Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता | TilakKathayein
आरती

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Tilak Kathayein26 May 202645 views📖 1 min read
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता
'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

नमो चंडिके हो चामुंड माता – परिचय

"नमो चंडिके हो चामुंड माता" माँ चामुंडा की एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन आरती है। यह विशेष रूप से नवरात्र जैसे शुभ अवसरों पर अथवा किसी भी विशेष पूजा-अनुष्ठान के समापन पर गाई जाती है। इसकी रचना के संबंध में कोई विशिष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, परन्तु यह भक्तिभाव और माँ की शक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का सर्वोच्च महत्व है, यह ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी दिव्य उपस्थिति का अनुभव करने का एक माध्यम है। "नमो चंडिके हो चामुंड माता" की आरती में माँ चामुंडा के रौद्र और करुणामयी दोनों स्वरूपों का एक साथ आवाहन किया गया है, जो इसे विशेष रूप से शक्तिशाली बनाती है।

नमो चंडिके हो चामुंड माता के बोल

नमो नमो चंडिके हो चामुंड माता,
जय जय कपालिनी तुजे नमो माता।

जय जय चंडिके हो चामुंड माता,
जय जय शूल धारिणी तुजे नमो माता।

त्रिलोक वासिनी तुजय नमो माता,
कपाल धारिणी तुजे नमो माता।

भक्त जनो की तुज नमो माता,
रक्षा करो चंडिके तुजे नमो माता।

जय जय चंडिके हो चामुंड माता,
जय जय महा प्रिये तुजे नमो माता।

कोटि सूर्य सम तेज तुम माता,
महा माय तू चंडिके तुजे नमो माता।

शत्रु मर्दिनी तुज हो नमो माता,
जय जय चंडिके हो चामुंड माता।

आरती का अर्थ

इस आरती का पहला अंतरा माँ चामुंडा के प्रति श्रद्धापूर्वक नमन और उनकी महिमा का गायन है। "नमो नमो चंडिके हो चामुंड माता, जय जय कपालिनी तुजे नमो माता" पंक्तियों में भक्त माँ के विभिन्न रूपों, विशेषकर उनके कपाल (खोपड़ी) धारण करने वाले विकराल रूप के प्रति भी नमन करता है, जो बुराई पर विजय का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि माँ का स्वरूप चाहे जैसा भी हो, वह भक्तों के लिए आश्रय हैं।

आरती का मुख्य भाव माँ चामुंडा के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी कृपा की याचना करना है। भक्त माँ की शक्ति, तेज और भक्तवत्सलता का वर्णन करते हुए उनसे रक्षा और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करता है। माँ चामुंडा केवल रौद्र रूप वाली ही नहीं, बल्कि अपने भक्तों के लिए प्रेम और वात्सल्य का स्रोत भी हैं, यही इस आरती का केंद्रीय संदेश है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में एक दीपक जिसमें घी और बत्ती हो, कपूर, कुछ फूल, और यदि संभव हो तो धूप तथा कुमकुम-चावल रखें। दीपक जलाने के उपरांत उस पर कपूर रखकर जलाएं और थाली में रखे फूलों को स्पर्श करते हुए आरती उतारें।

आरती को दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई की दिशा में) घुमाना चाहिए। आरती को तीन बार गोल घुमाकर, फिर एक बार माथे पर या अपने नेत्रों पर स्पर्श करने का विधान है। आरती गाते हुए देवी-देवताओं के नामों का स्मरण करें और मन को एकाग्र रखें। आरती सामान्यतः मंगला, भोग, संध्या और शयन आरती के समय की जाती है, जिसमें संध्या आरती का समय अधिक प्रचलित है।

आरती के लाभ

  • चामुंडा माता की कृपा – इस आरती के नियमित गायन से माँ चामुंडा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। माँ का आशीर्वाद प्राप्त होने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • घर में सुख-शांति – जब घर में नियमित रूप से माँ चामुंडा की आरती गाई जाती है, तो वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। इससे घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
  • मनोकामना पूर्ति – सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई गई यह आरती भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध होती है। माँ चामुंडा अपने प्रियजनों की पुकार अवश्य सुनती हैं।

निष्कर्ष

नमो चंडिके हो चामुंड माता" का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह आरती माँ चामुंडा की शक्ति, रक्षा और करुणा का प्रतीक है, जिसके कारण यह लाखों भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखती है। माँ चामुंडा की पूजा परंपरा में, यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली मंत्र है जो भक्तों को सीधे माँ के दिव्य स्वरूप से जोड़ता है।

इस आरती को प्रतिदिन श्रद्धानुसार गाने से माँ चामुंडा की असीम कृपा प्राप्त होती है। अपने दैनिक पूजन में इसे अवश्य शामिल करें और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव करें। जय चामुंडा माता!

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