Kartikeya Chalisa | कार्तिकेय चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Kartikeya Chalisa | कार्तिकेय चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein02 Apr 202664 views📖 1 min read
कार्तिकेय चालीसा – Kartikeya Chalisa
कार्तिकेय चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में कार्तिकेय चालीसा हिंदी में पढ़ें।

कार्तिकेय चालीसा – परिचय

कार्तिकेय चालीसा भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक भक्तिमय स्तोत्र है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, जिनमें भगवान कार्तिकेय की महिमा का वर्णन है। माना जाता है कि यह चालीसा प्राचीन काल से प्रचलित है और भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक पढ़ी जाती है।

कार्तिकेय चालीसा स्कन्द पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों की परंपरा से जुड़ी है। इसका आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है, और यह भक्तों को भगवान कार्तिकेय के करीब लाने और उनकी कृपा प्राप्त करने में सहायक मानी जाती है।

कार्तिकेय चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

जय जय जय कार्तिकेय स्वामी,
कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।
शरवण भव सुन्दर सुकुमार,
देव सेनापति अपरम्पार।।
शक्ति हस्त तुम शोभा भारी,
सुरपति तुम हो अति बलधारी।
मोर वाहन सोहे अति प्यारा,
दर्शन से मिटे संकट सारा।।
अग्नि पुत्र तुम कहलाओ,
गंगा पुत्र भी महिमा गाओ।
तारकासुर को तुमने मारा,
देवताओं का भय निवारा।।
ब्रह्मा विष्णु महेश तुम्हारे,
चरणों में करते सब वन्दना रे।
कार्तिकेय नाम जो कोई ध्यावे,
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति पावे।।
क्रोध शांत अति दयालु रूप,
भक्तों पर करते अनुरूप।
महिमा अगम अपरम्पार,
कैसे करे दास वर्णन सार।।
तुम हो स्वामी षडानन देवा,
जो तुमको ध्यावे पावे मेवा।
रोग शोक दुख दारिद्र हरते,
कार्तिकेय स्वामी तुम दुख सहते।।
शरण तुम्हारी जो कोई आवे,
उसके कष्ट पल में मिट जावे।
सत्य बुद्धि विद्या बल देते,
कार्तिकेय स्वामी सुख भर देते।।
कुमारा स्वामी तुम हो महान,
तेरी लीला जाने भगवान।
जो जन करे तुम्हारा पूजन,
उसका होता सदा शुभ शगुन।।
जो कोई पढ़े चालीसा तुम्हारी,
उस पर कृपा करे त्रिपुरारी।
मनवांछित फल निश्चय पावे,
कार्तिकेय स्वामी सदा सहाय करे।।
जय जय जय कार्तिकेय स्वामी,
कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।
शरवण भव सुन्दर सुकुमार,
देव सेनापति अपरम्पार।।
शक्ति हस्त तुम शोभा भारी,
सुरपति तुम हो अति बलधारी।
मोर वाहन सोहे अति प्यारा,
दर्शन से मिटे संकट सारा।।
अग्नि पुत्र तुम कहलाओ,
गंगा पुत्र भी महिमा गाओ।
तारकासुर को तुमने मारा,
देवताओं का भय निवारा।।
ब्रह्मा विष्णु महेश तुम्हारे,
चरणों में करते सब वन्दना रे।
कार्तिकेय नाम जो कोई ध्यावे,
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति पावे।।
क्रोध शांत अति दयालु रूप,
भक्तों पर करते अनुरूप।
महिमा अगम अपरम्पार,
कैसे करे दास वर्णन सार।।
तुम हो स्वामी षडानन देवा,
जो तुमको ध्यावे पावे मेवा।
रोग शोक दुख दारिद्र हरते,
कार्तिकेय स्वामी तुम दुख सहते।।
शरण तुम्हारी जो कोई आवे,
उसके कष्ट पल में मिट जावे।
सत्य बुद्धि विद्या बल देते,
कार्तिकेय स्वामी सुख भर देते।।
कुमारा स्वामी तुम हो महान,
तेरी लीला जाने भगवान।
जो जन करे तुम्हारा पूजन,
उसका होता सदा शुभ शगुन।।
जो कोई पढ़े चालीसा तुम्हारी,
उस पर कृपा करे त्रिपुरारी।
मनवांछित फल निश्चय पावे,
कार्तिकेय स्वामी सदा सहाय करे।।
दोहा:
कार्तिकेय चालीसा जो पढ़े,
प्रेम सहित विश्वास।
सकल मनोरथ सिद्ध हो,
दूर हो क्लेश विनाश।।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

कार्तिकेय चालीसा जो पढ़े, प्रेम सहित विश्वास। सकल मनोरथ सिद्ध हो, दूर हो क्लेश विनाश।। इस दोहे का अर्थ है कि जो कोई भी कार्तिकेय चालीसा को प्रेम और विश्वास के साथ पढ़ता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह दोहा चालीसा के पाठ के महत्व और प्रभाव को दर्शाता है।

जय जय जय कार्तिकेय स्वामी, कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी। इस चौपाई में भगवान कार्तिकेय की जय-जयकार की जा रही है और उनसे अपने भक्तों पर कृपा करने की प्रार्थना की जा रही है। यहां कार्तिकेय को अन्तर्यामी कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि वे सबके मन की बात जानते हैं।

शरवण भव सुन्दर सुकुमार, देव सेनापति अपरम्पार।। इस चौपाई में कार्तिकेय को शरवण भव कहा गया है, क्योंकि उनका जन्म शरवण नामक वन में हुआ था। वे सुंदर और सुकुमार हैं, और देवताओं की सेना के अद्वितीय सेनापति हैं।

शक्ति हस्त तुम शोभा भारी, सुरपति तुम हो अति बलधारी। इस चौपाई में कार्तिकेय के हाथों में शक्ति होने की बात कही गई है, जो उनकी शोभा को बढ़ाती है। वे देवताओं के स्वामी हैं और अत्यंत बलशाली हैं।

मोर वाहन सोहे अति प्यारा, दर्शन से मिटे संकट सारा।। इस चौपाई में कार्तिकेय के वाहन मोर की सुंदरता का वर्णन है। यह भी कहा गया है कि उनके दर्शन मात्र से ही सभी संकट दूर हो जाते हैं।

कार्तिकेय चालीसा में विशेष रूप से कार्तिकेय की देवताओं के सेनापति के रूप में महिमा, उनकी सुंदरता, शक्ति और भक्तों के प्रति उनकी दयालुता का वर्णन किया गया है। यह चालीसा उनके भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से बचाने और उनकी मनोकामनाएं पूरी करने में सहायक मानी जाती है।

पाठ विधि और नियम

कार्तिकेय चालीसा का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन मंगलवार और षष्ठी तिथि माने जाते हैं। आप इसे सुबह या शाम को, किसी भी समय पढ़ सकते हैं। सामान्यतः, एक बार पाठ करना पर्याप्त होता है, लेकिन आप अपनी श्रद्धा और आवश्यकता के अनुसार अधिक पाठ भी कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

कार्तिकेय चालीसा का पाठ करने से पहले एक दीपक जलाएं, धूप करें और भगवान कार्तिकेय को फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

कार्तिकेय चालीसा का पाठ विशेष रूप से स्कन्द षष्ठी, मासिक कृत्तिका नक्षत्र और अन्य कार्तिकेय से संबंधित व्रत और त्योहारों पर फलदायी होता है। इन अवसरों पर पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

कार्तिकेय चालीसा के लाभ

  • कार्तिकेय की विशेष कृपा – कार्तिकेय चालीसा का पाठ करने से भगवान कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। वे अपने भक्तों को साहस और शक्ति प्रदान करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वे धन, संतान, विद्या या किसी अन्य प्रकार की हों। यह पाठ जीवन में सफलता और समृद्धि लाता है।
  • भय और संकट से रक्षा – कार्तिकेय चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को सभी प्रकार के भय और संकटों से रक्षा मिलती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • मानसिक शांति – कार्तिकेय चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत करता है और तनाव को कम करता है। इससे सकारात्मक विचार आते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – यह चालीसा मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है। यह भक्तों को भगवान के करीब लाता है और उन्हें आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कार्तिकेय चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः कार्तिकेय चालीसा को पढ़ने में लगभग 5-7 मिनट लगते हैं। सामान्य पाठ में केवल चालीसा का पाठ किया जाता है, जबकि विस्तारित पाठ में चालीसा के पहले और बाद में कुछ अतिरिक्त मंत्रों का जाप भी किया जाता है।

क्या महिलाएं कार्तिकेय चालीसा पढ़ सकती हैं?

हां, महिलाएं कार्तिकेय चालीसा पढ़ सकती हैं। इसमें कोई निषेध नहीं है, और सभी भक्त श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

कार्तिकेय चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

आप कार्तिकेय चालीसा को प्रतिदिन एक बार पढ़ सकते हैं। विशेष अवसरों पर, जैसे स्कन्द षष्ठी, आप इसे तीन या पांच बार भी पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

कार्तिकेय चालीसा में असीम आध्यात्मिक शक्ति निहित है, और यह हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक मानी जाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका दैनिक पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि कार्तिकेय चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपके जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लाएगा। जय कार्तिकेय!

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