Brihaspati Chalisa | बृहस्पति चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

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बृहस्पति चालीसा – परिचय
बृहस्पति चालीसा, देवगुरु बृहस्पति को समर्पित एक भक्तिमय स्तोत्र है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, जो बृहस्पति देव की महिमा का वर्णन करती हैं। माना जाता है कि यह चालीसा प्राचीन काल से प्रचलित है और इसके रचयिता के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह चालीसा बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।
बृहस्पति चालीसा हिंदू धर्म की पौराणिक ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है। यह गुरु ग्रह की शांति और शुभता के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। भक्तगण इस चालीसा का पाठ करके अपने जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। इसका पाठ करने से भक्तों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे आध्यात्मिक रूप से उन्नत होते हैं।
बृहस्पति चालीसा – सम्पूर्ण पाठ
कृपा करहु अब गुरु प्यारे।
सत्य ज्ञान विज्ञान सिखाओ,
प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ाओ।
जय बृहस्पति देवा,
दया करो गुरुदेवा।
तुम हो ज्ञान के सागर,
सबके भाग्य विधाता।
विद्या बुद्धि विवेक दो स्वामी,
हर लो प्रभु अंतरयामी।
तुम हो सबके पालनहारी,
सबके संकट हरने वाले।
गुरुवार को जो तुम्हें ध्यावे,
मनवांछित फल पावे।
पीले वस्त्र धारण करते हो,
देवताओं के गुरु कहलाते हो।
स्वर्ण मुकुट शीश पर सोहे,
देखकर मन अतिशय मोहे।
तुम हो सबके भाग्य विधाता,
सबके कष्टों के हो त्राता।
ऋषि मुनि सब तुमको ध्यावें,
ज्ञान ध्यान से तुम्हें रिझावें।
जो भी शरण तुम्हारी आवे,
सुख संपत्ति वैभव पावे।
तुम हो सबके गुरु महान,
करते सबका तुम कल्याण।
विष्णु रूप तुम हो देवा,
करते सबकी तुम सेवा।
पीले रंग की ध्वजा तुम्हारी,
शुभता लाए घर-घर हमारी।
गुरु मंत्र का जाप जो करे,
उसके संकट सब दूर हों खरे।
सत्य मार्ग पर चलो हमेशा,
यही सीख देते हो हमेशा।
तुम हो सबके मार्गदर्शक,
करते सबकी तुम मदद।
ज्ञान चक्षु को खोलो स्वामी,
अंतर्यामी हे अविनाशी।
जो भी तुम्हें पुकारे सच्चे मन से,
उसकी रक्षा करते हो तन मन से।
तुम हो सबके रक्षक देवा,
करते सबकी तुम सेवा।
बृहस्पति चालीसा जो गावे,
उसके कष्ट सभी मिट जावे।
सुख शांति घर में आवे,
खुशियाँ अपार वो पावे।
विद्यार्थी विद्या पावे,
व्यापारी व्यापार बढ़ावे।
तुम हो सबके भाग्य विधाता,
सबके कष्टों के हो त्राता।
गुरुवार को जो व्रत करे,
तुम्हारी कृपा उस पर रहे।
पीले वस्त्र पहनो हमेशा,
गुरुवार को करो हमेशा।
बृहस्पति देव की आरती गाओ,
मनवांछित फल तुम पाओ।
जय जय जय गुरुदेव हमारे,
कृपा करहु अब गुरु प्यारे।
सत्य ज्ञान विज्ञान सिखाओ,
प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ाओ।
इति बृहस्पति चालीसा समाप्त।
शब्द-अर्थ और भावार्थ
जय जय जय गुरुदेव हमारे, कृपा करहु अब गुरु प्यारे। शब्दार्थ: गुरुदेव - बृहस्पति देव, हमारे - हमारे, कृपा करहु - कृपा करें, अब - अब, गुरु प्यारे - हे प्यारे गुरु। भावार्थ: हे हमारे पूजनीय गुरुदेव, हे प्यारे गुरु, हम पर अपनी कृपा करें। इस दोहे में भक्त बृहस्पति देव से अपनी कृपा बरसाने की प्रार्थना कर रहा है।
पहली चौपाई: सत्य ज्ञान विज्ञान सिखाओ, प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ाओ। भावार्थ: यह चौपाई बृहस्पति देव से सत्य, ज्ञान, विज्ञान और प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ाने की प्रार्थना करती है। बृहस्पति देव ज्ञान और विद्या के प्रतीक हैं, इसलिए उनसे ज्ञान और भक्ति प्रदान करने का आग्रह किया जा रहा है।
दूसरी चौपाई: जय बृहस्पति देवा, दया करो गुरुदेवा। भावार्थ: इस चौपाई में बृहस्पति देव की जय-जयकार की जा रही है और उनसे दया करने की प्रार्थना की जा रही है। यह बृहस्पति देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्त करती है।
तीसरी चौपाई: तुम हो ज्ञान के सागर, सबके भाग्य विधाता। भावार्थ: इस चौपाई में बृहस्पति देव को ज्ञान का सागर और सभी के भाग्य का विधाता बताया गया है। यह उनके सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होने का वर्णन करता है।
चौथी चौपाई: विद्या बुद्धि विवेक दो स्वामी, हर लो प्रभु अंतरयामी। भावार्थ: इस चौपाई में बृहस्पति देव से विद्या, बुद्धि और विवेक प्रदान करने की प्रार्थना की जा रही है। उन्हें अंतर्यामी प्रभु के रूप में संबोधित किया गया है, जो सभी के मन की बात जानते हैं।
पांचवीं चौपाई: तुम हो सबके पालनहारी, सबके संकट हरने वाले। भावार्थ: इस चौपाई में बृहस्पति देव को सभी का पालनहार और संकट हरने वाला बताया गया है। यह उनके दयालु और रक्षक होने का वर्णन करता है।
बृहस्पति चालीसा में बृहस्पति देव की महिमा विशेष रूप से ज्ञान, विद्या, बुद्धि, भाग्य विधाता और संकट हरने वाले के रूप में वर्णित है। यह चालीसा उनके भक्तों को इन गुणों को प्राप्त करने और अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाने में मदद करती है। यह चालीसा बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
पाठ विधि और नियम
बृहस्पति चालीसा का पाठ गुरुवार के दिन करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह दिन बृहस्पति देव को समर्पित है। पाठ करने का सबसे अच्छा समय सुबह या शाम का होता है। आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार एक, तीन या पांच पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।
पाठ करने से पहले एक दीपक जलाएं, धूप जलाएं और फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। बृहस्पति देव का ध्यान करें और पूरी श्रद्धा के साथ चालीसा का पाठ करें।
बृहस्पति चालीसा का पाठ बृहस्पति व्रत या किसी भी शुभ त्योहार पर करना विशेष फलदायी होता है। इस दिन चालीसा का पाठ करने से बृहस्पति देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बृहस्पति चालीसा के लाभ
- बृहस्पति देव की विशेष कृपा – बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। यह चालीसा गुरु ग्रह को मजबूत करने और जीवन में शुभता लाने में मदद करती है।
- मनोकामना पूर्ति – बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह चालीसा विद्या, बुद्धि, धन और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होती है।
- भय और संकट से रक्षा – बृहस्पति चालीसा का नियमित पाठ भक्तों को सभी प्रकार के भय और संकट से बचाता है। यह चालीसा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मकता लाने में मदद करती है।
- मानसिक शांति – बृहस्पति चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत और स्थिर करता है। यह चालीसा तनाव और चिंता को कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होती है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – बृहस्पति चालीसा का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह चालीसा भक्तों को ईश्वर के करीब लाने और आत्म-साक्षात्कार में मदद करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बृहस्पति चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?
बृहस्पति चालीसा को पढ़ने में सामान्यतः 5 से 7 मिनट लगते हैं। यदि आप प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझते हुए और ध्यानपूर्वक पाठ करते हैं, तो थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
क्या महिलाएं बृहस्पति चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएं बृहस्पति चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में किसी भी देवी-देवता की पूजा और स्तुति करने का अधिकार सभी को है, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं। मासिक धर्म के दौरान पाठ करने से पहले नियमों का पालन करें।
बृहस्पति चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार बृहस्पति चालीसा को दिन में एक बार या तीन बार पढ़ सकते हैं। गुरुवार के दिन और विशेष अवसरों पर इसका पाठ करना अधिक फलदायी होता है।
निष्कर्ष
बृहस्पति चालीसा की गहरी आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका पाठ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दैनिक पाठ से भक्त का जीवन पूरी तरह से परिवर्तित हो जाता है और उसे सुख, शांति और समृद्धि मिलती है।
हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि बृहस्पति चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लाएगी। जय बृहस्पति देव!
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