Mangal Chalisa | मंगल चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Mangal Chalisa | मंगल चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein05 Apr 2026111 views📖 1 min read
मंगल चालीसा – Mangal Chalisa
मंगल चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में मंगल चालीसा हिंदी में पढ़ें।

मंगल चालीसा – परिचय

मंगल चालीसा भगवान मंगल देव को समर्पित एक भक्तिमय स्तोत्र है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, जो मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव को प्राप्त करने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लिखी गई हैं। यह चालीसा प्राचीन काल से प्रचलित है, यद्यपि इसके रचयिता के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह हनुमान जी की चालीसा की भांति ही भक्तों के बीच लोकप्रिय है।

मंगल चालीसा भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। यह भक्तों को मंगल ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में सहायक मानी जाती है। इसके पाठ से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त होती है, और यह उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

मंगल चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

जय मंगल मूर्ति मैं तेरी, सब विधि करहुं सहाय मेरी। ओउम् अं अंगारकाय नमः, कष्ट हरहु ओउम् हनुमते नमः। प्रथम सुमिरन हनुमाना, दुख हरन कृपानिधाना। मंगल तेरा नाम है, जग में तेरा काम है। गहो चरण शरण तुम्हारी, आओ प्रभु अब बारी। मंगलमय रूप तुम्हारा, सब जग लागे प्यारा। तुम हो सबके रखवारे, तुम हो संकट टारन हारे। सब देवों में तुम बलवान, तुम हो संकट के निदान। जो कोई तुम्हे ध्याता है, वह सब सुख पाता है। रोग शोक मिट जाते हैं, कष्ट सब दूर हो जाते हैं। तुम हो तेज पुंज बलशाली, तुम हो भक्तों के रखवाली। तुम हो वीर बजरंगी, तुम हो सबके संगी। तुम्हारी कृपा से सब काम बने, बिगड़े काम भी तुरत सरे। जो कोई तेरा ध्यान लगाए, उसको कभी न कष्ट आए। तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुखहारी। तुम्हारी शक्ति अपरम्पार, तुम हो सबके आधार। जो कोई तेरा नाम जपेगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके भाग्य विधाता, तुम हो सबके सुखदाता। तुम्हारी शरण में जो आता, उसका जीवन सफल हो जाता। तुम हो सबके रक्षक वीर, तुम हो सबके दुख हरण पीर। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। तुम्हारी महिमा अपरम्पार, तुम हो सबके तारणहार। जो कोई तेरा गुण गाता है, वह जीवन में सुख पाता है। तुम हो सबके हितकारी, तुम हो सबके दुःखहारी। तुम्हारी कृपा से सब जग जीता, तुम हो सबके मन में बसा। तुम हो सबके प्यारे देव, तुम हो सबके सच्चे सेव। जो कोई तेरा ध्यान धरता है, वह सब कुछ पाता है। तुम्हारी कृपा से सब काम होते, बिगड़े काम भी पल में होते। तुम हो सबके प्यारे दानी, तुम हो सबके भाग्यमानी। तुम्हारी शरण में जो आता, उसका जीवन सफल हो जाता। तुम हो सबके दाता वीर, तुम हो सबके दुख हरण पीर। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। जो कोई तेरा नाम लेता है, उसका जीवन सफल होता है। तुम हो सबके प्यारे स्वामी, तुम हो सबके अन्तर्यामी। तुम्हारी कृपा से सब कुछ मिले, जो चाहे वह भी पल में मिले। तुम हो सबके रक्षक देव, तुम हो सबके सच्चे सेव। जो कोई तेरा ध्यान लगाएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे मित्र, तुम हो सबके सच्चे हित। तुम्हारी शरण में जो आएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे भाई, तुम हो सबके सुखदाई। जो कोई तेरा गुण गाएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे लाल, तुम हो सबके सुखपाल। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। तुम्हारी महिमा अपरम्पार, तुम हो सबके तारणहार। जो कोई तेरा नाम जपेगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे देव, तुम हो सबके सच्चे सेव। तुम्हारी कृपा से सब काम बने, बिगड़े काम भी तुरत सरे। जो कोई तेरा ध्यान लगाए, उसको कभी न कष्ट आए। तुम हो सबके पालनहारी, तुम हो सबके दुखहारी। तुम्हारी शक्ति अपरम्पार, तुम हो सबके आधार। जो कोई तेरा नाम जपेगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके भाग्य विधाता, तुम हो सबके सुखदाता। तुम्हारी शरण में जो आता, उसका जीवन सफल हो जाता। तुम हो सबके रक्षक वीर, तुम हो सबके दुख हरण पीर। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। तुम्हारी महिमा अपरम्पार, तुम हो सबके तारणहार। जो कोई तेरा गुण गाता है, वह जीवन में सुख पाता है। तुम हो सबके हितकारी, तुम हो सबके दुःखहारी। तुम्हारी कृपा से सब जग जीता, तुम हो सबके मन में बसा। तुम हो सबके प्यारे देव, तुम हो सबके सच्चे सेव। जो कोई तेरा ध्यान धरता है, वह सब कुछ पाता है। तुम्हारी कृपा से सब काम होते, बिगड़े काम भी पल में होते। तुम हो सबके प्यारे दानी, तुम हो सबके भाग्यमानी। तुम्हारी शरण में जो आता, उसका जीवन सफल हो जाता। तुम हो सबके दाता वीर, तुम हो सबके दुख हरण पीर। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी। जो कोई तेरा नाम लेता है, उसका जीवन सफल होता है। तुम हो सबके प्यारे स्वामी, तुम हो सबके अन्तर्यामी। तुम्हारी कृपा से सब कुछ मिले, जो चाहे वह भी पल में मिले। तुम हो सबके रक्षक देव, तुम हो सबके सच्चे सेव। जो कोई तेरा ध्यान लगाएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे मित्र, तुम हो सबके सच्चे हित। तुम्हारी शरण में जो आएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे भाई, तुम हो सबके सुखदाई। जो कोई तेरा गुण गाएगा, वह जीवन में सुख पाएगा। तुम हो सबके प्यारे लाल, तुम हो सबके सुखपाल। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

दोहा: मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदशरथ अजिर बिहारी।
शब्दार्थ: मंगल भवन - कल्याणकारी घर, अमंगल हारी - अशुभता को हरने वाले, द्रवहु - द्रवित हो, सुदशरथ - दशरथ के पिता, अजिर बिहारी - आंगन में विहार करने वाले।
भावार्थ: यह दोहा भगवान राम की स्तुति करता है, जो कल्याणकारी घर हैं और अशुभता को दूर करने वाले हैं। यह भगवान राम से प्रार्थना करता है कि वे दशरथ के आंगन में द्रवित होकर विहार करें और भक्तों पर कृपा करें।

चौपाई 1: जय मंगल मूर्ति मैं तेरी, सब विधि करहुं सहाय मेरी।
भावार्थ: हे मंगल देव, आपकी जय हो। आप मंगलमय रूप वाले हैं। मेरी हर प्रकार से सहायता करें। यह चौपाई मंगल देव की महिमा का वर्णन करती है और उनसे सहायता की प्रार्थना करती है।

चौपाई 2: ओउम् अं अंगारकाय नमः, कष्ट हरहु ओउम् हनुमते नमः।
भावार्थ: मंगल देव को नमन, जो अंगारकाय के नाम से जाने जाते हैं। हनुमान जी को भी नमन, जो कष्टों को हरने वाले हैं। यह चौपाई मंगल देव और हनुमान जी दोनों की स्तुति करती है और उनसे कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करती है।

चौपाई 3: प्रथम सुमिरन हनुमाना, दुख हरन कृपानिधाना।
भावार्थ: सबसे पहले हनुमान जी का स्मरण करता हूँ, जो दुखों को हरने वाले और कृपा के भंडार हैं। यह चौपाई हनुमान जी की कृपा का वर्णन करती है और उन्हें प्रथम स्मरण करने का महत्व बताती है।

चौपाई 4: मंगल तेरा नाम है, जग में तेरा काम है।
भावार्थ: हे मंगल देव, आपका नाम ही मंगल है और संसार में आपका कार्य भी मंगलमय है। यह चौपाई मंगल देव के नाम और कार्य की महिमा का वर्णन करती है।

चौपाई 5: गहो चरण शरण तुम्हारी, आओ प्रभु अब बारी।
भावार्थ: हे प्रभु, मैं आपकी शरण में आता हूँ। अब मेरी बारी है, कृपया मुझ पर कृपा करें। यह चौपाई मंगल देव से उनकी शरण में आने और कृपा करने की प्रार्थना करती है।

मंगल चालीसा में मंगल देव की महिमा विशेष रूप से उनके साहस, शक्ति, और संकटों को दूर करने की क्षमता के रूप में वर्णित है। यह चालीसा भक्तों को आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे वे जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें। इसमें मंगल देव को भक्तों का रक्षक और सहायक बताया गया है जो उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पाठ विधि और नियम

मंगल चालीसा का पाठ मंगलवार के दिन करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह दिन मंगल देव को समर्पित है। पाठ का समय प्रातःकाल या संध्याकाल में शुभ होता है। सामान्यतः एक बार पाठ करना पर्याप्त होता है, लेकिन विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए तीन या पांच पाठ भी किए जा सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

पाठ करने से पहले एक दीपक जलाएं, धूप करें और फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठें और मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। मंगल देव की प्रतिमा या चित्र के सामने पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

हनुमान जयंती, राम नवमी और अन्य मंगलकारी अवसरों पर मंगल चालीसा का पाठ करना सर्वाधिक प्रभावकारी होता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी व्यक्ति के जीवन में मंगल ग्रह का नकारात्मक प्रभाव हो, तो उसे नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करना चाहिए।

मंगल चालीसा के लाभ

  • मंगल देव की विशेष कृपा – मंगल चालीसा का पाठ करने से मंगल देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को साहस, शक्ति और विजय का आशीर्वाद देते हैं। यह चालीसा मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में सहायक है।
  • मनोकामना पूर्ति – मंगल चालीसा के नियमित पाठ से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, विशेषकर विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और भूमि-संपत्ति से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है।
  • भय और संकट से रक्षा – यह चालीसा भक्तों को भय और संकट से बचाती है, उन्हें निर्भय बनाती है और हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रखती है।
  • मानसिक शांति – नियमित रूप से मंगल चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और सकारात्मक विचारों का संचार होता है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – मंगल चालीसा का पाठ भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाता है और उनकी आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह उन्हें ईश्वर के प्रति समर्पित बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मंगल चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः मंगल चालीसा को पढ़ने में लगभग 5 से 7 मिनट लगते हैं। सामान्य पाठ में केवल चालीसा का पाठ किया जाता है, जबकि विस्तारित पाठ में शुरुआत और अंत में कुछ अतिरिक्त मंत्रों का जाप भी शामिल होता है, जिससे समय थोड़ा बढ़ सकता है।

क्या महिलाएं मंगल चालीसा पढ़ सकती हैं?

हां, महिलाएं मंगल चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में किसी भी देवता की स्तुति करने का अधिकार सभी को है, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखते हुए पाठ किया जा सकता है।

मंगल चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

मंगल चालीसा को दैनिक रूप से एक बार पढ़ना उत्तम माना जाता है। विशेष अवसरों पर, जैसे मंगलवार या हनुमान जयंती पर, इसे तीन या पांच बार भी पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष

मंगल चालीसा की गहन आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका दैनिक पाठ भक्त के जीवन को पूर्णतः बदल देता है, उसे साहस और आत्मविश्वास से भर देता है, और सभी बाधाओं को दूर करने में सहायता करता है। यह न केवल मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को कम करती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे मंगल चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगी। जय मंगल देव!

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