Surya Chalisa | सूर्य चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

📋 विषय सूची
सूर्य चालीसा – परिचय
सूर्य चालीसा भगवान सूर्य देव की स्तुति है, जिसमें चालीस चौपाइयाँ हैं। यह एक लोकप्रिय प्रार्थना है जो प्राचीन काल से प्रचलित है, हालांकि इसके लेखक के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह माना जाता है कि इसे किसी सूर्य भक्त ने सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए रचा था। सूर्य चालीसा का पाठ सूर्य देव के प्रति श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है।
सूर्य चालीसा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वेदों और पुराणों में वर्णित सूर्य देव की महिमा से जुड़ा है। यह चालीसा सूर्य देव के भक्तों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, उन्हें ऊर्जा, स्वास्थ्य और सफलता प्रदान करती है। सूर्य चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को आत्मविश्वास और आत्म-अनुशासन प्राप्त होता है।
सूर्य चालीसा – सम्पूर्ण पाठ
रवि चालीसा गाऊँ मैं, प्रेम सहित सादर।।
प्रथमहिं रवि शीश नवाऊँ, निज मन का भरम मिटाऊँ।
श्री रविदेव कृपा कर दीजै, अपने चरणों का दास बना लीजै।।
हे सूर्यदेव मैं विनय सुनाऊँ, अपने मन का भेद बताऊँ।
तुम हो सबके जीवन दाता, तुम हो सबके भाग्य विधाता।।
रवि तुम हो प्रकाश स्वरूप, तुम हो तेज अनंत अनूप।
तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुःख निवारणहारी।।
रवि तुम हो शक्ति अपार, तुम हो सबके आधार।
तुम्हीं से ये जग उजियारा, तुम बिन सब है अंधियारा।।
तुम हो सबके स्वामी रविदेवा, करते हैं सब तुम्हारी सेवा।
सूर्यदेव मैं शरण तिहारी, रक्षा करो हे रवि हमारी।।
रवि तुम हो सबके रक्षक, तुम हो सबके भक्षक।
रोग शोक को दूर भगाओ, भक्तों के मन को हर्षाओ।।
हे सूर्यदेव मेरी विनती सुनो, अपने चरणों में मुझको चुनो।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके त्राता।
कृपा करो हे रवि मेरे, दूर करो दुःख सारे।।
तुम हो सबके जीवन आधार, तुम हो सबके दुःख निवारणहार।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके भाग्यविधाता।।
हे सूर्यदेव मैं विनती करूँ, अपने चरणों में मुझको धरूँ।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके स्वामी, तुम हो सबके अंतर्यामी।
सूर्यदेव मैं हूँ तेरा दास, पूरी करो मेरी आस।।
तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुःख निवारणहारी।
हे सूर्यदेव मैं शरण तिहारी, रक्षा करो हे रवि हमारी।।
रवि तुम हो सबके रक्षक, तुम हो सबके भक्षक।
रोग शोक को दूर भगाओ, भक्तों के मन को हर्षाओ।।
हे सूर्यदेव मेरी विनती सुनो, अपने चरणों में मुझको चुनो।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके त्राता।
कृपा करो हे रवि मेरे, दूर करो दुःख सारे।।
तुम हो सबके जीवन आधार, तुम हो सबके दुःख निवारणहार।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके भाग्यविधाता।।
हे सूर्यदेव मैं विनती करूँ, अपने चरणों में मुझको धरूँ।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके स्वामी, तुम हो सबके अंतर्यामी।
सूर्यदेव मैं हूँ तेरा दास, पूरी करो मेरी आस।।
तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुःख निवारणहारी।
हे सूर्यदेव मैं शरण तिहारी, रक्षा करो हे रवि हमारी।।
रवि तुम हो सबके रक्षक, तुम हो सबके भक्षक।
रोग शोक को दूर भगाओ, भक्तों के मन को हर्षाओ।।
हे सूर्यदेव मेरी विनती सुनो, अपने चरणों में मुझको चुनो।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके त्राता।
कृपा करो हे रवि मेरे, दूर करो दुःख सारे।।
तुम हो सबके जीवन आधार, तुम हो सबके दुःख निवारणहार।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके भाग्यविधाता।।
हे सूर्यदेव मैं विनती करूँ, अपने चरणों में मुझको धरूँ।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके स्वामी, तुम हो सबके अंतर्यामी।
सूर्यदेव मैं हूँ तेरा दास, पूरी करो मेरी आस।।
तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुःख निवारणहारी।
हे सूर्यदेव मैं शरण तिहारी, रक्षा करो हे रवि हमारी।।
रवि तुम हो सबके रक्षक, तुम हो सबके भक्षक।
रोग शोक को दूर भगाओ, भक्तों के मन को हर्षाओ।।
हे सूर्यदेव मेरी विनती सुनो, अपने चरणों में मुझको चुनो।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके त्राता।
कृपा करो हे रवि मेरे, दूर करो दुःख सारे।।
तुम हो सबके जीवन आधार, तुम हो सबके दुःख निवारणहार।
रवि तुम हो सबके दाता, तुम हो सबके भाग्यविधाता।।
हे सूर्यदेव मैं विनती करूँ, अपने चरणों में मुझको धरूँ।
मैं हूँ दास तुम्हारा रविदेवा, करो मेरी तुम सेवा।।
रवि तुम हो सबके स्वामी, तुम हो सबके अंतर्यामी।
सूर्यदेव मैं हूँ तेरा दास, पूरी करो मेरी आस।।
चालीसा रविदेव की, जो कोई नर गावे।
कहे सेवक मन हरषित, सुख संपत्ति पावे।।
शब्द-अर्थ और भावार्थ
जय जय जय रविदेव, कृपानिधि करुणाकर। रवि चालीसा गाऊँ मैं, प्रेम सहित सादर।।
शब्दार्थ: जय = विजय, रविदेव = सूर्य देव, कृपानिधि = कृपा के सागर, करुणाकर = करुणा करने वाले, गाऊँ = गाता हूँ, सादर = आदर के साथ।
भावार्थ: हे सूर्य देव, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप कृपा के सागर हैं और करुणा करने वाले हैं। मैं प्रेम और आदर के साथ आपकी चालीसा का गान करता हूँ।
प्रथमहिं रवि शीश नवाऊँ, निज मन का भरम मिटाऊँ। भावार्थ: मैं सबसे पहले सूर्य देव को शीश झुकाता हूँ और अपने मन के भ्रम को दूर करता हूँ। इस चौपाई में सूर्य देव को नमन करके मन की अज्ञानता को दूर करने की बात कही गई है।
श्री रविदेव कृपा कर दीजै, अपने चरणों का दास बना लीजै। भावार्थ: हे श्री रविदेव, मुझ पर कृपा करें और मुझे अपने चरणों का दास बना लें। यह चौपाई सूर्य देव से उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करने की प्रार्थना है।
हे सूर्यदेव मैं विनय सुनाऊँ, अपने मन का भेद बताऊँ। भावार्थ: हे सूर्यदेव, मैं आपसे विनय करता हूँ और अपने मन की बात बताता हूँ। इस चौपाई में भक्त सूर्य देव से अपने मन की भावनाओं को व्यक्त करने की बात करता है।
तुम हो सबके जीवन दाता, तुम हो सबके भाग्य विधाता। भावार्थ: आप ही सबके जीवन के दाता हैं और आप ही सबके भाग्य विधाता हैं। इस चौपाई में सूर्य देव को जीवन और भाग्य का निर्माता बताया गया है।
रवि तुम हो प्रकाश स्वरूप, तुम हो तेज अनंत अनूप। भावार्थ: हे रवि, आप प्रकाश स्वरूप हैं, आपका तेज अनंत और अनुपम है। इस चौपाई में सूर्य देव के प्रकाश और तेज की महिमा का वर्णन है।
इस चालीसा में सूर्य की महिमा विशेष रूप से जीवनदाता, भाग्य विधाता और प्रकाश के स्रोत के रूप में वर्णित है। यह सूर्य देव की कृपा, शक्ति और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है। चालीसा में सूर्य देव से रोग, शोक और दुःख दूर करने की प्रार्थना की गई है।
पाठ विधि और नियम
सूर्य चालीसा का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन रविवार है, और सबसे अच्छा समय सूर्योदय के समय होता है। आप एक या तीन बार पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करें और पवित्रता का पालन करें।
सूर्य चालीसा का पाठ करने से पहले, एक दीपक जलाएं, धूप जलाएं, फूल चढ़ाएं और आसन पर बैठें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। सूर्य देव की मूर्ति या चित्र के सामने पाठ करना फलदायी होता है।
सूर्य चालीसा का पाठ विशेष रूप से सूर्य षष्ठी व्रत और मकर संक्रांति के त्योहार पर अत्यधिक फलदायी होता है। इन अवसरों पर पाठ करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सूर्य चालीसा के लाभ
- सूर्य की विशेष कृपा – सूर्य चालीसा का पाठ करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। यह पाठ करने से भक्तों को तेज, यश और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- मनोकामना पूर्ति – सूर्य चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह पाठ धन, समृद्धि और सफलता प्राप्त करने में सहायक होता है।
- भय और संकट से रक्षा – सूर्य चालीसा का पाठ भक्तों को भय और संकट से बचाता है। यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
- मानसिक शांति – नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है। यह पाठ तनाव और चिंता को कम करता है और सकारात्मकता लाता है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – सूर्य चालीसा का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह पाठ आत्मा को शुद्ध करता है और ईश्वर के साथ संबंध को मजबूत करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूर्य चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?
सूर्य चालीसा को सामान्यतः पढ़ने में लगभग 5-7 मिनट लगते हैं। विस्तारित पाठ में थोड़ा अधिक समय लग सकता है, लेकिन यह आमतौर पर 10 मिनट से अधिक नहीं होता है।
क्या महिलाएं सूर्य चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएं सूर्य चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में सभी को ईश्वर की आराधना करने का अधिकार है, और सूर्य चालीसा का पाठ महिलाओं के लिए भी उतना ही फलदायी है।
सूर्य चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
सूर्य चालीसा को दैनिक रूप से एक बार पढ़ना अच्छा माना जाता है, लेकिन आप इसे अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार अधिक बार भी पढ़ सकते हैं। विशेष अवसरों पर इसे तीन या पांच बार पढ़ना फलदायी होता है।
निष्कर्ष
सूर्य चालीसा की गहरी आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपरा इसकी प्रभावकारिता के बारे में बताती है कि कैसे दैनिक पाठ एक भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है, उसे तेज, ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। सूर्य चालीसा का पाठ एक दिव्य अनुभव है जो आत्मा को प्रकाश से भर देता है।
प्रेरणादायक संदेश: आइये, सूर्य चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त करें। जय सूर्य!
आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026
शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए
संबंधित लेख

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व
भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

हवन के दौरान हम "स्वाहा" क्यों कहते हैं? | Why Do we Say " Swaha" during havan?
स्वाहा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मंत्र है, जो यज्ञ में आहुति की पूर्णता का प्रतीक है। यह देवी स्वधा का एक रूप है और पितरों को तृप्त करने व देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?
हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा
श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

Radha Chalisa | राधा चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026
राधा चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में राधा चालीसा हिंदी में पढ़ें।