भजन

Shyam Teri Bansi Pukare | श्याम तेरी बाँसुरी – बोल, अर्थ और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026196 views
श्याम तेरी बाँसुरी – Shyam Teri Bansi Pukare
श्याम तेरी बाँसुरी – सम्पूर्ण भजन बोल, हिंदी अर्थ और कृष्ण की महिमा। भक्ति संगीत।

श्याम तेरी बाँसुरी – परिचय

श्याम तेरी बाँसुरी एक लोकप्रिय कृष्ण भजन है, जो भगवान कृष्ण और उनकी दिव्य बांसुरी को समर्पित है। यह भजन सदियों से प्रचलित है और अनगिनत भक्तों द्वारा गाया जाता रहा है। इसके रचयिता अज्ञात हैं, लेकिन यह उत्तर भारतीय भक्ति संगीत परंपरा का अभिन्न अंग है।

हिंदी भक्ति संगीत में इस भजन का स्थान बहुत ऊँचा है। यह अपनी मधुर धुन, सरल बोल और गहरी भक्ति भावना के कारण व्यापक रूप से पसंद किया जाता है। यह कृष्ण मंदिरों और घरों में समान रूप से गाया जाता है।

श्याम तेरी बाँसुरी के बोल (Lyrics)

श्याम तेरी बाँसुरी, बाजे गोकुल गाँव में,
राधा नाचे, कान्हा नाचे, नाचे सारा गाँव रे।

मथुरा नगरी से आई, यमुना किनारे,
बाँसुरी की धुन सुनकर, दौड़ी आई राधा प्यारी रे।
श्याम तेरी बाँसुरी, बाजे गोकुल गाँव में,
राधा नाचे, कान्हा नाचे, नाचे सारा गाँव रे।

ग्वाल बाल सब दौड़े आए, लेकर अपनी गैया,
बाँसुरी की धुन सुनकर, भूल गए सब अपनी नैया रे।
श्याम तेरी बाँसुरी, बाजे गोकुल गाँव में,
राधा नाचे, कान्हा नाचे, नाचे सारा गाँव रे।

मीरा भी दीवानी हुई, कृष्ण प्रेम में रंगी,
बाँसुरी की धुन सुनकर, छोड़ दिया उसने अपना ढंग रे।
श्याम तेरी बाँसुरी, बाजे गोकुल गाँव में,
राधा नाचे, कान्हा नाचे, नाचे सारा गाँव रे।

भजन का अर्थ

मुखड़े का अर्थ है "हे श्याम, तुम्हारी बांसुरी गोकुल गांव में बज रही है"। इसका भावार्थ है कि कृष्ण की बांसुरी की मधुर ध्वनि पूरे गोकुल गांव में आनंद और भक्ति का माहौल बना रही है।

पहले अंतरे का भावार्थ यह है कि मथुरा नगरी से यमुना किनारे राधा प्यारी बाँसुरी की धुन सुनकर दौड़ी चली आती है। यह कृष्ण के प्रति राधा के प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।

भजन का समग्र संदेश यह है कि कृष्ण की बांसुरी की ध्वनि भक्तों को आनंद, भक्ति और प्रेम से भर देती है। भक्त कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम का अनुभव करता है।

भजन का इतिहास

श्याम तेरी बाँसुरी एक प्राचीन भजन है जिसकी रचना अज्ञात है। यह भजन पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से प्रसारित होता रहा है। यह भजन कृष्ण भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह भजन कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी और अन्य कृष्ण संबंधित त्योहारों पर मंदिरों और घरों में गाया जाता है। यह विशेष पूजा और आरती के दौरान भी गाया जाता है।

भजन के लाभ

  • आध्यात्मिक लाभ – यह भजन कृष्ण से जुड़ने में मदद करता है और आध्यात्मिक जागृति लाता है। यह भक्त को भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति से भर देता है।
  • मानसिक लाभ – यह भजन शांति और सकारात्मकता लाता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और मन को शांत करता है।
  • भक्ति का विकास – नियमित रूप से इस भजन का गायन भक्ति को बढ़ाता है और कृष्ण के प्रति प्रेम को गहरा करता है। यह भक्त को भगवान के करीब लाता है।

निष्कर्ष

श्याम तेरी बाँसुरी कृष्ण के लिए सबसे महान भक्ति रचनाओं में से एक है क्योंकि इसमें संगीतमय सौंदर्य, भावना और वह प्रेम है जिसके कारण पीढ़ियों से भक्त इसे पसंद करते आए हैं। इसकी धुन आत्मा को छू जाती है और कृष्ण के प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न करती है।

भक्तों के लिए यह प्रेरणादायक संदेश है कि वे इस भजन को प्रतिदिन प्रेम से गाएं। जय कृष्ण!

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आज का पंचांग 11 सितम्बर 2026

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