Apara Ekadashi | अपरा एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Apara Ekadashi | अपरा एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein20 May 202664 views📖 1 min read
अपरा एकादशी – Apara Ekadashi
अपरा एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

अपरा एकादशी – परिचय

अपरा एकादशी, जिसे अचला एकादशी भी कहा जाता है, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में अपरा एकादशी 08 मई, शुक्रवार को पड़ रही है। इस एकादशी का नाम 'अपरा' इसलिए है क्योंकि यह मन को विकारों से ऊपर उठाकर अपरा (जो कभी नष्ट न हो) अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ले जाती है। यह एकादशी सभी एकादशियों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह प्राणी मात्र के पापों का नाश कर उन्हें परम पद की प्राप्ति कराती है।

सभी एकादशियों में अपरा एकादशी का विशेष स्थान है। इसे 'अचला एकादशी' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है 'स्थिर' या 'अटल'। यह एकादशी अपने व्रती को अटल सुख और अक्षय पुण्य प्रदान करती है। शास्त्रों में इसका माहात्म्य अन्य सभी एकादशियों से श्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि यह घोर पापों का नाश करने में भी सक्षम है।

अपरा एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में एक महीKết नामक राजा था, जो अपनी प्रजा का पालन सत्य और न्याय से करता था। एक बार अनजाने में राजा से एक ब्राह्मण की हत्या का घोर पाप हो गया, जिसके फलस्वरूप उसे भयानक कष्ट भोगने पड़े। राजा ने अपने राज्य का सुख खो दिया और वह एक भयानक रोग से पीड़ित हो गया।

राजा ने अपने गुरु महर्षि जैमिनि से इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। महर्षि ने राजा को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने का विधान बताया। राजा ने गुरु के निर्देशानुसार विधि-विधान से अपरा एकादशी का व्रत रखा, भगवान श्रीहरि की पूजा की और व्रत का संकल्प लिया।

भगवान विष्णु की कृपा से राजा महीKết के सभी पाप नष्ट हो गए और उसे भयानक रोग से मुक्ति मिल गई। राजा पुनः अपने राज्य के सुख-वैभव को प्राप्त कर धर्मपूर्वक शासन करने लगा। इस व्रत के प्रभाव से राजा को अक्षय पुण्य की प्राप्ति हुई।

व्रत विधि

दशमी की रात्रि को ही व्रत की तैयारी आरंभ कर देनी चाहिए। इस रात्रि को सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। भूमि पर शयन करना उत्तम माना जाता है।

एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात भगवान श्रीविष्णु की प्रतिमा या चित्र की पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करें। भगवान को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का यथासंभव जाप करें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालस्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीविष्णु की षोडशोपचार पूजा करें।
दिन भरफलाहार करें या निर्जल व्रत रखें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। भगवद्गीता या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
संध्याकालशाम को भी भगवान श्रीविष्णु की आरती करें। पुनः मंत्र जाप करें।
रात्रिरात्रि में जागरण करना श्रेष्ठ है। रात्रि में भी भगवान का भजन-कीर्तन करें।
पारण (द्वादशी)द्वादशी तिथि को सूर्योदय के पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। तत्पश्चात स्वयं पारण करें।

द्वादशी के दिन, सूर्योदय के पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होकर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और दान-दक्षिणा देनी चाहिए। इसके पश्चात ही स्वयं विधिपूर्वक पारण करना चाहिए। पारण करते समय सात्विक भोजन जैसे मूंग, फल आदि का सेवन करें।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

अपरा एकादशी के व्रत में फलाहार, दूध, दही, मक्खन, मेवे, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना आदि का सेवन किया जा सकता है। इन खाद्य पदार्थों को सात्विक माना जाता है और ये व्रत के नियमों के अनुकूल होते हैं।

इस व्रत में चावल खाना पूर्णतः वर्जित होता है। इसके अतिरिक्त, दालें, लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का मुख्य कारण यह है कि एकादशी के दिन चावल खाने से मनुष्य पाप का भागी बनता है।

अपरा एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – शास्त्रों के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से गौ हत्या, ब्रह्म हत्या जैसे घोर पापों का भी नाश होता है। यह व्रत मनुष्य को उसके पिछले जन्मों के कर्मों से भी मुक्ति दिलाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – इस एकादशी का व्रत धारण करने से व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है और वह भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त होता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत धन-धान्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करता है। घर में सुख-शांति बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया सुधरती है और शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त होता है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभदायक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में अपरा एकादशी कब है?

वर्ष 2026 में अपरा एकादशी 08 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत का शुभ मुहूर्त प्रात: 05:27 बजे से लेकर अगले दिन द्वादशी को प्रात: 04:50 बजे तक रहेगा।

अपरा एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि को चावल खाना वर्जित है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस तिथि को चावल में अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा का अंश होता है, और एकादशी को चावल का सेवन करने से देवी का अपमान होता है। कुछ कथाओं के अनुसार, एकादशी को चावल खाने से मनुष्य पाप का भागी बनता है और उसे कष्ट भोगने पड़ते हैं।

क्या बीमार व्यक्ति अपरा एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं या वृद्ध जन अपनी क्षमतानुसार व्रत रख सकते हैं। वे निर्जल व्रत न रखकर केवल फलाहार कर सकते हैं या दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। यदि वे व्रत रखने में भी असमर्थ हों तो वे किसी योग्य ब्राह्मण से संकल्प लेकर उनके द्वारा व्रत करवा सकते हैं।

निष्कर्ष

अपरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। यह एकादशी व्रती को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है। भगवान विष्णु अपने भक्तों को इस एकादशी के व्रत से समस्त पापों से मुक्ति और अक्षय पुण्य का वरदान देते हैं। इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह घोर पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

सभी भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ अपरा एकादशी का व्रत रखना चाहिए। इस व्रत से प्राप्त पुण्य अनन्त और अक्षय होता है। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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