नरसिंह मेहता जीवनी | Narsinh Mehta Biography in Hindi

संत नरसी मेहता की जीवनी | जन्म, परिवार, भजन और जीवन परिचय
संत नरसी मेहता गुजरात के महान संत, कवि और भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। उन्हें गुजराती साहित्य का आदि कवि भी कहा जाता है। उनका प्रसिद्ध भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” आज भी पूरे भारत में श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
नरसी मेहता का संक्षिप्त परिचय
पूरा नाम: नरसिंह मेहता
जन्म स्थान: तलाजा, गुजरात, भारत
जन्म तिथि: लगभग 1414 ईस्वी
पिता का नाम: कृष्णदास मेहता
माता का नाम: दयाकोरबाई
धर्म: हिंदू धर्म
गुरु: संत गोपालदास जी
प्रसिद्धि: कृष्ण भक्त कवि और संत
संत नरसी मेहता का जीवन परिचय
संत नरसी मेहता का जन्म गुजरात के तलाजा नगर में एक नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका मन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लगा रहता था। वे अत्यंत सरल, दयालु और धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे।
कहा जाता है कि नरसी मेहता को भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य दर्शन प्राप्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन भक्ति और समाज सेवा में समर्पित कर दिया।
उन्होंने अपने भजनों और कविताओं के माध्यम से प्रेम, समानता और मानवता का संदेश दिया। समाज में फैले जाति भेद और ऊँच-नीच के खिलाफ भी उन्होंने आवाज उठाई।
नरसी मेहता का प्रसिद्ध भजन
संत नरसी मेहता का सबसे प्रसिद्ध भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” है। यह भजन मानवता, दया और सेवा का संदेश देता है।
संत नरसी मेहता की प्रमुख रचनाएँ
- वैष्णव जन तो तेने कहिए
- सुदामा चरित्र
- गोविंद गमन
- दाण लीला
- जोगवा
गुजराती साहित्य में योगदान
नरसी मेहता को गुजराती साहित्य का आदि कवि कहा जाता है। उनकी रचनाओं ने गुजराती भाषा और भक्ति साहित्य को नई पहचान दी।
निष्कर्ष
संत नरसी मेहता का जीवन सच्ची भक्ति, प्रेम और मानवता का प्रतीक था। उन्होंने अपने भजनों और विचारों से समाज को नई दिशा दी। आज भी उनके भजन करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।



