आरती

श्री गणेश आरती

Tilak Kathayein30 Jul 2021224 views
Shri Ganesh Aarati  –  श्री गणेश आरती
श्रीगणेश को धूप-दीप, फूल, दूर्वा आदि चढ़ाएं। गुड़-धनिए का प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गणेशजी के सामने बैठकर पन्ना या हरे हकीक की माला से (ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र…)

श्रीगणेश को धूप-दीप, फूल, दूर्वा आदि चढ़ाएं। गुड़-धनिए का प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गणेशजी के सामने बैठकर पन्ना या हरे हकीक की माला से (ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र का यथाशक्ति जप करें। जब घर से निकलने वाले हों, तब श्री गणेश को चढ़ाई दूर्वा में से थोड़ी दूर्वा अपनी जेब में रख लें।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

🕉

आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

टैग:foodsoledad
शेयर करें:

संबंधित लेख

Purushottam Mas Katha: Adhyaya 9 | पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 9
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा

पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 9

कन्या अपने दुखों से व्यथित थी, और दुर्वासा मुनि ने उसे सांत्वना दी। फिर, कन्या ने शंकर से दुःख निवारण की प्रार्थना की, जिससे मुनि ने उसे समाधान दिया। सूतजी…

12 Jan 2025284
ऋषि पंचमी ( सामा पाचंम )
शिव कथाएँ

राधा वल्लभ सम्प्रदाय: महत्व और अनुष्ठान

हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन इस व्रत को धारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्त्रियों को रसवालाममें पूजा पाठ और धार्मिक…

30 Jul 2021170
Annapurna Vrat – अन्नपूर्णा माता व्रत
देवी की कथाएँ

माँ अन्नपूर्णा व्रत: महत्व और अनुष्ठान

माँ अन्नपूर्णा माता का महाव्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष पंचमी से प्रारम्भ होता है और मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को समाप्त होता है। यह उत्तमोत्तम व्रत सत्रह दिनों का होता है…

30 Jul 2021146