Hanuman Ashtak | हनुमान अष्टक – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

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हनुमान अष्टक – परिचय
हनुमान अष्टक भगवान हनुमान को समर्पित एक स्तुति है, जिसमें आठ चौपाइयाँ हैं। यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है और सदियों से प्रचलित है। यह हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और करुणा का वर्णन करता है।
हनुमान अष्टक रामचरितमानस की ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है और इसका भक्तों पर गहरा आध्यात्मिक प्रभाव है। इसके पाठ से भक्तों को शांति, शक्ति और सुरक्षा का अनुभव होता है।
हनुमान अष्टक – सम्पूर्ण पाठ
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
चौपाई:
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद शारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लिल्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जन्म जन्म के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।
दोहा:
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
शब्द-अर्थ और भावार्थ
आरंभिक दोहे में, तुलसीदास जी कहते हैं कि वे अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन को स्वच्छ करते हैं। वे रघुनाथ (राम) के निर्मल यश का वर्णन करते हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - चारों फल देने वाला है।
पहली चौपाई, "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।" का भावार्थ है कि हनुमान जी ज्ञान और गुणों के सागर हैं। वे वानरों के राजा हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। दूसरी चौपाई में उन्हें रामदूत और अतुलित बल का धाम बताया गया है। तीसरी और चौथी चौपाई में उनके विभिन्न नामों और गुणों का वर्णन है, जैसे महावीर, बजरंगी, और कुमति निवारक। पांचवीं चौपाई में उनके स्वर्णिम रंग और सुंदर वस्त्रों का वर्णन है।
इस चालीसा में हनुमान की महिमा विशेष रूप से उनके राम-भक्ति, सेवा-भाव और संकटमोचन रूप में वर्णित है। वे राम के कार्यों को सिद्ध करने में सहायक हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करने वाले हैं।
पाठ विधि और नियम
हनुमान अष्टक का पाठ मंगलवार और शनिवार को करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे सुबह या शाम के समय करना उचित है। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाना चाहिए।
पाठ से पहले दीपक जलाएं, धूप करें, और हनुमान जी को फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करें।
हनुमान जयंती, रामनवमी और अन्य हनुमान मंदिरों के त्योहारों पर हनुमान अष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है।
हनुमान अष्टक के लाभ
- हनुमान की विशेष कृपा – हनुमान अष्टक का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। वे उन्हें शक्ति, साहस और बुद्धि प्रदान करते हैं।
- मनोकामना पूर्ति – इस पाठ से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वे धन, सुख, शांति या समृद्धि से जुड़ी हों।
- भय और संकट से रक्षा – हनुमान अष्टक का नियमित पाठ भक्तों को भय और संकट से बचाता है और उन्हें सुरक्षित रखता है।
- मानसिक शांति – इस पाठ के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – हनुमान अष्टक का पाठ मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हनुमान अष्टक कितने समय में पढ़ी जाती है?
हनुमान अष्टक को सामान्यतः 5-7 मिनट में पढ़ा जा सकता है। विस्तारित पाठ में अधिक समय लग सकता है, जिसमें अर्थ और भाव सहित पाठ किया जाता है।
क्या महिलाएं हनुमान अष्टक पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएं हनुमान अष्टक पढ़ सकती हैं। इसमें कोई निषेध नहीं है, और यह भक्ति और श्रद्धा का विषय है।
हनुमान अष्टक कितनी बार पढ़नी चाहिए?
हनुमान अष्टक को दैनिक रूप से एक बार या अधिक पढ़ा जा सकता है। विशेष अवसरों पर इसे 11, 21 या 108 बार पढ़ना फलदायी माना जाता है।
निष्कर्ष
हनुमान अष्टक की गहरी आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका दैनिक पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है, उसे शक्ति, सुरक्षा और शांति प्रदान करता है। यह हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का मार्ग है।
भक्तों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे हनुमान अष्टक को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। जय हनुमान!
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