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Hanuman Ji Ki Aarti | हनुमान जी की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein12 Apr 202649 views📖 1 min read
हनुमान जी की आरती – Hanuman Ji Ki Aarti
हनुमान जी की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। हनुमान की आरती हिंदी में।

हनुमान जी की आरती – परिचय

हनुमान जी की आरती भगवान हनुमान की स्तुति में गाई जाने वाली एक भक्तिमय प्रार्थना है। यह आरती आमतौर पर हनुमान मंदिरों में या घरों में हनुमान जी की पूजा के दौरान गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना संत तुलसीदास ने की थी, जो भगवान राम और हनुमान जी के परम भक्त थे। यह आरती हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है, यह भगवान के प्रति अपनी भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है। हनुमान जी की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करती है। यह आरती हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक मानी जाती है।

हनुमान जी की आरती के बोल

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े धरणी पर।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती गावें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुंठ परम पद पावे॥

लंक विध्वंस कियो रघुराई।
तुलसीदास स्वामी आरती गाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ है कि हम हनुमान लला की आरती करते हैं, जो दुष्टों का नाश करने वाले और रघुनाथ (राम) की कला (शक्ति) हैं। इसका भावार्थ यह है कि हम भगवान हनुमान की पूजा करते हैं, जो भगवान राम की शक्ति का प्रतीक हैं और जो बुराई को नष्ट करने में सक्षम हैं। यह हनुमान जी की शक्ति और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन करता है।

आरती का मुख्य भाव हनुमान जी की महिमा का गुणगान करना और उनसे अपनी रक्षा और कल्याण की प्रार्थना करना है। भक्त हनुमान जी से शक्ति, साहस और भक्ति मांगते हैं, साथ ही जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति की कामना करते हैं। यह आरती हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल) और कुमकुम रखें। दीपक घी का होना चाहिए और उसमें रुई की बत्ती जलानी चाहिए। फूल ताजे और सुगंधित होने चाहिए। धूप सुगंधित होनी चाहिए।

आरती घुमाने का सही तरीका है कि पहले भगवान के चरणों में चार बार, फिर नाभि के पास दो बार और अंत में मुख पर एक बार घुमाएं। आरती सात बार घुमानी चाहिए। आरती करते समय "ॐ जय हनुमान" या हनुमान जी के किसी भी मंत्र का जाप करना चाहिए।

हनुमान की आरती आमतौर पर संध्या आरती के समय की जाती है, लेकिन इसे मंगला आरती या शयन आरती के समय भी किया जा सकता है। संध्या आरती का उचित समय सूर्यास्त के बाद होता है।

आरती के लाभ

  • हनुमान की कृपा – आरती करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। यह माना जाता है कि नियमित रूप से आरती करने से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • घर में सुख-शांति – हनुमान जी की आरती घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ता है।
  • मनोकामना पूर्ति – हनुमान जी की आरती श्रद्धा और भक्ति से करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह आरती भक्तों को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती है, जिससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होते हैं।

निष्कर्ष

हनुमान जी की आरती का दिव्य महत्व है। लाखों लोगों द्वारा यह आरती पूजी जाती है, इसका पवित्र मूल है, और हनुमान पूजा की परंपरा में यह विशेष है। यह आरती हनुमान जी के प्रति अटूट भक्ति और आस्था का प्रतीक है, जो भक्तों को शक्ति और सुरक्षा प्रदान करती है।

भक्तों के लिए प्रेरणादायक संदेश है कि वे इस आरती को पूर्ण भक्ति के साथ प्रतिदिन गाएं। जय हनुमान!

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