Lakshmi Mata Ki Aarti | लक्ष्मी माता की आरती – बोल, विधि और महत्व | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
आरती

Lakshmi Mata Ki Aarti | लक्ष्मी माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 202647 views📖 1 min read
लक्ष्मी माता की आरती – Lakshmi Mata Ki Aarti
लक्ष्मी माता की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। लक्ष्मी की आरती हिंदी में।

लक्ष्मी माता की आरती – परिचय

लक्ष्मी माता की आरती एक भक्तिमय स्तुति है जो धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी, लक्ष्मी माता को समर्पित है। यह आरती विशेष रूप से दिवाली और लक्ष्मी पूजा जैसे अवसरों पर गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती को भगवान इंद्र ने लिखा था। यह आरती भक्तों को माता लक्ष्मी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक प्रतीकात्मक क्रिया है जिसमें दीपक की लौ को देवता के चारों ओर घुमाया जाता है, जो प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है। लक्ष्मी माता की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धन, समृद्धि और शुभता की देवी को समर्पित है, और इसे गाने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

लक्ष्मी माता की आरती के बोल

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत,
हर विष्णु धाता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी,
तुम हो जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता॥

दुर्गा रूप निरंजनी,
सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,
ऋद्धि-सिद्धि पाता॥

तुम पाताल निवासिनी,
तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी,
भव निधि की त्राता॥

जिस घर तुम रहती हो,
सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता,
मन नहीं घबराता॥

तुम बिन यज्ञ न होते,
वस्त्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता॥

महालक्ष्मीजी की आरती,
जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता,
पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत,
हर विष्णु धाता॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे में, भक्त लक्ष्मी माता की स्तुति करते हुए कहते हैं कि हे माता लक्ष्मी, आपकी जय हो। विष्णु और ब्रह्मा सहित सभी देवता आपकी सेवा करते हैं। यहां लक्ष्मी माता को ब्रह्मांड की माता के रूप में वर्णित किया गया है, जिनकी सेवा सभी देवता करते हैं, जो उनकी सर्वोच्चता को दर्शाता है।

आरती का मुख्य भाव लक्ष्मी माता की महिमा का वर्णन करना और उनसे आशीर्वाद मांगना है। भक्त उनसे सुख, समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि और सद्गुण प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। यह आरती भक्त को विश्वास दिलाती है कि लक्ष्मी माता की कृपा से सभी कार्य संभव हो जाते हैं और जीवन में शांति और आनंद आता है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप और कुमकुम रखें। दीपक घी का होना चाहिए और उसमें बाती जलानी चाहिए। फूलों को थाली में सजाएं और धूप जलाएं।

आरती घुमाने का सही तरीका यह है कि पहले भगवान की मूर्ति के चारों ओर चार बार घुमाएं, फिर दो बार नाभि के चारों ओर और अंत में एक बार मुख के चारों ओर घुमाएं। आरती करते समय "ॐ जय लक्ष्मी माता" या अन्य भक्तिमय मंत्रों का उच्चारण करें।

लक्ष्मी की आरती सामान्यतः संध्या आरती के समय की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद होती है। दिवाली और लक्ष्मी पूजा जैसे विशेष अवसरों पर भी आरती की जाती है। कुछ लोग मंगला आरती (सुबह) और शयन आरती (रात) के समय भी लक्ष्मी माता की आरती करते हैं।

आरती के लाभ

  • लक्ष्मी की कृपा – आरती करने से लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को धन, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। यह माना जाता है कि नियमित रूप से आरती करने से भक्तों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि आती है।
  • घर में सुख-शांति – आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है। नियमित आरती से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • मनोकामना पूर्ति – लक्ष्मी माता की आरती भक्ति और श्रद्धा से करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह माना जाता है कि माता लक्ष्मी अपने भक्तों की प्रार्थना सुनती हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करती हैं।

निष्कर्ष

लक्ष्मी माता की आरती का दिव्य महत्व अपार है। लाखों लोगों द्वारा प्रिय, यह आरती लक्ष्मी पूजा की परंपरा में एक विशेष स्थान रखती है, जिसकी उत्पत्ति पवित्र है। यह आरती लक्ष्मी माता की आराधना का एक शक्तिशाली माध्यम है, जो भक्तों को धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी से जोड़ती है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को पूरी भक्ति के साथ प्रतिदिन गाएं। जय लक्ष्मी!

शेयर करें:

संबंधित लेख

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
ब्लॉग

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व

कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

07 Jun 202628
मंगल दोष
ब्लॉग

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?

हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

02 Jun 202673
श्री कार्तिकेय चालीसा
चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

01 Jun 202648
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता
आरती

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 202646