सीता कथा – अध्याय 7: हनुमान की खोज | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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सीता कथा – अध्याय 7: हनुमान की खोज

Tilak Kathayein12 Apr 202641 views📖 1 min read
सीता कथा
सीता कथा का अध्याय 7 — हनुमान की खोज। हनुमान सीता की खोज में लंका जाते हैं और उन्हें राम का संदेश देते हैं।

हनुमान की खोज

रावण द्वारा सीता हरण के पश्चात, सम्पूर्ण अयोध्या शोक में डूब गई थी। राम विलाप कर रहे थे, लक्ष्मण उन्हें ढाढस बंधा रहे थे, और सुग्रीव अपनी वानर सेना के साथ सीता की खोज में जुट गए थे। चारों दिशाओं में दूत भेजे गए, आशा की एक किरण की तलाश में।

हनुमान का लंका प्रस्थान

दक्षिण दिशा में जाम्बवंत, अंगद और हनुमान के नेतृत्व में एक दल समुद्र तट पर पहुंचा। विशाल सागर उनकी राह में खड़ा था, लंका जाने का कोई मार्ग दिखाई नहीं दे रहा था। सभी वानर चिंतित थे, सागर को लांघने की शक्ति किसमें है, यह प्रश्न सबके मन में घूम रहा था। जाम्बवंत ने हनुमान को उनकी अद्भुत शक्ति और सामर्थ्य का स्मरण कराया, जो उन्होंने बाल्यकाल में सूर्य को फल समझकर निगलने के प्रयत्न में दिखाई थी। हनुमान, जाम्बवंत के वचनों से प्रेरित होकर, अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानने लगे, उनका मुख तेज से चमक उठा, और उनकी मांसपेशियों में स्फूर्ति आ गई।

जाम्बवंत ने प्रेम से कहा, "हनुमान, तुम पवन पुत्र हो, तुममें असीम शक्ति है। तुम इस विशाल सागर को लांघकर लंका पहुंच सकते हो। राम काज के लिए तुम्हें ही जाना होगा।" हनुमान विनम्रता से बोले, "गुरुदेव, आपकी आज्ञा का पालन करना मेरा धर्म है। मैं अवश्य जाऊंगा और माता सीता का पता लगाकर प्रभु राम को सुखद समाचार दूंगा।" उन्होंने राम का नाम लिया और एक लंबी छलांग लगाने के लिए पर्वत शिखर पर चढ़ गए।

सीता से हनुमान की भेंट

हनुमान ने सागर को लांघकर लंका में प्रवेश किया। लंका नगरी स्वर्ण से जगमगा रही थी, परंतु वहां का वातावरण पाप और अत्याचार से दूषित था। हनुमान अशोक वाटिका में पहुंचे, जहां माता सीता अशोक वृक्ष के नीचे बैठी राम का स्मरण कर रही थीं। उनके चारों ओर राक्षसिनियां घेरा बनाकर उन्हें डराती थीं। हनुमान व्याकुल होकर देखने लगे, मां सीता कितनी दुर्बल हो गई हैं, रावण की कैद ने उनका तेज छीन लिया है।

हनुमान ने सोचा, 'मुझे माता सीता को राम की अंगूठी देनी चाहिए और उन्हें विश्वास दिलाना चाहिए कि राम उन्हें लेने शीघ्र आएंगे।' तब हनुमान ने रामकथा का गायन शुरू किया ताकि माता सीता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकें। "राम की जय हो, माता सीता की जय हो," ये शब्द सुनकर सीता ने ऊपर देखा तो एक वानर को वृक्ष पर बैठे पाया। सीता के मन में शंका और भय ने घर कर लिया, 'क्या यह रावण का कोई छल है?' हनुमान ने धीरे से राम की अंगूठी उनके सामने गिराई।

अशोक वाटिका में हनुमान

अंगूठी देखकर सीता समझ गईं कि हनुमान राम के दूत हैं। हनुमान ने वृक्ष से उतरकर सीता के चरणों में प्रणाम किया और उन्हें राम का संदेश सुनाया। सीता ने हनुमान को आशीर्वाद दिया और राम का कुशल समाचार सुनकर उनकी आंखें भर आईं। हनुमान ने सीता से कहा, "माता, मैं आपको अभी प्रभु राम के पास ले जाने के लिए आया हूं।" सीता ने विनम्रता से उत्तर दिया, "पुत्र, यह उचित नहीं होगा। राम स्वयं आएं और रावण का वध करके मुझे मुक्त कराएं। यह उनके गौरव के अनुरूप होगा।"

हनुमान माता सीता से विदा लेकर अशोक वाटिका को उजाड़ने लगे। उन्होंने राक्षसों को मारा और रावण के अहंकार को चुनौती दी। उनका उद्देश्य था लंका में राम के पराक्रम का सन्देश देना और लंका की शक्ति का अनुमान लगाना। अंत में मेघनाद ने उन्हें ब्रह्मास्त्र से बांध लिया और वे रावण के दरबार में प्रस्तुत किए गए। अगला अध्याय युद्ध और मुक्ति की ओर ले जाएगा, जहाँ राम अपनी सेना के साथ लंका पर आक्रमण करेंगे और सीता को मुक्त कराएंगे।

अध्याय 7 का सार: हनुमान ने लंका जाकर सीता से भेंट की और उन्हें राम का संदेश दिया। हनुमान की भक्ति और पराक्रम से हमें प्रेरणा मिलती है कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें दृढ़ संकल्प और साहस का परिचय देना चाहिए। यह अध्याय हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से ही सफलता मिलती है।

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