
शिव पार्वती विवाह कथा – अध्याय 7: दिव्य विवाह और मिलन
शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 7 — दिव्य विवाह और मिलन। शिव और पार्वती का भव्य विवाह होता है और वे कैलाश पर्वत पर आनंदमय जीवन बिताते हैं, जिससे सृष्टि में संतुलन स्थापित होता है।
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शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 7 — दिव्य विवाह और मिलन। शिव और पार्वती का भव्य विवाह होता है और वे कैलाश पर्वत पर आनंदमय जीवन बिताते हैं, जिससे सृष्टि में संतुलन स्थापित होता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 6 — विवाह प्रस्ताव और स्वीकृति। सप्तऋषि हिमवान के पास शिव का विवाह प्रस्ताव लेकर जाते हैं और पार्वती के माता-पिता इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 5 — कामदेव का हस्तक्षेप और अंत। देवताओं के कहने पर कामदेव शिव का ध्यान भंग करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण शिव क्रोधित होकर उन्हें भस्म कर देते हैं।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 4 — पार्वती की परीक्षा और दृढ़ता। पार्वती की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए शिव एक ब्राह्मण का रूप धारण करके आते हैं, लेकिन पार्वती अपनी भक्ति में अटल रहती हैं।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 3 — पार्वती का जन्म और भक्ति। पार्वती का हिमवान और मैना के घर जन्म होता है और वे बचपन से ही शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करती हैं।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 2 — तारकासुर का आतंक और भविष्यवाणी। तारकासुर के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हैं और देवताओं को यह भविष्यवाणी पता चलती है कि शिव पुत्र ही उसे मार सकता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 1 — सती का बलिदान और शोक। सती अपने पिता के अनादर से आहत होकर अग्नि में समाहित हो जाती हैं, जिससे शिव गहरे शोक में डूब जाते हैं।