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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 2 | दुर्योधन का द्रोणाचार्य से संवाद | संपूर्ण अर्थ एवं व्याख्या
भागवद गीता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 2 | दुर्योधन का द्रोणाचार्य से संवाद | संपूर्ण अर्थ एवं व्याख्या

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का दूसरा श्लोक महाभारत युद्ध के प्रारम्भिक वातावरण को और अधिक स्पष्ट करता है। इस श्लोक में दुर्योधन पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाता है। उसके शब्दों में आत्मविश्वास दिखाई देता है, किंतु उसके भीतर छिपी चिंता और रणनीतिक सोच भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। आइए इस श्लोक का शब्दार्थ, सरल अर्थ और गहन महत्व विस्तार से समझते हैं।

27 Jul 2026102
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 – धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… | संपूर्ण अर्थ, शब्दार्थ और विस्तृत परिचय
भागवद गीता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 – धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… | संपूर्ण अर्थ, शब्दार्थ और विस्तृत परिचय

भगवद्गीता का प्रथम श्लोक केवल युद्धभूमि का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव मन, धर्म, कर्तव्य और मोह के बीच चलने वाले आंतरिक संघर्ष का भी प्रतीक है। आइए जानें इस श्लोक का गहरा अर्थ और इसका आध्यात्मिक संदेश।

26 Jul 2026119
Chapter 1 : Arjuna Vishada Yoga – अध्याय १: अर्जुनविषादयोग
भागवद गीता

Chapter 1 : Arjuna Vishada Yoga – अध्याय १: अर्जुनविषादयोग

धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ।। धृतराष्ट्र बोले- हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्रमें एकत्रित, युद्धकी इच्छावाले मेरे और पाण्डुके पुत्रोंने क्या किया ? ॥१॥…

29 Jul 2021202