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Chhath Puja | छठ पूजा – पूजा विधि, महत्व, कथा 2026

Tilak Kathayein07 Apr 202675 views📖 1 min read
छठ पूजा – Chhath Puja
छठ पूजा 2026 – पूजा विधि, पौराणिक कथा, महत्व और परंपराएं। संपूर्ण जानकारी हिंदी में।

छठ पूजा – परिचय और महत्व

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। 2026 में छठ पूजा 18 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना को समर्पित है, जिसमें श्रद्धालु संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखते हैं।

छठ पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। हिंदू धर्म में यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसमें डूबते हुए सूर्य की भी पूजा की जाती है, जो जीवन के अंतिम सत्य को स्वीकारने का संदेश देता है। यह प्रकृति और मानव के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है।

यह त्योहार अन्य त्योहारों से इस प्रकार विशेष है कि इसमें स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ पूजा में कठोर नियमों का पालन किया जाता है, जिसमें 36 घंटे का निर्जला व्रत शामिल है, जो इसे अद्वितीय बनाता है।

पौराणिक कथा

छठ पूजा की पौराणिक उत्पत्ति ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलती है। इस कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत ने संतान प्राप्ति के लिए छठ मैया की आराधना की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से इस पर्व को मनाने की परंपरा शुरू हुई।

कथा में राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी संतानहीन थे। महर्षि कश्यप के कहने पर उन्होंने यज्ञ किया और छठी मैया की कृपा से उन्हें पुत्र हुआ, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। तब छठी मैया प्रकट हुईं और शिशु को जीवित किया। इस घटना से छठ पूजा का महत्व स्थापित हुआ, जो जीवन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।

इस कथा का वर्तमान जीवन में संदेश यह है कि निराशा में भी आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से की गई आराधना फलदायी होती है और हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

पूजा विधि 2026

छठ पूजा की पूजा विधि में सर्वप्रथम स्नान करके तन और मन को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद नए वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा सामग्री तैयार की जाती है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किए जाते हैं।

समयपूजा/रिवाजविशेषता
15 नवंबर 2026नहाय-खायइस दिन व्रत करने वाले लोग स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं, जो लौकी की सब्जी और चने की दाल होती है।
16 नवंबर 2026खरनाइस दिन दिनभर व्रत रखा जाता है और शाम को गुड़ की खीर बनाकर खाई जाती है, जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
17 नवंबर 2026संध्या अर्घ्यइस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। नदी या तालाब के किनारे खड़े होकर सूर्य देव को जल और दूध अर्पित किया जाता है।
18 नवंबर 2026उषा अर्घ्यइस दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का पारण किया जाता है।

छठ पूजा में सूर्य देव के मंत्रों का जाप किया जाता है, जैसे "ॐ सूर्याय नमः"। इसके साथ ही छठी मैया की आरती भी गाई जाती है, जो इस प्रकार है: "जय छठी मैया...।"

प्रसाद और विशेष व्यंजन

  • ठेकुआ – ठेकुआ छठ पूजा का प्रमुख प्रसाद है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। यह प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किया जाता है और व्रत करने वाले इसे ग्रहण करते हैं।
  • कद्दू की सब्जी – कद्दू की सब्जी नहाय-खाय के दिन बनाई जाती है। इसे शुद्धता के साथ बनाया जाता है और व्रत करने वाले इसे ग्रहण करते हैं।
  • चावल के लड्डू – चावल के लड्डू विशेष रूप से छठ पूजा में बनाए जाते हैं। यह प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

छठ पूजा पर व्रत करने वाले नमक, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते हैं। वे केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

भारत में कैसे मनाते हैं

उत्तर भारत में छठ पूजा बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इस पर्व का विशेष महत्व है। लोग नदी और तालाब के किनारे एकत्रित होकर सूर्य देव की आराधना करते हैं।

पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी भारत में छठ पूजा मनाने की अलग-अलग परंपराएं हैं। पश्चिम में इसे कम धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि पूर्वी भारत में यह पर्व उत्तर भारत की तरह ही उत्साह से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में सूर्य देव की आराधना अन्य रूपों में की जाती है।

छठ पूजा पर घर की सजावट में रंगोली और दीपों का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और लोकगीत गाती हैं। यह पर्व सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

तैयारी और सजावट

छठ पूजा से पहले घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह तैयारी पर्व शुरू होने से कई दिन पहले ही शुरू कर दी जाती है। लोग नए वस्त्र और पूजा सामग्री खरीदते हैं।

पारंपरिक सजावट में रंगोली, दीप और फूलों का प्रयोग किया जाता है। आधुनिक सजावट में बिजली की झालरों और आर्टिफिशियल फूलों का भी प्रयोग किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में छठ पूजा कब है?

2026 में छठ पूजा 18 नवंबर, मंगलवार को है। इस दिन सूर्योदय का समय सुबह 06:40 बजे है, जो उषा अर्घ्य का शुभ मुहूर्त है।

छठ पूजा पर क्या दान करना चाहिए?

छठ पूजा पर अनाज, वस्त्र और फल दान करना शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य मिलता है।

छठ पूजा का व्रत कौन रख सकता है?

छठ पूजा का व्रत कोई भी रख सकता है जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। महिलाएं और पुरुष दोनों ही यह व्रत कर सकते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

निष्कर्ष

छठ पूजा आधुनिक हिंदू जीवन में गहरी आध्यात्मिक महत्व रखती है। यह परिवार के बंधनों को मजबूत करता है, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करता है, और भक्ति को गहरा करता है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होने और सूर्य देव की आराधना करने की प्रेरणा देता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

छठ पूजा मनाने वाले सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं। छठी मैया और सूर्य देव की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। शुभ छठ पूजा!

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