोमीटर दूर (उत्तर व पश्चिम भारत की अधिकांश ट्रेनों का मुख्य टर्मिनल)।

🚖 रेलवे स्टेशन से मंदिर कैसे पहुंचें?

  • खंडवा और सनावद रेलवे स्टेशन के बाहर से ओंकारेश्वर के लिए नियमित बसें, शेयरिंग जीप और प्राइवेट टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं।
  • किराया: सनावद से ऑटो/टैक्सी ₹200–₹400, जबकि खंडवा से कैब का किराया लगभग ₹1,500–₹2,200 तक रहता है।
  • इंदौर रेलवे स्टेशन से ओंकारेश्वर के लिए सीधी बसें (किराया: ₹100–₹160) और कैब सेवाएं निरंतर उपलब्ध हैं।

3️⃣ सड़क मार्ग (By Road) – प्रमुख मार्ग, दूरी और बस सेवा

🚌 निकटतम बस स्टैंड

ओंकारेश्वर बस स्टैंड / मोरटक्का बस स्टैंड: मुख्य मंदिर के समीप बस स्टैंड स्थित है, जबकि मोरटक्का चौराहा लगभग 12 किमी दूर मुख्य हाईवे पर स्थित है।

🚗 प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग दूरी एवं समय

  1. इंदौर से: 80 किमी (लगभग 2 से 2.5 घंटे)
  2. खंडवा से: 70 किमी (लगभग 1.5 से 2 घंटे)
  3. उज्जैन से (महाकाल-ओंकारेश्वर सर्किट): 140 किमी (लगभग 3.5 घंटे)
  4. महेश्वर से: 65 किमी (लगभग 1.5 घंटे)
  5. भोपाल से: 260 किमी (लगभग 5 से 6 घंटे)

🚌 बस सेवा एवं किराया

  • मध्य प्रदेश राज्य परिवहन और निजी ऑपरेटरों की बसें इंदौर (सरवटे बस स्टैंड), उज्जैन और खंडवा से प्रातः 5:00 बजे से सायं तक लगातार चलती हैं।
  • बस किराया: इंदौर से ₹100–₹160, उज्जैन से ₹200–₹280 तक।

ओंकारेश्वर जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)

अक्टूबर से मार्च (सर्दियों का मौसम): ओंकारेश्वर यात्रा के लिए सबसे उत्तम और सुखद समय माना जाता है। इस दौरान मौसम 12°C से 28°C के मध्य रहता है, जिससे मांधाता पर्वत की परिक्रमा और नर्मदा नौकायन बहुत आनंददायक होता है।

श्रावण मास (सावन) एवं महाशिवरात्रि: यदि आप भगवान ओंकारेश्वर की पावन जल-सवारी (पालकी यात्रा) और विशेष नर्मदा महाआरती का दर्शन करना चाहते हैं, तो सावन या शिवरात्रि पर अवश्य जाएँ (इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है)।


1-दिन का ओंकारेश्वर तीर्थ यात्रा कार्यक्रम (Detailed Itinerary)

  1. प्रातः 6:00 – 7:30 बजे (नर्मदा स्नान एवं नौका विहार): कोटितीर्थ या नागर घाट पर पवित्र नर्मदा नदी में स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
  2. प्रातः 7:30 – 10:00 बजे (श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन): झूला पुल पार कर मांधाता द्वीप स्थित मुख्य ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक करें।
  3. सुबह 10:30 – 12:00 बजे (श्री ममलेश्वर मंदिर दर्शन): नदी के दूसरे छोर पर स्थित ऐतिहासिक श्री ममलेश्वर (अमलेश्वर) ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर अपनी ज्योतिर्लिंग यात्रा पूर्ण करें।
  4. दोपहर 12:30 – 2:00 बजे (भोजन एवं विश्राम): स्थानीय भोजनालय या ट्रस्ट के अन्नक्षेत्र में शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  5. दोपहर 2:30 – 4:30 बजे (एकात्म धाम दर्शन): मांधाता पर्वत पर स्थित आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' और अद्वैत लोक का भ्रमण करें।
  6. शाम 5:00 – 6:30 बजे (कावेरी संगम एवं नौका विहार): नाव से कावेरी संगम, ओंकारेश्वर बांध और नर्मदा के विहंगम सूर्यास्त का आनंद लें।
  7. सायं 7:30 – 8:30 बजे (संध्या महाआरती): नर्मदा घाट पर होने वाली भव्य संध्या महाआरती में सम्मिलित हों और दीपदान करें।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास घूमने की जगह (Nearby Places to Visit)

1️⃣ श्री ममलेश्वर (अमलेश्वर) ज्योतिर्लिंग – 500 मीटर (नर्मदा के दक्षिणी तट पर)

  • धार्मिक अनिवार्यता: 10वीं शताब्दी का उत्कृष्ट नक्काशीदार पाषाण मंदिर। शिव पुराण के अनुसार ओंकारेश्वर और ममलेश्वर एक ही ज्योतिर्लिंग के दो पावन अंश हैं; इसके दर्शन किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है।
  • स्थापत्य: इसके पाषाण स्तंभों पर प्राचीन संस्कृत श्लोक और सुंदर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं।

2️⃣ एकात्म धाम (Statue of Oneness) – 2 किमी

  • वैश्विक आकर्षण: मांधाता पर्वत के शिखर पर स्थापित जगतगुरु आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमा
  • विशेषता: यह परिसर अद्वैत वेदांत दर्शन, संग्रहालय और शांत ध्यान केंद्रों का एक विशाल अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र है।

3️⃣ ओंकारेश्वर झूला पुल (Suspension Bridges) – मंदिर मार्ग

  • प्रमुख आकर्षण: मुख्य भूमि को मांधाता द्वीप से जोड़ने वाले दो विशाल सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल)।
  • इन पुलों पर चलते हुए नीचे बहती कल-कल नर्मदा और दोनों किनारों पर बने प्राचीन मंदिरों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

4️⃣ नर्मदा-कावेरी पावन संगम – 1.5 किमी (द्वीप का अंतिम छोर)

  • पौराणिक महत्व: नर्मदा नदी की एक उपधारा (कावेरी) द्वीप का चक्कर लगाकर पुनः मुख्य नर्मदा में मिलती है।
  • इस पावन संगम पर नौका द्वारा जाकर पवित्र डुबकी लगाना और दीपदान करना अत्यंत मोक्षदायी माना जाता है।

5️⃣ सिद्धनाथ मंदिर (Siddhanath Temple) – 2.5 किमी (मांधाता पर्वत पर)

  • वास्तुकला: 13वीं शताब्दी का एक अद्भुत पाषाण देवालय, जो एक ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है।
  • इसके चबूतरे पर 50 से अधिक हाथियों की बारीक नक्काशीदार पंक्तियां बनी हैं, जो परमार कालीन मूर्तिकला का बेजोड़ नमूना हैं।

6️⃣ गौरी सोमनाथ मंदिर (Gauri Somnath Temple) – 1.5 किमी

  • विशाल शिवलिंग: इस प्राचीन मंदिर में लगभग 6 फीट ऊंचा काले पाषाण का विशाल शिवलिंग स्थापित है।
  • लोकमान्यता है कि प्राचीन काल में यह पाषाण भविष्य का प्रतिबिंब दिखाता था। इसके सामने एक विशाल नंदी प्रतिमा भी स्थापित है।

7️⃣ ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर – 1 किमी (परिक्रमा मार्ग)

  • मान्यता: ओंकार पर्वत के परिक्रमा मार्ग पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर जहाँ शिवलिंग पर चने की दाल और जल चढ़ाने से साधक को सभी प्रकार के भौतिक व पितृ ऋणों से मुक्ति मिलती है।

8️⃣ ऐतिहासिक अहिल्या घाट एवं महेश्वर किला (Maheshwar) – 65 किमी

  • सांस्कृतिक धरोहर: देवी अहिल्याबाई होल्कर की ऐतिहासिक राजधानी महेश्वर, जो नर्मदा किनारे स्थित भव्य महेश्वर किले, नक्काशीदार पाषाण छतरियों और विश्व प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों के लिए जाना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

मंदिर प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है। दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक भोग विश्राम के लिए कपाट बंद रहते हैं।

2. क्या ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों के दर्शन करना जरूरी है?

हाँ, शिव पुराण के अनुसार ओंकारेश्वर और ममलेश्वर एक ही ज्योतिर्लिंग के दो पावन अंश हैं। दोनों मंदिरों के दर्शन और पूजन के बाद ही चतुर्थ ज्योतिर्लिंग यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

3. ओंकारेश्वर पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन कौन सा है?

निकटतम हवाई अड्डा इंदौर एयरपोर्ट (85 किमी) है। निकटतम बड़ा रेलवे जंक्शन इंदौर (80 किमी) और खंडवा (70 किमी) है।

4. क्या ओंकारेश्वर में वीआईपी (VIP) दर्शन टिकट उपलब्ध है?

हाँ, श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा शीघ्र दर्शन (VIP Darshan) के लिए निर्धारित शुल्क का पास काउंटर और आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध रहता है।

5. मांधाता द्वीप की परिक्रमा कितनी लंबी है और इसमें कितना समय लगता है?

ओंकार पर्वत (मांधाता द्वीप) की परिक्रमा लगभग 7 से 8 किलोमीटर की है। पैदल चलने पर इसे पूरा करने में लगभग 2 से 3 घंटे का समय लगता है।


निष्कर्ष एवं अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंग

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग केवल एक धार्मिक देवालय नहीं, बल्कि साक्षात प्रकृति के गर्भ में रचा गया 'प्रणव नाद ॐ' का शाश्वत स्वरूप है। मां नर्मदा की कल-कल बहती निर्मल धारा, मांधाता द्वीप की आध्यात्मिक शांति और मंदिर के शिखरों से गूंजता "हर हर नर्मदे, हर हर महादेव" का जयघोष हर साधक की चेतना को परमात्मा से जोड़ देता है।

यदि आप मध्य प्रदेश के पावन तीर्थों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो महाकाल की नगरी उज्जैन के साथ ओंकारेश्वर धाम के दर्शन आपके जीवन को धन्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर देंगे।

द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अन्य प्रमुख पावन धामों के बारे में पढ़ें:

कावेरी नर्मदायोश्च पवित्रे संगमे शुभे। ओंकारनाम विख्यातं ज्योतिर्लिंगं नमाम्यहम्॥
भगवान ओंकारेश्वर महादेव और मां नर्मदा आप सभी के जीवन से कष्टों और संतापों का नाश कर सुख, शांति और मोक्ष प्रदान करें।

ॐ नमः शिवाय। नर्मदे हर! हर हर महादेव! 🙏🔱🚩🌊

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आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

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