Parvati Chalisa | पार्वती चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

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पार्वती चालीसा – परिचय
पार्वती चालीसा देवी पार्वती की स्तुति में रचित चालीस चौपाइयों का एक भक्तिमय स्तोत्र है। यह देवी के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है और माना जाता है कि इसके पाठ से देवी पार्वती प्रसन्न होती हैं। इसकी रचना किसने की, यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, परंतु यह सदियों से प्रचलित है। पार्वती चालीसा, शक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण भाग है और देवी के प्रति प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है।
पार्वती चालीसा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व अतुलनीय है। यह चालीसा उस ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है जो देवी पार्वती को सर्वोच्च शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करती है। भक्तों का मानना है कि इसके नियमित पाठ से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह चालीसा भक्तों को देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का अनुभव कराती है और उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करती है।
पार्वती चालीसा – सम्पूर्ण पाठ
तुम्हारे चरणन की मैं बलिहारी।
शंकर प्रिया हो तुम ही भवानी,
पार्वती नाम से तुम हो जानी।
हे गौरी माता तेरी महिमा,
तीनों लोकों में है छाई।
सुर नर मुनि सब करते हैं वंदन,
तुम्हारे चरणों में करते हैं नमन।
जय पार्वती माता, जय अंबे,
तुम हो जग की पालनहारी।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हारे,
चरणों की धूलि को करते हैं प्यारे।
तुम ही हो शक्ति, तुम ही हो माया,
सारा जगत है तुमसे छाया।
तुम ही हो दुर्गा, तुम ही काली,
तुम ही हो माता कृपालु वाली।
अन्नपूर्णा हो तुम ही माता,
सबके घरों में हो तुम विधाता।
लक्ष्मी स्वरूप हो तुम ही माता,
सबके घरों में हो तुम दाता।
पार्वती माता तेरी जय हो,
सदा ही भक्तों पर कृपा करो।
जो कोई तुमको मन से ध्याता,
उसकी सभी बाधाएं मिट जातीं।
रोग शोक दुख दूर हो जाते,
सुख संपत्ति घर में आते।
जो कोई तुमको प्रेम से बुलाता,
उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जातीं।
विद्या बुद्धि धन बल दे दो,
सबके कष्टों को हर ले लो।
तुम्हारे चरणों में जो आता,
कभी भी खाली हाथ न जाता।
तुम्हारी महिमा अपरंपार है माता,
तीनों लोकों में है विख्याता।
सृष्टि, पालन, संहार करती हो,
तुम ही सब कुछ करती हो।
तुम्हारे नाम से भय दूर भागे,
सबके कष्ट पल में मिट जाएं।
जो कोई चालीसा पढ़ता है,
उस पर तुम्हारी कृपा होती है।
धन धान्य से घर भर जाता है,
सुख शांति से जीवन खिल जाता है।
पार्वती माता तेरी आरती गाऊं,
तुम्हारे चरणों में शीश नवाऊं।
सच्चे मन से जो तुम्हें ध्याता है,
उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
जय पार्वती माता, जय अंबे,
तुम हो जग की पालनहारी।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हारे,
चरणों की धूलि को करते हैं प्यारे।
हे गौरी माता तेरी महिमा,
तीनों लोकों में है छाई।
सुर नर मुनि सब करते हैं वंदन,
तुम्हारे चरणों में करते हैं नमन।
जो कोई पढ़ेगा यह चालीसा,
उस पर होगी पार्वती की कृपा हमेशा।
दुख दरिद्र सब मिट जाएंगे,
सुख संपत्ति घर में आएंगे।
दोहा:
चालीसा पार्वती का, जो कोई गाएगा,
सुख संपत्ति पाएगा, भवसागर तर जाएगा।
शब्द-अर्थ और भावार्थ
जय गिरि तनये अंबे भवानी, तुम्हारे चरणन की मैं बलिहारी। यहाँ 'गिरि तनये' का अर्थ है पर्वतराज हिमालय की पुत्री, और 'अंबे भवानी' देवी पार्वती के ही नाम हैं। भक्त कहता है कि हे गिरिराज की पुत्री, हे अंबे भवानी, मैं आपके चरणों पर न्योछावर हूँ, मैं आपके चरणों की बलिहारी जाता हूँ। इसका भावार्थ है कि भक्त देवी पार्वती के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा व्यक्त कर रहा है।
पहली चौपाई में देवी को 'शंकर प्रिया' कहा गया है, जिसका अर्थ है भगवान शिव की प्रिय पत्नी। दूसरी चौपाई में उन्हें 'पार्वती' नाम से जाना जाता है, जो उनके हिमालय पर्वत से संबंध को दर्शाता है। तीसरी चौपाई में देवी गौरी की महिमा का वर्णन है, जो तीनों लोकों में व्याप्त है। चौथी चौपाई में देवता, मनुष्य और मुनि सभी उनके चरणों में वंदन करते हैं। पाँचवीं चौपाई में उन्हें 'जग की पालनहारी' कहा गया है, जो संसार का पोषण करने वाली हैं।
इस चालीसा में पार्वती की महिमा विशेष रूप से उनके मातृत्व, शक्ति और कृपालु स्वभाव के रूप में वर्णित है। वे न केवल भगवान शिव की पत्नी हैं, बल्कि पूरे जगत की माता भी हैं। उनमें दुर्गा और काली के रूप में दुष्टों का नाश करने की शक्ति है, और अन्नपूर्णा के रूप में सभी को पोषण देने की क्षमता भी है।
पाठ विधि और नियम
पार्वती चालीसा का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन सोमवार और शुक्रवार माने जाते हैं, क्योंकि ये दिन देवी पार्वती को समर्पित हैं। पाठ करने का उत्तम समय प्रातःकाल या संध्याकाल है। आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार एक, तीन या पाँच पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, जिससे तन और मन पवित्र हो जाएं।
पाठ से पहले, एक दीपक जलाएं, धूप करें और देवी पार्वती को फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। यह सुनिश्चित करें कि आपका मन शांत और एकाग्र हो। देवी पार्वती का ध्यान करते हुए चालीसा का पाठ करें।
विशेष फलदायी अवसरों पर, जैसे नवरात्रि, तीज और शिवरात्रि के त्योहारों पर पार्वती चालीसा का पाठ करना सर्वाधिक प्रभावकारी होता है। इन अवसरों पर पाठ करने से देवी पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
पार्वती चालीसा के लाभ
- पार्वती की विशेष कृपा – पार्वती चालीसा का पाठ करने से देवी पार्वती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। वे अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
- मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा के नियमित पाठ से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं, संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली आती है। यह चालीसा भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक है।
- भय और संकट से रक्षा – पार्वती चालीसा का पाठ भक्तों को भय और संकट से बचाता है। यह चालीसा नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से रक्षा करती है और जीवन में सुरक्षा प्रदान करती है।
- मानसिक शांति – नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है। यह चालीसा तनाव और चिंता को कम करती है और मन को शांति प्रदान करती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – पार्वती चालीसा का पाठ भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाता है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह चालीसा भक्तों को देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का अनुभव कराती है और उन्हें ईश्वर के प्रति समर्पित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पार्वती चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?
सामान्यतः पार्वती चालीसा को पढ़ने में लगभग 5 से 7 मिनट लगते हैं। विस्तारित पाठ में, जिसमें प्रत्येक चौपाई का अर्थ और भाव भी शामिल होता है, थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
क्या महिलाएं पार्वती चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएं पार्वती चालीसा बिल्कुल पढ़ सकती हैं। यह देवी पार्वती की स्तुति है और सभी भक्त, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं, इसे पढ़ सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान भी पाठ किया जा सकता है, यदि स्वच्छता का ध्यान रखा जाए।
पार्वती चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
आप पार्वती चालीसा को दैनिक रूप से एक बार पढ़ सकते हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों पर, आप इसे तीन या पाँच बार भी पढ़ सकते हैं। अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार पाठ संख्या निर्धारित की जा सकती है।
निष्कर्ष
पार्वती चालीसा की गहन आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका नियमित पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है, जिससे सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यह चालीसा देवी पार्वती के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि पार्वती चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपको देवी पार्वती की कृपा और आशीर्वाद से जोड़ेगा। जय पार्वती!
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