Annapurna Chalisa | अन्नपूर्णा चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Annapurna Chalisa | अन्नपूर्णा चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein06 Apr 202642 views📖 1 min read
अन्नपूर्णा चालीसा – Annapurna Chalisa
अन्नपूर्णा चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में अन्नपूर्णा चालीसा हिंदी में पढ़ें।

अन्नपूर्णा चालीसा – परिचय

अन्नपूर्णा चालीसा माता अन्नपूर्णा को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, इसलिए इसे चालीसा कहा जाता है। माना जाता है कि इसकी रचना किसी अज्ञात भक्त द्वारा की गई है, और यह सदियों से हिन्दू घरों में प्रचलित है। यह चालीसा माता अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने और घर में कभी अन्न-धन की कमी न होने देने के लिए गाई जाती है।

अन्नपूर्णा चालीसा शाक्त ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है, जो देवी को सर्वोच्च शक्ति के रूप में पूजती है। यह अन्नपूर्णा व्रत कथा का अभिन्न अंग है और भक्तों पर इसका गहरा प्रभाव है। इसके पाठ से भक्तों को न केवल भौतिक समृद्धि मिलती है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और संतोष भी प्राप्त होता है।

अन्नपूर्णा चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

जय जय जय अन्नपूर्णा, कृपानिधान निवास पूर्णा।
नित्यानंद करी वरदानी, सब जग हो तुम से सुखदानी।।
काशी पुरी निवासिनी माता, सब के मन को हरषमाता।
अन्नदान की हो दातारी, संकट हरणी विपद निवारी।।
जयति जयति जय अन्नपूर्णा , सदा रहो भक्तों से पूर्णा।
जो कोई ध्यावे तुमको मन से, पूर्ण हो काम उसके तन से।।
तुम्हीं हो दुर्गा काली माई, तुम ही हो लक्ष्मी सुखदाई।
तुम ही हो सरस्वती ज्ञानी, सब जग में हो तुम कल्याणी।।
अन्न धन की हो भंडारी, सब की करती हो रखवारी।
जो कोई आवे तेरे द्वारे, पूर्ण हो काम उसके सारे।।
रोग शोक भय दुख सब भागे, जो कोई तेरा नाम रटे आगे।
कृपा करो माता दयालु, सदा रहो भक्तों के अनुकूलु।।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।।
तुम हो शक्ति तुम हो माया, तुम हो अन्नपूर्णा काया।
जो कोई ध्यावे तुमको माता, पूर्ण हो कामना उसके तन जाता।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।।
अन्नपूर्णा नाम तुम्हारा, सब जग का हो जीवन सहारा।
जो कोई पढ़े चालीसा तेरी, पूर्ण हो कामना उसकी मेरी।। सब जग में हो तुम्हारा नाम, अन्नपूर्णा हो सुखधाम।
पढ़े जो यह चालीसा प्रेम से, सुख शांति पावे वह हर्ष से।।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

जय जय जय अन्नपूर्णा, कृपानिधान निवास पूर्णा।

शब्दार्थ: जय = स्तुति, अन्नपूर्णा = अन्न की देवी, कृपानिधान = कृपा का खजाना, निवास = रहने का स्थान, पूर्णा = परिपूर्ण। भावार्थ: अन्नपूर्णा माता की जय हो, जय हो, जय हो! वे कृपा का भंडार हैं और परिपूर्णता के निवास स्थान हैं। इसका अर्थ है कि माता अन्नपूर्णा की कृपा से सब कुछ परिपूर्ण होता है।

पहली पाँच चौपाइयों का भावार्थ:

  • पहली चौपाई में माता अन्नपूर्णा की स्तुति की गई है, उन्हें कृपानिधान और परिपूर्णता का निवास बताया गया है।
  • दूसरी चौपाई में माता को नित्य आनंद देने वाली और वरदान देने वाली बताया गया है, जिनसे सभी को सुख प्राप्त होता है।
  • तीसरी चौपाई में माता को काशी पुरी में निवास करने वाली और सबके मन को प्रसन्न करने वाली बताया गया है।
  • चौथी चौपाई में माता को अन्नदान करने वाली, संकट हरने वाली और विपदाओं को दूर करने वाली बताया गया है।
  • पांचवीं चौपाई में माता की जयजयकार करते हुए उन्हें सदा भक्तों से परिपूर्ण रहने की प्रार्थना की गई है।

अन्नपूर्णा चालीसा में माता अन्नपूर्णा की महिमा का विशेष रूप से वर्णन है कि वे अन्न और धन की भंडारिणी हैं और सभी की रक्षा करती हैं। यह भी वर्णित है कि जो कोई भी उनके द्वार पर आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पाठ विधि और नियम

अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने के लिए सबसे अच्छा दिन शुक्रवार माना जाता है, लेकिन इसे किसी भी दिन किया जा सकता है। प्रातःकाल या संध्याकाल का समय श्रेष्ठ है। पाठ की संख्या अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार निर्धारित कर सकते हैं, लेकिन कम से कम एक पाठ अवश्य करें। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

पाठ से पहले एक दीपक जलाएं, धूप करें, और माता अन्नपूर्णा को फूल अर्पित करें। एक आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। शांत और एकाग्र मन से चालीसा का पाठ करें।

अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ नवरात्रि, अन्नपूर्णा जयंती और अन्य धार्मिक त्योहारों पर विशेष फलदायी होता है। इन अवसरों पर पाठ करने से माता अन्नपूर्णा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

अन्नपूर्णा चालीसा के लाभ

  • अन्नपूर्णा माता की विशेष कृपा – अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से माता अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को अन्न और धन की कमी नहीं होने देतीं। वे अपने भक्तों के घर को हमेशा भरे रखती हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, खासकर भोजन और धन से संबंधित इच्छाएं। यह जीवन में समृद्धि और संतुष्टि लाता है।
  • भय और संकट से रक्षा – अन्नपूर्णा चालीसा का नियमित पाठ भक्तों को सभी प्रकार के भय और संकटों से बचाता है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • मानसिक शांति – इस चालीसा का पाठ मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह तनाव और चिंता को कम करता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह भक्तों को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है और ईश्वर के करीब लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अन्नपूर्णा चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

अन्नपूर्णा चालीसा को पढ़ने में सामान्यतः 5 से 7 मिनट लगते हैं। यदि आप प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझते हुए और ध्यानपूर्वक पाठ करते हैं, तो थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या महिलाएं अन्नपूर्णा चालीसा पढ़ सकती हैं?

हां, महिलाएं अन्नपूर्णा चालीसा बिल्कुल पढ़ सकती हैं। हिन्दू धर्म में किसी भी देवी या देवता की स्तुति करने का अधिकार सभी को है, चाहे वह पुरुष हो या महिला।

अन्नपूर्णा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

अन्नपूर्णा चालीसा को आप अपनी श्रद्धा और आवश्यकतानुसार पढ़ सकते हैं। दैनिक रूप से एक बार या विशेष अवसरों पर तीन या पांच बार पढ़ना फलदायी माना जाता है।

निष्कर्ष

अन्नपूर्णा चालीसा की गहरी आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका दैनिक पाठ भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देता है। यह न केवल भौतिक समृद्धि लाता है, बल्कि आध्यात्मिक विकास और आंतरिक शांति भी प्रदान करता है।

हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि आप अन्नपूर्णा चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। माता अन्नपूर्णा की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि सदैव बनी रहे। जय अन्नपूर्णा माता!

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