वामन अवतार कथा – अध्याय 1: महाबली का राज्य और इंद्रभय
वामन अवतार कथा का अध्याय 1 — महाबली का राज्य और इंद्रभय। राजा महाबली की शक्ति से स्वर्गलोक में देवताओं को भय होता है और वे विष्णु से सहायता मांगते हैं।
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वामन अवतार कथा का अध्याय 1 — महाबली का राज्य और इंद्रभय। राजा महाबली की शक्ति से स्वर्गलोक में देवताओं को भय होता है और वे विष्णु से सहायता मांगते हैं।

द्रौपदी वस्त्रहरण कथा का अध्याय 4 — कृष्ण का हस्तक्षेप और चमत्कारी वस्त्र। कृष्ण भगवान द्रौपदी की प्रार्थना सुनते हैं और एक चमत्कारिक ढंग से उसका चीर बढ़ाते हैं, जिससे दुशासन का प्रयास विफल हो जाता है।

कर्ण दानवीर कथा का अध्याय 2 — अधिरथ को कर्ण का मिलना। अधिरथ और राधा नामक दंपत्ति को नदी में तैरता हुआ कर्ण मिलता है और वे उसे अपने पुत्र के रूप में स्वीकार करते हैं।

द्रौपदी वस्त्रहरण कथा का अध्याय 3 — सभा का मौन और भीष्म की दुविधा। द्रौपदी की दुर्दशा पर सभा मौन रहती है, और भीष्म पितामह धर्म संकट में फंस जाते हैं।

कर्ण दानवीर कथा का अध्याय 1 — सूर्य का आशीर्वाद और कुंती। सूर्य देव कुंती को पुत्र कर्ण का वरदान देते हैं, लेकिन कुंती लोक लाज के डर से उसे त्याग देती है।

द्रौपदी वस्त्रहरण कथा का अध्याय 2 — द्रौपदी की पुकार और दुशासन का अपमान। युधिष्ठिर के हारने के बाद दुशासन द्रौपदी को सभा में घसीट कर लाता है और उसका चीर हरण करने की कोशिश करता है।

द्रौपदी वस्त्रहरण कथा का अध्याय 1 — इंद्रप्रस्थ की महिमा और युधिष्ठिर का पतन। युधिष्ठिर गौरवशाली इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ करते हैं, लेकिन जुए के खेल में अपना सब कुछ हार जाते हैं, जिससे द्रौपदी का अपमान होता है।

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सरस्वती माता कथा का अध्याय 5 — पूजा और नैतिक शिक्षा। सरस्वती माता की पूजा का महत्व बताया जाता है, और ज्ञान, कला और वाणी के प्रति श्रद्धा रखने की नैतिक शिक्षा दी जाती है।

अंबाजी माता कथा का अध्याय 5 — विरासत और नीति। यह अध्याय अंबाजी माता की कथा के पीछे की विरासत, नैतिकता और शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करता है।

सूर्य देव की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। सूर्य की आरती हिंदी में।

सरस्वती माता कथा का अध्याय 4 — सरस्वती के विभिन्न अवतार। सरस्वती देवी विभिन्न युगों में विभिन्न रूपों में अवतरित होती हैं, जैसे कि सीता और तारा, जिससे धर्म की रक्षा होती है।