Vat Savitri Vrat | वट सावित्री व्रत – पूजा विधि, महत्व, कथा 2026

📋 विषय सूची
वट सावित्री व्रत – परिचय और महत्व
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत 5 जून को मनाया जाएगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। यह सावित्री के अपने पति सत्यवान को मृत्यु के देवता यमराज से बचाने की कथा पर आधारित है।
धार्मिक दृष्टि से, वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह व्रत महिलाओं को सावित्री के त्याग और साहस से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करता है।
यह त्योहार अन्य त्योहारों से इस मायने में विशेष है कि यह विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। वट वृक्ष की पूजा इस व्रत का एक अभिन्न अंग है, जो दीर्घायु, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक है। यह व्रत महिलाओं को अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रेरित करता है।
पौराणिक कथा
वट सावित्री व्रत की पौराणिक उत्पत्ति स्कंद पुराण और भविष्योत्तर पुराण में मिलती है। यह व्रत सावित्री और सत्यवान की कथा की स्मृति में मनाया जाता है।
प्राचीन काल में, भद्र देश के राजा अश्वपति और उनकी पत्नी मालवी के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने देवी सावित्री की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें एक तेजस्वी कन्या का वरदान दिया। उस कन्या का नाम सावित्री रखा गया। सावित्री ने सत्यवान नामक एक युवक को अपने पति के रूप में चुना, जो अल्पायु था। सावित्री ने सत्यवान के जीवन को बचाने के लिए कठोर तपस्या की और अंत में यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पर विवश कर दिया।
इस कथा का वर्तमान जीवन में यह संदेश है कि सच्ची श्रद्धा, प्रेम और निष्ठा से किसी भी संकट को दूर किया जा सकता है। यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने संकल्पों पर दृढ़ रहना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए।
पूजा विधि 2026
वट सावित्री व्रत की पूजा में वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा की जाती है। महिलाएं सुबह स्नान करके नए वस्त्र धारण करती हैं और वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होती हैं।
| समय | पूजा/रिवाज | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रातःकाल | स्नान और वस्त्र धारण | नए या स्वच्छ वस्त्र पहनें। |
| सुबह 8:00 बजे | वट वृक्ष की पूजा | वट वृक्ष को जल, रोली, अक्षत, और फूल अर्पित करें। |
| सुबह 9:00 बजे | कथा श्रवण | वट सावित्री व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। |
| दोपहर 12:00 बजे | आरती और परिक्रमा | वट वृक्ष की आरती करें और चारों ओर परिक्रमा करें। |
| सायंकाल | व्रत का पारण | फल, मिठाई, और अन्य सात्विक भोजन से व्रत खोलें। |
पूजा में सावित्री मंत्र "ॐ ह्रीं श्रीं सावित्र्यै नमः" का जाप करें और वट सावित्री व्रत की आरती गाएं।
प्रसाद और विशेष व्यंजन
- पूरण पोली – यह महाराष्ट्र में वट सावित्री व्रत पर विशेष रूप से बनाई जाती है। यह मीठी रोटी होती है जिसे चने की दाल और गुड़ से बनाया जाता है।
- आम का पना – गर्मी के मौसम में यह पेय शरीर को ठंडक प्रदान करता है। इसे कच्चे आम, चीनी और मसालों से बनाया जाता है।
- भिगोए हुए चने – यह प्रसाद के रूप में देवता को चढ़ाया जाता है। चने को रात भर भिगोकर सुबह पूजा में इस्तेमाल किया जाता है।
वट सावित्री व्रत पर सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत रखने वाली महिलाएं दिन भर फल और जल का सेवन कर सकती हैं। नमक और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए।
भारत में कैसे मनाते हैं
उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं।
पश्चिम भारत में महिलाएं वट वृक्ष को धागा बांधती हैं और सावित्री की कथा सुनती हैं। दक्षिण भारत में इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। पूर्व भारत में महिलाएं उपवास रखती हैं और देवी सावित्री की आराधना करती हैं।
वट सावित्री व्रत पर महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, जैसे साड़ी और गहने। घरों को रंगोली और फूलों से सजाया जाता है। इस अवसर पर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य किए जाते हैं।
तैयारी और सजावट
वट सावित्री व्रत से पहले घर की साफ-सफाई की जाती है। महिलाएं नए वस्त्र और श्रृंगार का सामान खरीदती हैं। यह तैयारी व्रत से 2-3 दिन पहले शुरू हो जाती है।
पारंपरिक सजावट में रंगोली, दीप और फूलों का उपयोग किया जाता है। आधुनिक सजावट में बिजली की लड़ियों और अन्य सजावटी वस्तुओं का उपयोग किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में वट सावित्री व्रत कब है?
वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत 5 जून, शुक्रवार को है। अमावस्या तिथि 4 जून को रात 11:50 बजे से शुरू होकर 5 जून को रात 9:17 बजे तक रहेगी।
वट सावित्री व्रत पर क्या दान करना चाहिए?
इस दिन अनाज, वस्त्र, और धन का दान करना शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्य का कार्य है।
वट सावित्री व्रत का व्रत कौन रख सकता है?
यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। अविवाहित महिलाएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं।
निष्कर्ष
आधुनिक हिंदू जीवन में वट सावित्री व्रत का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह पारिवारिक बंधनों को मजबूत करता है, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखता है, और भक्ति को गहरा करता है। यह व्रत महिलाओं को अपने पति और परिवार के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त करने का एक सुंदर अवसर प्रदान करता है, साथ ही उन्हें अपने सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में भी मदद करता है।
वट सावित्री व्रत मनाने वाले सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं। शुभ वट सावित्री व्रत!
संबंधित लेख

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?
हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा
श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

Radha Chalisa | राधा चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026
राधा चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में राधा चालीसा हिंदी में पढ़ें।

Amalaki Ekadashi | आमलकी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026
आमलकी एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

Devutthana Ekadashi | देवउठनी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026
देवउठनी एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।