Yamuna Mata Ki Aarti | यमुना माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

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यमुना माता की आरती – परिचय
यमुना माता की आरती एक भक्तिमय स्तुति है जो यमुना नदी को समर्पित है, जिन्हें देवी के रूप में पूजा जाता है। यह आरती आमतौर पर यमुना जयंती, छठ पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना प्राचीन संतों और कवियों ने की थी। यह आरती यमुना माता के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है।
हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक प्रकार की प्रार्थना है जिसमें दीपक या ज्योति को भगवान के चारों ओर घुमाया जाता है। यमुना माता की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नदी को देवी के रूप में पूजती है और उनके आशीर्वाद की कामना करती है। यह आरती यमुना नदी के तट पर और घरों में भी गाई जाती है, जिससे भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
यमुना माता की आरती के बोल
जो कोई तुमको ध्याता, सुख पाता है आता।।
जय यमुना माता...
मैया जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता।
जो कोई तुमको ध्याता, सुख पाता है आता।।
जय यमुना माता...
प्रथम आरती केशव की, मैया आरती केशव की।
चरण कमल बलिहारी, पावन रज की।।
जय यमुना माता...
द्वितीय आरती मधुसूदन की, मैया आरती मधुसूदन की।
वसन पीत छवि न्यारी, मनमोहन की।।
जय यमुना माता...
तृतीय आरती वामन की, मैया आरती वामन की।
रूप विराट मनोहर, त्रिभुवन स्वामी की।।
जय यमुना माता...
चतुर्थ आरती नरहरि की, मैया आरती नरहरि की।
क्रोधित रूप विकट है, दुष्टों के हारी की।।
जय यमुना माता...
पंचम आरती श्रीधर की, मैया आरती श्रीधर की।
शंख चक्र गदा धारी, भक्तों की प्यारी की।।
जय यमुना माता...
षष्ठम आरती नारायण की, मैया आरती नारायण की।
लक्ष्मी संग विराजे, शोभा अति भारी की।।
जय यमुना माता...
सप्तम आरती माधव की, मैया आरती माधव की।
राधा संग विराजे, प्रीति अति प्यारी की।।
जय यमुना माता...
अष्टम आरती गोविन्द की, मैया आरती गोविन्द की।
मुरलीधर मनमोहन, लीला अति प्यारी की।।
जय यमुना माता...
नवम आरती विष्णु की, मैया आरती विष्णु की।
शेष शैया विराजे, जग के पालनहारी की।।
जय यमुना माता...
दशम आरती जगन्नाथ की, मैया आरती जगन्नाथ की।
रथ पे होकर सवार, दर्शन सुखकारी की।।
जय यमुना माता...
एकादश आरती कृष्ण की, मैया आरती कृष्ण की।
गोपियों संग विराजे, आनंद दायिनी की।।
जय यमुना माता...
द्वादश आरती बलराम की, मैया आरती बलराम की।
हलधर रूप विराजे, शक्ति सुखकारी की।।
जय यमुना माता...
यह आरती जो कोई गाता, मैया आरती जो कोई गाता।
सुख संपत्ति पाता, संकट मिट जाता।।
जय यमुना माता...
मैया जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता।
जो कोई तुमको ध्याता, सुख पाता है आता।।
जय यमुना माता...
आरती का अर्थ
पहले अंतरे का शब्दार्थ है कि "हे यमुना माता, आपकी जय हो! जो कोई भी आपका ध्यान करता है, उसे सुख और शांति प्राप्त होती है।" इसका भावार्थ यह है कि यमुना माता अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं। यह यमुना माता के भक्तों के लिए एक आश्वासन है कि वे उनके ध्यान और भक्ति से लाभान्वित होंगे।
आरती का मुख्य भाव यमुना माता की महिमा का वर्णन करना और उनसे आशीर्वाद की कामना करना है। भक्त यमुना माता से सुख, शांति, समृद्धि और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। यह आरती यमुना माता के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाती है, और भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण कराती है।
आरती करने की विधि
आरती की थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, फूल, धूप, चंदन और कुमकुम रखें। कुछ लोग फल और मिठाई भी रखते हैं।
आरती को भगवान की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर, एक बार मुख पर और सात बार पूरे शरीर पर घुमाया जाता है। आरती करते समय "ओम जय यमुना माता" या अन्य भक्तिमय मंत्रों का उच्चारण करें।
यमुना माता की आरती मंगला आरती (सुबह), संध्या आरती (शाम) या शयन आरती (रात) के समय की जा सकती है। सबसे उपयुक्त समय वह है जब आपका मन शांत और भक्तिभाव से भरा हो। यमुना जयंती और अन्य विशेष अवसरों पर यह आरती विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
आरती के लाभ
- यमुना माता की कृपा – यमुना माता की आरती करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है। यह माना जाता है कि आरती यमुना माता को प्रसन्न करती है और उनके आशीर्वाद को आकर्षित करती है।
- घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है, जिससे सुख-शांति बनी रहती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ाता है।
- मनोकामना पूर्ति – यमुना माता की आरती श्रद्धापूर्वक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह आरती भक्तों को आत्मविश्वास और आशा प्रदान करती है, जिससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होते हैं।
निष्कर्ष
यमुना माता की आरती का दिव्य महत्व है। यह आरती लाखों भक्तों के दिलों में बसी हुई है, जिसका पवित्र उद्गम यमुना माता की आराधना की परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह आरती यमुना माता के प्रति प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जो उनके भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक रूप से समृद्ध करती है।
सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को प्रतिदिन पूर्ण भक्ति के साथ गाएं। यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगी। जय यमुना माता!
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