Lakshmi Chalisa | लक्ष्मी चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Lakshmi Chalisa | लक्ष्मी चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein02 Apr 202654 views📖 1 min read
लक्ष्मी चालीसा – Lakshmi Chalisa
लक्ष्मी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में लक्ष्मी चालीसा हिंदी में पढ़ें।

लक्ष्मी चालीसा – परिचय

लक्ष्मी चालीसा, माँ लक्ष्मी को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, जो उनकी महिमा और कृपा का वर्णन करती हैं। माना जाता है कि इसका लेखन 18वीं शताब्दी में हुआ और यह तब से ही भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। यह चालीसा माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।

लक्ष्मी चालीसा, भारतीय धार्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह चालीसा उस ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है जिसमें देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का मानना है कि इसके नियमित पाठ से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

लक्ष्मी चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

श्री गणेशाय नमः ॥
दोहा :
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

चौपाई :
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूँ।
सब विधि करहु सुपास, प्रेम सहित सुमिरन करूँ॥
नित नियम से पाठ करूँ मैं, सुख शांति घर आए।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, सब संकट मिट जाए॥
जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको नित सेवत, हर लेते दुख सारा॥
रूप चतुर्भुज धारी, माथे सिंदूर सोहे।
गल माला वैजयंती, मन मोहे मन मोहे॥
स्वर्ण सिंहासन बैठी, हाथ लिए कमल फूल।
देख छवि तेरी माता, मन होता है प्रफुल्ल॥
कभी न हो दरिद्रता, रहे न कोई भी रोग।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, जीवन में हो सुख भोग॥
तुम हो जग की माता, तुम हो भाग्य विधाता।
सबके कष्ट निवारो, भक्तों के हो त्राता॥
घर घर में हो पूजा, धन धान्य से भरे भंडार।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख अपार॥
विष्णु प्रिया तुम हो, शिव की हो अर्द्धांगिनी।
सब देवों में हो श्रेष्ठ, तुम हो सबकी स्वामिनी॥
जो कोई तुमको ध्याता, नहीं रहता कोई भी गम।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख से नम॥
जो कोई तुमको पूजे, नहीं रहता कोई अभाव।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुखद प्रभाव॥
तुम हो शांति स्वरूपा, तुम हो शक्ति अपार।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख संचार॥
तुम हो प्रेम की मूरत, तुम हो दया की सागर।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख उजागर॥
जो कोई तुमको भजता, नहीं रहता कोई भी डर।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख से भर॥
तुम हो धन की देवी, तुम हो ज्ञान की दाता।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख विधाता॥
तुम हो सृष्टि की जननी, तुम हो पालनहारी।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुखकारी॥
जो कोई तुमको माने, नहीं रहता कोई भी क्लेश।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख विशेष॥
तुम हो सबकी आराध्या, तुम हो सबकी पालनहार।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख संसार॥
जो कोई तुमको ध्यावे, नहीं रहता कोई भी शोक।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख आलोक॥
तुम हो सबकी प्रियतमा, तुम हो सबकी हितकारी।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख विस्तारी॥
जो कोई तुमको सेवे, नहीं रहता कोई भी रोग।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख संयोग॥
तुम हो सबकी रक्षक, तुम हो सबकी सहायक।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख दायक॥
जो कोई तुमको सुमिरन, नहीं रहता कोई भी काम।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख अभिराम॥
तुम हो सबकी उद्धारक, तुम हो सबकी तारक।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख कारक॥
जो कोई तुमको गाता, नहीं रहता कोई भी कष्ट।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख उत्कृष्ट॥
तुम हो सबकी शक्ति, तुम हो सबकी भक्ति।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख युक्ति॥
जो कोई तुमको जपता, नहीं रहता कोई भी पाप।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख आप॥
तुम हो सबकी प्रेरणा, तुम हो सबकी कामना।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख सामना॥
जो कोई तुमको भजे, नहीं रहता कोई भी छल।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख अचल॥
तुम हो सबकी माता, तुम हो सबकी पिता।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, हो जीवन सुख अनिता॥
जो कोई तुमको ध्याता है, सुख संपत्ति पाता है।
कृपा करो माँ लक्ष्मी, जीवन सुखमय हो जाता है॥

दोहा:
चालीसा लक्ष्मी पढ़ी, जो कोई मन लाए।
उस पर माँ लक्ष्मी की, सदा कृपा रहे आए॥

शब्द-अर्थ और भावार्थ

"मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास" का अर्थ है, हे माँ लक्ष्मी, मुझ पर कृपा करो और मेरे हृदय में निवास करो। इसका भावार्थ है कि भक्त माँ लक्ष्मी से अपने हृदय में सदा रहने और अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना कर रहा है।

पहली चौपाई "यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूँ" का भावार्थ है कि भक्त हाथ जोड़कर माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करता है। दूसरी चौपाई "सब विधि करहु सुपास, प्रेम सहित सुमिरन करूँ" में भक्त माँ लक्ष्मी से हर प्रकार से सहायता करने और प्रेमपूर्वक स्मरण करने की बात कहता है। तीसरी चौपाई "नित नियम से पाठ करूँ मैं, सुख शांति घर आए" में भक्त नियमित रूप से पाठ करने का संकल्प लेता है ताकि घर में सुख और शांति आए। चौथी चौपाई "कृपा करो माँ लक्ष्मी, सब संकट मिट जाए" में माँ लक्ष्मी से सभी संकटों को दूर करने की प्रार्थना की गई है। पांचवीं चौपाई "जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता" में माँ लक्ष्मी की जय-जयकार की गई है।

इस चालीसा में लक्ष्मी की महिमा विशेष रूप से धन, समृद्धि, सुख, शांति और संकटों से मुक्ति के रूप में वर्णित है। यह चालीसा लक्ष्मी को जग की माता, भाग्य विधाता और भक्तों के त्राता के रूप में चित्रित करती है।

पाठ विधि और नियम

लक्ष्मी चालीसा का पाठ शुक्रवार के दिन करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित है। प्रातःकाल या संध्याकाल का समय पाठ के लिए उत्तम है। आप एक या तीन बार पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

पाठ से पहले एक दीपक जलाएं, धूप करें, और माँ लक्ष्मी को फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करें।

दिवाली, लक्ष्मी पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर लक्ष्मी चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है। किसी भी व्रत या त्योहार पर माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ इस चालीसा का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।

लक्ष्मी चालीसा के लाभ

  • लक्ष्मी की विशेष कृपा – लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं। इससे जीवन में धन, समृद्धि और खुशहाली आती है।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा के पाठ से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वे धन, संतान, स्वास्थ्य या किसी अन्य प्रकार की हों। यह इच्छापूर्ति का अचूक उपाय है।
  • भय और संकट से रक्षा – लक्ष्मी चालीसा का नियमित पाठ भक्तों को सभी प्रकार के भय और संकटों से बचाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • मानसिक शांति – इस चालीसा के नियमित पाठ से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है। यह आंतरिक शांति और सकारात्मकता लाता है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – लक्ष्मी चालीसा का पाठ भक्तों को मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यह उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्त होने में मदद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लक्ष्मी चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः लक्ष्मी चालीसा को पढ़ने में लगभग 5 से 10 मिनट लगते हैं। यदि आप प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझते हुए और ध्यानपूर्वक पाठ करते हैं, तो थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या महिलाएं लक्ष्मी चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएं लक्ष्मी चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में महिलाओं को सभी धार्मिक ग्रंथों और स्तोत्रों को पढ़ने का अधिकार है, और लक्ष्मी चालीसा भी उनमें से एक है। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

लक्ष्मी चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

लक्ष्मी चालीसा को आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार पढ़ सकते हैं। दैनिक रूप से एक बार या शुक्रवार को तीन बार पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है। विशेष अवसरों पर आप इसे अधिक बार भी पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

लक्ष्मी चालीसा की गहन आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका नियमित पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है, जिससे सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। यह माँ लक्ष्मी की कृपा को आकर्षित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि आप लक्ष्मी चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपको माँ लक्ष्मी के करीब लाएगी और आपके जीवन को आनंद से भर देगी। जय लक्ष्मी!

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