Ambaji Chalisa | अंबाजी चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Ambaji Chalisa | अंबाजी चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein07 Apr 202684 views📖 1 min read
अंबाजी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में अंबाजी चालीसा हिंदी में पढ़ें।

अंबाजी चालीसा – परिचय

अंबाजी चालीसा माँ अंबाजी की स्तुति में रचित चालीस चौपाइयों का एक संग्रह है। यह देवी दुर्गा के शक्तिपीठों में से एक, अंबाजी मंदिर से जुड़ी है। माना जाता है कि इस चालीसा की रचना किसी अज्ञात भक्त द्वारा की गई थी, और यह कई वर्षों से भक्तों के बीच प्रचलित है। इसका पाठ माँ अंबाजी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।

अंबाजी चालीसा एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है जो शाक्त परंपरा से जुड़ा है। यह चालीसा भक्तों को माँ अंबाजी के करीब लाती है और उन्हें आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। भक्त मानते हैं कि इस चालीसा के नियमित पाठ से उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह चालीसा पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के हृदय में बसी हुई है।

अंबाजी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

जय अंबा गौरी मैया जय अंबा गौरी,
नित प्रति तुमको ध्यावत, हर संकट हो दूरी॥
जय जय अंबा जगदम्बा, तेरी महिमा अपरम्पार।
तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही शक्ति का अवतार॥
सिंह पर सवार होकर, करती हो तुम जग की रक्षा।
हाथों में त्रिशूल और खप्पर, दुष्टों का करती हो भक्षण॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, भक्तों पर करती हो कृपा।
तेरी शरण में जो भी आता, दुःख दरिद्र उसका मिट जाता॥
अंबा नगरी में तेरा धाम है, भक्तों का लगता है मेला।
दर्शन करके तेरे चरणों का, मिट जाता है हर झमेला॥
तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती, तू ही पार्वती माता।
तीनों लोकों में तेरा राज है, तू ही सबकी भाग्यविधाता॥
अंबाजी नाम जो भी जपेगा, उसका जीवन सफल होगा।
हर बाधा से वह मुक्त होगा, सुख शांति उसे मिलेगा॥
तू ही विद्या, तू ही बुद्धि, तू ही ज्ञान की दाता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
तू ही शांति, तू ही प्रेम, तू ही आनंद की दाता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
तू ही जगदम्बा, तू ही जगजननी, तू ही जग की माता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही चामुंडा माता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती, तू ही अन्नपूर्णा माता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
तू ही गायत्री, तू ही सावित्री, तू ही ब्रह्माणी माता।
तेरी कृपा से ही मिलता है, जीवन का सच्चा नाता॥
अंबाजी माता तू दयालु माता, भक्तों पर करती हो प्यार।
तेरी भक्ति से ही मिलता है, जीवन का सच्चा सार॥
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, तू ही मुक्ति की दाता।
तेरी शरण में जो भी आता, पा जाता है जीवन का नाता॥
अंबाजी माता तू सबकी माता, तेरा नाम है सुखदाई।
तेरी महिमा का कोई अंत नहीं, तू ही सबकी माई॥
जो भी अंबाजी चालीसा पढ़ेगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।
अंबाजी माता की कृपा से, जीवन उसका खुशियों से भरेगा॥
जय अंबाजी माता, जय अंबाजी माता, जय अंबाजी माता।
सब मिलकर बोलो, जय अंबाजी माता॥

शब्द-अर्थ और भावार्थ

दोहा: जय अंबा गौरी मैया जय अंबा गौरी, नित प्रति तुमको ध्यावत, हर संकट हो दूरी। शब्दार्थ: जय - स्तुति, अंबा गौरी - माँ पार्वती, मैया - माता, नित प्रति - हर रोज, तुमको - आपको, ध्यावत - ध्यान करते हुए, हर - प्रत्येक, संकट - मुसीबत, दूरी - दूर। भावार्थ: माँ पार्वती की जय हो, माँ गौरी की जय हो। जो भक्त प्रतिदिन आपका ध्यान करते हैं, उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं।

चौपाई 1: जय जय अंबा जगदम्बा, तेरी महिमा अपरम्पार। भावार्थ: माँ अंबा की जय हो, माँ जगदम्बा की जय हो। आपकी महिमा अपरम्पार है, जिसका कोई अंत नहीं है। यह चौपाई माँ अंबाजी की महानता और सर्वव्यापकता को दर्शाती है।
चौपाई 2: तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही शक्ति का अवतार। भावार्थ: आप ही दुर्गा हैं, आप ही काली हैं, आप ही शक्ति का अवतार हैं। यह चौपाई माँ अंबाजी को शक्ति का प्रतीक बताती है, जो विभिन्न रूपों में प्रकट होती हैं।
चौपाई 3: सिंह पर सवार होकर, करती हो तुम जग की रक्षा। भावार्थ: आप सिंह पर सवार होकर पूरे संसार की रक्षा करती हैं। यह चौपाई माँ अंबाजी के शक्तिशाली और रक्षक रूप को दर्शाती है।
चौपाई 4: हाथों में त्रिशूल और खप्पर, दुष्टों का करती हो भक्षण। भावार्थ: आपके हाथों में त्रिशूल और खप्पर है, जिससे आप दुष्टों का नाश करती हैं। यह चौपाई माँ अंबाजी के उग्र रूप को दर्शाती है, जो बुराई का अंत करती हैं।
चौपाई 5: अंबाजी माता तू सबकी माता, भक्तों पर करती हो कृपा। भावार्थ: माँ अंबाजी, आप सबकी माता हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। यह चौपाई माँ अंबाजी के प्रेम और दयालुता को दर्शाती है।

इस चालीसा में अंबाजी की महिमा विशेष रूप से उनके भक्तों के प्रति प्रेम, उनकी संकट हरने की शक्ति और उनके विभिन्न रूपों में प्रकट होने की क्षमता के रूप में वर्णित है। यह चालीसा माँ अंबाजी को शक्ति, भक्ति और मुक्ति की दाता के रूप में प्रस्तुत करती है। इस चालीसा में उनके नाम की महिमा का गुणगान किया गया है।

पाठ विधि और नियम

अंबाजी चालीसा का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन शुक्रवार माना जाता है, जो माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा को समर्पित है। इसके अतिरिक्त, नवरात्रि के दिनों में इस चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। पाठ का सबसे अच्छा समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल है। प्रतिदिन एक या तीन पाठ करना शुभ माना जाता है। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाना चाहिए।

पाठ शुरू करने से पहले, एक दीपक जलाएं, धूप जलाएं, और माँ अंबाजी को फूल अर्पित करें। एक स्वच्छ आसन पर बैठें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। माँ अंबाजी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर पाठ करना अधिक फलदायी होता है।

अंबाजी चालीसा का पाठ नवरात्रि, दुर्गाष्टमी और अन्य त्योहारों पर विशेष रूप से फलदायी होता है। किसी विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है। व्रत के दिनों में इस चालीसा का पाठ करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

अंबाजी चालीसा के लाभ

  • अंबाजी की विशेष कृपा – अंबाजी चालीसा का पाठ करने से माँ अंबाजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है। वे अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से बचाती हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाती हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वह धन, संतान, या स्वास्थ्य से संबंधित हों। माँ अंबाजी अपने भक्तों की हर इच्छा को पूरा करती हैं।
  • भय और संकट से रक्षा – नियमित रूप से अंबाजी चालीसा का पाठ करने से भय और संकट से रक्षा होती है। माँ अंबाजी अपने भक्तों को हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से बचाती हैं और उन्हें सुरक्षित रखती हैं।
  • मानसिक शांति – अंबाजी चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत करता है और तनाव को कम करता है। इससे मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – अंबाजी चालीसा का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यह आत्मा को शुद्ध करता है और ईश्वर के साथ संबंध को मजबूत करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अंबाजी चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

अंबाजी चालीसा का पाठ करने में सामान्यतः 5 से 7 मिनट लगते हैं। यदि आप इसका विस्तार से पाठ करते हैं, तो इसमें थोड़ा अधिक समय लग सकता है, लेकिन यह आपकी भक्ति और श्रद्धा पर निर्भर करता है।

क्या महिलाएं अंबाजी चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएं अंबाजी चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में किसी भी देवी या देवता की पूजा करने का अधिकार सभी को है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखते हुए पाठ किया जा सकता है।

अंबाजी चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

अंबाजी चालीसा को दैनिक रूप से एक बार पढ़ना उत्तम माना जाता है। विशेष अवसरों और त्योहारों पर आप इसे तीन, पांच या ग्यारह बार भी पढ़ सकते हैं। यह आपकी श्रद्धा और समय पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष

अंबाजी चालीसा की गहन आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका दैनिक पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है। यह प्रार्थना देवी अंबाजी से जुड़ने और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है, जो भक्तों को शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है।

हम आपको अंबाजी चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। माँ अंबाजी की भक्ति से आपके जीवन में सुख और शांति का वास हो। जय अंबाजी!

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