Panchmukhi Hanuman Chalisa | पंचमुखी हनुमान चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Panchmukhi Hanuman Chalisa | पंचमुखी हनुमान चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein07 Apr 2026155 views📖 1 min read
पंचमुखी हनुमान चालीसा – Panchmukhi Hanuman Chalisa
पंचमुखी हनुमान चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में पंचमुखी हनुमान चालीसा हिंदी में पढ़ें।

पंचमुखी हनुमान चालीसा – परिचय

पंचमुखी हनुमान चालीसा भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप की स्तुति है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं जो हनुमान जी की महिमा का वर्णन करती हैं। माना जाता है कि इस चालीसा की रचना किसी अज्ञात भक्त द्वारा की गई थी, और यह आधुनिक समय में बहुत लोकप्रिय है। यह भगवान हनुमान की शक्ति और सुरक्षा का आह्वान करने का एक शक्तिशाली तरीका है।

पंचमुखी हनुमान चालीसा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह चालीसा हनुमान जी के उस रूप से जुड़ी है जिसमें वे पाँच दिशाओं में मुख वाले हैं, प्रत्येक मुख एक विशेष देवता का प्रतिनिधित्व करता है। भक्तों का मानना है कि इस चालीसा का पाठ करने से भय दूर होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

पंचमुखी हनुमान चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
बरनौ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।
जय पंचमुख हनुमान, जय गिरिजा नन्दन।
सकल विघ्न हर लीजिये, संकट हरण कृपानिधान।।
प्रथम मुख हनुमत जाना, पर्वत शिला सम बलवाना।
द्वितीय मुख नरसिंह देवा, दुष्ट दलन असुर संहार देवा।।
तृतीय मुख है गरूड़ रूप्, विष हरण प्रभु संकट हरण अनूप।
चतुर्थ मुख है सुदर्शन चक्रधारी, भक्तन हित रक्षा करे भयहारी।।
पंचम मुख है हयग्रीव, विद्या बुद्धि ज्ञान के देवा।
पंचमुख हनुमत की आरती, पाप हरण मंगल मूर्ति।।
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा, सकल मनोरथ पूरण कामा।
पंचमुख हनुमत की शरण में आऊँ, सब कष्ट पीड़ा दूर भगाऊँ।।
राम भक्त हनुमान बलधारी, दुष्टों को मार भगावे भयहारी।
पंचमुख हनुमत की महिमा अपरम्पार, जो ध्यावे सो उतरे भव पार।।
रोग शोक दुख दरिद्र भागे, जो पंचमुख हनुमत के आगे।
भूत प्रेत पिशाच भागे डर डर, पंचमुख हनुमत जब करे गर्जन।
कोर्ट कचहरी में हो विजय, जो ध्यावे हनुमत पंचमुख निर्भय।
विद्यार्थी पाएँ विद्या बल ज्ञान, पंचमुख हनुमत करे कल्याण।
व्यापारी पाएँ व्यापार में लाभ, पंचमुख हनुमत से न रहे अभाव।
किसान पाएँ खेती में उन्नति, पंचमुख हनुमत करे सब की स्तुति।
स्त्री पुरुष बच्चे सब ध्यावें, पंचमुख हनुमत से मनचाहा फल पावें।
पंचमुख हनुमत की सेवा जो करे, उसके सब कष्ट प्रभु दूर करे।
पंचमुख हनुमत की कृपा से, सब सुख शांति मिले सहज से।
पंचमुख हनुमत की आरती गाओ, प्रेम से मिलकर जय जय मनाओ।
पंचमुख हनुमत सब के प्यारे, भक्त जनों के संकट हरने वाले।
जो कोई ध्यावे हनुमत का ध्यान, उसे मिले सुख शांति और सम्मान।
पंचमुख हनुमत की शक्ति अपार, जो कोई पुकारे उसे मिले उद्धार।
पंचमुख हनुमत की जय जयकार, भक्तों का बेड़ा करे पार।
पंचमुख हनुमत है सबके रक्षक, उनकी कृपा से सब होवे सफल।
जो कोई पढ़े हनुमान चालीसा, उसकी रक्षा करे हनुमत हमेशा।
हनुमान चालीसा जो कोई गावे, उसे हनुमान जी अपना बनावे।
हनुमान जी की कृपा से, सब दुख दूर होवे सहज से।
हनुमान जी की भक्ति में लीन, हो जाए जीवन सफल और नवीन।
हनुमान जी की महिमा अपरम्पार, जो कोई गावे उसे मिले उद्धार।
हनुमान जी की शरण में आओ, अपने सारे कष्ट दूर भगाओ।
हनुमान जी की कृपा से, सब सुख शांति मिले सहज से।
हनुमान जी की आरती गाओ, प्रेम से मिलकर जय जय मनाओ।
हनुमान जी सब के प्यारे, भक्त जनों के संकट हरने वाले।
जो कोई ध्यावे हनुमान का ध्यान, उसे मिले सुख शांति और सम्मान।
हनुमान जी की शक्ति अपार, जो कोई पुकारे उसे मिले उद्धार।
हनुमान जी की जय जयकार, भक्तों का बेड़ा करे पार।
हनुमान जी है सबके रक्षक, उनकी कृपा से सब होवे सफल।
जो कोई पढ़े हनुमान चालीसा, उसकी रक्षा करे हनुमान हमेशा।
हनुमान चालीसा जो कोई गावे, उसे हनुमान जी अपना बनावे।
हनुमान जी की कृपा से, सब दुख दूर होवे सहज से।
हनुमान जी की भक्ति में लीन, हो जाए जीवन सफल और नवीन।
हनुमान जी की महिमा अपरम्पार, जो कोई गावे उसे मिले उद्धार।
हनुमान जी की शरण में आओ, अपने सारे कष्ट दूर भगाओ।
दोहा:
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
शब्दार्थ: श्री गुरु - गुरुदेव, चरण - पैर, सरोज - कमल, रज - धूल, निज - अपना, मन - चित्त, मुकुर - दर्पण, सुधारि - साफ करके।
भावार्थ: मैं अपने गुरु के कमल रूपी चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूँ, ताकि मैं भगवान राम के यश का वर्णन कर सकूँ।

प्रथम मुख हनुमत जाना, पर्वत शिला सम बलवाना।
भावार्थ: पहला मुख हनुमान जी का है, जो पर्वत के समान बलवान हैं। इस चौपाई में हनुमान जी की शक्ति और सामर्थ्य का वर्णन है।
द्वितीय मुख नरसिंह देवा, दुष्ट दलन असुर संहार देवा।।
भावार्थ: दूसरा मुख नरसिंह भगवान का है, जो दुष्टों और असुरों का नाश करने वाले हैं। यह चौपाई भगवान नरसिंह के उग्र रूप और दुष्टों के विनाशक होने का वर्णन करती है।
तृतीय मुख है गरूड़ रूप्, विष हरण प्रभु संकट हरण अनूप।
भावार्थ: तीसरा मुख गरुड़ का है, जो विष को हरने वाले और संकटों को दूर करने वाले हैं। यह चौपाई गरुड़ जी की विष हरण क्षमता और संकट निवारण शक्ति का वर्णन करती है।
चतुर्थ मुख है सुदर्शन चक्रधारी, भक्तन हित रक्षा करे भयहारी।।
भावार्थ: चौथा मुख सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान का है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं और भय को दूर करते हैं। यह चौपाई भगवान के रक्षात्मक रूप और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन करती है।
पंचम मुख है हयग्रीव, विद्या बुद्धि ज्ञान के देवा।
भावार्थ: पांचवां मुख हयग्रीव का है, जो विद्या, बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। यह चौपाई भगवान हयग्रीव को ज्ञान और विद्या के स्रोत के रूप में स्थापित करती है।

इस चालीसा में पंचमुखी हनुमान की महिमा विशेष रूप से वर्णित है, जिसमें उनके पाँच मुखों के विभिन्न स्वरूपों और शक्तियों का वर्णन है। यह चालीसा भक्तों को भय, संकट और अज्ञान से मुक्ति दिलाने में सहायक है।

पाठ विधि और नियम

पंचमुखी हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार और शनिवार को करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे सुबह या शाम के समय, स्नान करने के बाद पढ़ना चाहिए। आप जितनी बार चाहें उतनी बार पाठ कर सकते हैं, लेकिन कम से कम एक बार अवश्य करें। पाठ करते समय शरीर और मन की पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।

पाठ से पहले, एक दीपक जलाएं, धूप करें, और हनुमान जी को फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। यह सुनिश्चित करें कि आपका मन शांत और स्थिर हो।

हनुमान जयंती, राम नवमी और अन्य हनुमान जी से संबंधित त्योहारों पर पंचमुखी हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा, किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी इस चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

पंचमुखी हनुमान चालीसा के लाभ

  • पंचमुखी हनुमान की विशेष कृपा – पंचमुखी हनुमान चालीसा का पाठ करने से पंचमुखी हनुमान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वे भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वह धन, समृद्धि, स्वास्थ्य या सफलता से संबंधित हो। यह चालीसा भक्तों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है।
  • भय और संकट से रक्षा – पंचमुखी हनुमान चालीसा का नियमित पाठ भक्तों को भय और संकट से बचाता है। यह चालीसा नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों से रक्षा करती है।
  • मानसिक शांति – इस चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत और स्थिर करता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – पंचमुखी हनुमान चालीसा का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करता है। यह चालीसा भक्तों को भगवान के करीब ले जाती है और उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचमुखी हनुमान चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः पंचमुखी हनुमान चालीसा को पढ़ने में 5 से 10 मिनट लगते हैं। यदि आप प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझते हुए और ध्यान से पाठ करते हैं, तो थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या महिलाएं पंचमुखी हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएं पंचमुखी हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं। हनुमान जी सभी के प्रति दयालु हैं और किसी भी भक्त को उनकी भक्ति करने से नहीं रोकते, बस मन और शरीर से पवित्र होना चाहिए।

पंचमुखी हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार पंचमुखी हनुमान चालीसा को पढ़ सकते हैं। दैनिक रूप से एक बार या विशेष अवसरों पर तीन या पाँच बार पढ़ना फलदायी माना जाता है।

निष्कर्ष

पंचमुखी हनुमान चालीसा की गहरी आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराएँ इसकी प्रभावकारिता के बारे में बताती हैं, और इसका दैनिक पाठ एक भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है, उसे शक्ति, सुरक्षा और शांति प्रदान करता है। यह सदियों से भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है।

हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि आप पंचमुखी हनुमान चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपको भगवान हनुमान के करीब लाएगी और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। जय पंचमुखी हनुमान!

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