Vijaya Ekadashi | विजया एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Vijaya Ekadashi | विजया एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein19 May 202627 views📖 1 min read
विजया एकादशी – Vijaya Ekadashi
विजया एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

विजया एकादशी – परिचय

विजया एकादशी, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। 2026 में यह एकादशी 7 मार्च को पड़ेगी। इस एकादशी का नाम 'विजय' इसलिए पड़ा क्योंकि यह सभी प्रकार की विजय प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसे 'जय एकादशी' भी कहते हैं, क्योंकि यह जीवन में विजय का संकल्प दिलाती है।

सभी एकादशियों में विजया एकादशी का विशेष स्थान है। इसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्रत रखने वाले को लौकिक और पारलौकिक दोनों लोकों में विजय दिलाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और वह समस्त कष्टों से मुक्त हो जाता है।

विजया एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में एक राजा थे जिनका नाम नृग था। वे अपने राज्य में बहुत प्रजाप्रिय थे, परंतु एक बार एक ब्राह्मण की गाय को गलती से मार देने के कारण वे श्राप से ग्रसित हो गए और प्रेत योनि में चले गए। वे अत्यंत दुखी थे और अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहते थे।

एक बार महर्षि पुलस्त्य उनके पास आए और उन्होंने राजा को विजया एकादशी का व्रत रखने की विधि बताई। राजा ने महर्षि के कथानुसार विधि-विधान से विजया एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की। व्रत के पुण्य प्रभाव से राजा नृग को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई।

भगवान विष्णु ने राजा को वरदान दिया कि इस व्रत को जो भी विधि-पूर्वक करेगा, उसे समस्त दुखों से मुक्ति मिलेगी और वह विजय को प्राप्त करेगा। इस प्रकार, विजया एकादशी का व्रत व्यक्ति को सभी बंधनों से मुक्त कर विजय का मार्ग प्रशस्त करता है।

व्रत विधि

दशमी की रात को सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। जमीन पर सोना और मन को शांत रखना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।

इसके बाद, भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पंचामृत से अभिषेक करें, पीले वस्त्र अर्पित करें, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) लगाएं। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते रहें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालसूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सुबहभगवान विष्णु की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें, धूप-दीप जलाएं।
दोपहरव्रत कथा का पाठ करें या सुनें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
सायंकालसंध्या आरती करें और भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें। फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।
रात्रिजागरण करें और श्री हरि का ध्यान करें। संभव हो तो रात्रि में भी भजन-कीर्तन करते रहें।

द्वादशी के दिन, सूर्योदय के बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। इसके पश्चात स्वयं पारण करें। पारण में सात्विक भोजन जैसे दही-चावल आदि ग्रहण कर सकते हैं।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

विजया एकादशी के व्रत में फलाहार, दूध, दही, मक्खन, मेवे, कुट्टू का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है। दिन में एक बार फलाहार या साबूदाने की खिचड़ी, साबूदाने के वड़े आदि खाए जा सकते हैं।

इस व्रत में चावल, दाल, अनाज, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का सेवन पूर्णतः वर्जित है। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि एकादशी के दिन चावल का सेवन भगवान विष्णु को अप्रिय माना जाता है और यह अन्न के सेवन के समान ही है, जो एकादशी व्रत के नियमों के विरुद्ध है।

विजया एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से समस्त प्रकार के पापों का नाश होता है, जैसे गौहत्या, ब्रह्महत्या आदि। पुराणों के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्रदान करता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है और उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत जातक को जीवन में विजय दिलाता है, शत्रुओं का नाश करता है और धन-धान्य से परिपूर्ण रखता है।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया सुधरती है और शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में विजया एकादशी कब है?

2026 में विजया एकादशी 7 मार्च, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर दोपहर तक रहेगा।

विजया एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि को चावल का सेवन भगवान विष्णु को अप्रिय होता है। यह भी कहा जाता है कि चावल में जल तत्व की प्रधानता होती है और एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन महापाप के समान है। इसलिए, विजया एकादशी सहित सभी एकादशी के व्रतों में चावल का त्याग किया जाता है।

क्या बीमार व्यक्ति विजया एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं या वृद्ध व्यक्ति यदि पूर्ण उपवास न रख सकें, तो वे फलाहार या एक समय के भोजन का विकल्प चुन सकते हैं। वे केवल भगवान का स्मरण और नाम जप कर सकते हैं।

निष्कर्ष

विजया एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। भगवान विष्णु अपने भक्तों को यह आश्वासन देते हैं कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक रखने वाले को सभी प्रकार की विजय प्राप्त होगी और वह समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्त हो जाएगा। इसी कारण इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह न केवल विजय का वरदान देती है, बल्कि अंततः मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

सभी भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ विजया एकादशी का व्रत करना चाहिए। ईश्वर की कृपा से वे अवश्य ही अपने जीवन में विजय प्राप्त करेंगे। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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