Ram Ji Ki Aarti | श्री राम जी की आरती – बोल, विधि और महत्व

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श्री राम जी की आरती – परिचय
श्री राम जी की आरती भगवान विष्णु के अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की स्तुति में गाई जाने वाली एक भक्तिमय रचना है। यह आरती प्रायः रामनवमी, हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना संत तुलसीदास ने की थी, जो रामचरितमानस के रचयिता भी हैं। यह आरती राम भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखती है क्योंकि यह भगवान राम के गुणों, उनकी महिमा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा को व्यक्त करती है।
हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है, जो भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करने का एक तरीका है। श्री राम जी की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान राम के आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित मर्यादाओं का स्मरण कराती है, जिससे भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। यह आरती भगवान राम के प्रति कृतज्ञता और भक्ति का प्रतीक है।
श्री राम जी की आरती के बोल
हरि हरण क्लेश सब दूर करण जी की॥
नाना भांति भोग और व्यंजन बनाए।
धर थाल जमुना जल भर लाए॥
स्वर्ण थाल मणि भरी आरती।
आरती कीजै रामचन्द्र जी की॥
कंचन थाल कपूर बाती।
आरती कीजै रामचन्द्र जी की॥
राम रूप अति शोभा जाकी।
कभी न बरने बुद्धि थाकी॥
आरती कीजै रामचन्द्र जी की।
हरि हरण क्लेश सब दूर करण जी की॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥
आरती कीजै रामचन्द्र जी की।
हरि हरण क्लेश सब दूर करण जी की॥
आरती का अर्थ
प्रथम अंतरे में कहा गया है कि हम श्री रामचन्द्र जी की आरती करते हैं, जो सभी दुखों और कष्टों को हरने वाले हैं। 'हरि हरण क्लेश सब दूर करण जी की' पंक्ति का अर्थ है कि भगवान विष्णु (हरि) भक्तों के सभी कष्टों और दुखों को दूर करने वाले हैं। यह भगवान राम की करूणा और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।
आरती का मुख्य भाव भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति है। भक्त भगवान से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांग रहा है और उनसे कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना कर रहा है। आरती में भगवान राम की महिमा का गुणगान किया जाता है और उनकी शक्ति, करूणा और न्यायप्रियता का वर्णन किया जाता है। भक्त भगवान राम से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करता है।
आरती करने की विधि
आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल), कुमकुम और चंदन रखें। दीपक में घी या तेल डालकर रुई की बाती जलाएं। कपूर का भी प्रयोग किया जा सकता है। थाली को फूलों से सजाएं और धूप जलाएं।
आरती को भगवान की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर, आरती को चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर, एक बार मुख पर और सात बार पूरे शरीर पर घुमाया जाता है। आरती घुमाते समय आरती के बोल गाएं या भगवान का नाम जपें।
राम की आरती करने का सबसे उत्तम समय संध्या आरती (शाम की आरती) है, लेकिन इसे मंगला आरती (सुबह की आरती) या शयन आरती (रात की आरती) के समय भी किया जा सकता है। प्रत्येक आरती का अपना महत्व है और यह भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करने का एक तरीका है।
आरती के लाभ
- राम की कृपा – आरती करने से भगवान राम प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। यह माना जाता है कि आरती के माध्यम से भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है। इससे घर का वातावरण शांत और सुखमय बनता है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ता है।
- मनोकामना पूर्ति – भक्ति भाव से आरती करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह माना जाता है कि भगवान राम अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करते हैं।
निष्कर्ष
श्री राम जी की आरती का दिव्य महत्व है। लाखों भक्तों द्वारा यह आरती अत्यंत प्रेम से गाई जाती है। इसका उद्गम पवित्र है और यह राम उपासना की परंपरा में विशेष स्थान रखती है। यह आरती भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, और यह भक्तों को उनके करीब लाने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को प्रतिदिन पूर्ण भक्ति के साथ गाएं। जय राम!
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